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सरकारी तंत्र विफल, धान उत्पादक आंदोलित…

By   /  October 11, 2013  /  No Comments

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-अयोध्या प्रसाद ‘भारती’
रुद्रपुर (उत्तराखंड), धान खरीद में सरकारी हीला-हवाली के चलते जिले भर के किसान आंदोलित हैं. अखिल भारतीय किसान सभा तीन दिन से किच्छा मंडी में आंदोलन कर रही है. गुरुवार को किसानों ने मंडी सचिव का घेराव कर कहा कि किसानों के साथ न्याय नहीं हुआ तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे. कहा कि विभाग की मिलीभगत से अनाज कारोबारी, राइस मिलर किसानों का शोषण कर रहे हैं. बुधवार को वार्ता हुई थी कि मिलर खुली बोली के जरिये किसानों का धान मंडी में खरीदेंगे लेकिन गुरुवार को मिलर मंडी नहीं आए. इस पर सचिव ने कहा कि उन्होंने सभी को फोन पर आने के लिए बोला था लेकिन कोई नहीं आया. उन्हें नोटिस जारी किया जाएगा. किसानों का आरोप है कि नमी के नाम पर बेहिसाब कटौती की जाती है, सीधे खरीद की जाती है जिससे किसान को फसल का उचित दाम नहीं मिलता और सरकार को मंडी शुल्क का भारी नुक्सान होता है. मंडी में अनाज सुखाने वाली मशीनें मंडी कर्मियों और कारोबारियों की मिलीभगत के चलते खराब पड़ी हैं. किसानों के लिए निर्धारित फड़ों पर कारोबारी कब्जा किए रहते हैं. धान की फसल कटाई के अंतिम चरण में है लेकिन अभी तक सरकारी एजेंसियों ने खरीद के लिए निर्धारित इंतजाम नहीं किए हैं.Kichha Mandi Farmer Protest
दो दिन पहले खटीमा मंडी में खरीद का इंतजाम न होने पर किसानों ने हंगामा किया तो उन्हें एफसीआई, आरएफसी तथा सहकारिता विभाग ने बताया कि अभी सरकार से कोई लिखित आदेश प्राप्त नहीं हुए हैं. समर्थन मूल्य के मामले में भी कोई आदेश से इन्कार किया. इस पर एसडीएम ने सहायक निबंधक सहकारिता से फोन पर जानकारी चाही तो उन्होंने भी समर्थन मूल्य के बावत सरकार से आदेश न मिलने की बात कही.
सितारगंज में धान खरीद के इंतजाम न होने पर किसान तालाबंदी कर चुके हैं. उधर काशीपुर में भी किसान अव्यवस्थाओं को लेकर आंदोलित हैं. किच्छा मंडी के सचिव का कहना है कि जब तक सरकार आदेश नहीं देती, कारोबारी सहयोग नहीं करते तो उनके पास कोई जादू की छड़ी नहीं है जो किसानों की समस्याओं का तुरंत समाधान कर दें.
किसान सभा ने मांग की कि 70 किलो की धान की बोरी पर आधा किलो से लेकर चार किलो तक का अवैा पर्ता काटने के बजाए नमी के हिसाब से काटा जाए या फसल का दाम कम किया जाए, किसानों को फसल का लाभकारी मूल्य मिले अथवा सरकार द्वारा घोषित समर्थन मूल्य दिया जाना सुनिश्चित किया जाए, धान सुखाने के लिए किसानों को निर्धारित फड़ों से अवैध कब्जे हटाए जाएं, ड्राई मशीनें ठीक कराई जाएं, मिल मालिक खुली बोली के जरिये मंडी में धान खरीदें, सीधी खरीद पर रोक लगाई जाए, जो सीधी खरीद करते हैं उनकी जांच कर मंडी शुल्क वसूला जाए, सरकारी एजेंसियों द्वारा खरीद के पर्याप्त इंतजाम किए जाएं. साथ ही मंडी को दलालों से मुक्त किया जाए. उन्होंने चेतावनी दी कि मांगें नहीं माने जाने पर वे कृषि उत्पादन विपणन बोर्ड भवन पर धरना देने को बाध्य होंगे. यहां पर जसबंत सिंह, जगीर सिंह, अवतार सिंह, गुरप्रीत सिंह, करनैल सिंह, गुरुनाम सिंह, जगरूप सिंह, जोगेंद्र सिंह और हरपाल सिंह आदि थे.
भाजपा किसान मोर्चा की बैठक में प्रदेश सरकार द्वारा धान का समर्थन मूल्य घोषित न किए जाने पर रोष जताते हुए किसानों को लूटने का आरोप लगाया. साथ ही किसानों की समस्याओं को लेकर 14 अक्टूबर को कलक्ट्रेट पर धरना प्रदर्शन कर डीएम का घिराव करने की चेतावनी दी. गुरुवार को हुई बैठक में वक्ताओं ने कहा कि धान का समर्थन मूल्य अब तक घोषित नहीं किया गया है. मूल्य तय न होने से किसानों को मंडियों में लूटा जा रहा है. वह औने-पौने दामों पर अपनी फसल बेचने को मजबूर हैं. उन्होंने कहा कि बोली लगाने के बजाए मंडी समिति के अधिकारियों की मिलीभगत से बिना बोली के ही किसानों की फसल खरीदकर शोषण किया जा रहा है. बैठक में तय किया गया कि 14 अक्टूबर को किसानों की समस्याओं को लेकर कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन के साथ ही डीएम का घिराव किया जाएगा. मौके पर विधायक राजेश शुक्ला, किसान मोर्चा जिलाध्यक्ष यशवंत मिश्रा, नारायण पाठक, आशुतोष तिवारी, हरपाल कक्कड़, दीदार सिंह दिग्विजय सिंह, शेर सिंह, शिवकुमार यादव, त्रिलोक सिंह नेगी, मंजीत सिंह, कश्मीर सिंह, अमरीक सिंह आदि मौजूद थे. भारतीय किसान यूनियन और अन्य किसान संगठन भी किसानों के शोषण पर आक्रोषित हैं. किसानों का कहना है कि सरकार समय पर फसल खरीद का पर्याप्त इंतजाम न कर कारोबारियों को लाभ पहुंचा रही है जिससे किसान औने-पौने दामों में फसल बेचने को बाध्य हो रहे हैं जिससे न सिर्फ किसानों को घाटा हो रहा है बल्कि सरकार को मिलने वाले राजस्व की भी भारी हानि हो रही है.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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