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वाड्रा से पंगा लेने वाले खेमका के खिलाफ दूसरी चार्जशीट की तैयारी…

By   /  October 17, 2013  /  1 Comment

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नई दिल्ली. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा और डीएलएफ के बीच जमीन सौदा रद्द करने वाले हरियाणा के आईएएस अधिकारी अशोक खेमका की मुश्किलें बढ़ती जा रही है.robert-vadra-land-scam-check-charge-sheet-against-IAS-ashok-khemka

सूत्रों के मुताबिक हरियाणा सरकार ने खेमका को अब गेहूं बीज की बिक्री कम होने के लिए जिम्मेदार मानते हुए चार्जशीट देने की तैयारी कर ली है. इसके लिए हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने मंजूरी दे दी है. इस चार्जशीट के करीब एक हफ्ते बाद ही खेमका को दूसरी चार्जशीट देने की तैयारी है.

सरकार का कहना है कि जब खेमका हरियाणा बीज विकास निगम के प्रबंधक निदेशक पद पर थे तब गेहूं के बीज की कम बिक्री हुई. खेमका इस पद पर 15 अक्टूबर 2012 से 4 अप्रेल 2013 तक रहे. इस मामले में खेमका को अपना पक्ष तक नहीं रखने दिया गया.

सूत्रों के मुताबिक प्रधान सचिव (कृषि) रोशनलाल ने सबसे पहले खेमका को चार्जशीट थमाने की सिफारिश की थी. मुख्य सचिव पीके चौधरी चार्जशीट के पक्ष में नहीं थे लेकिन सरकार ने उनकी बात नहीं मानी.

मुख्य सचिव का कहना था कि पहले विभागीय जांच होनी चाहिए. अगर जांच में खेमका दोषी पाए जाते हैं तो उसके बाद आगे की कार्रवाई होनी चाहिए लेकिन मुख्यमंत्री के प्रिंसिपल सेक्रेटरी एसएस ढिल्लन ने चौधरी की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए खेमका के खिलाफ चार्जशीट की सिफारिश कर दी और फाइल मुख्यमंत्री को भेज दी. चौधरी का कहना है कि ये प्रशासनिक मामले हैं इसलिए वह ब्योरा शेयर नहीं कर सकते. खेमका ने भी कोई भी प्रतिक्रिया व्यक्त करने से इनकार कर दिया है.

आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया ने कहा कि अशोक खेमका पर जो आरोप लगे है उनकी जांच होनी चाहिए. इसमें कोई शक नहीं है. उनके विभाग ने कुछ गलत किया है तो इसकी सजा उनको मिलनी चाहिए. लेकिन अशोक खेमका ने जो मुद्दे उठाए थे उनकी की जांच होनी चाहिए. अगर उनकी जांच नहीं होगी तो ऎसा लगेगा जैसा उन्हें फंसाने की कोशिश हो रही है.

मनीष ने कहा कि खेमका के खिलाफ राजनैतिक साजिश हो रही है. खेमका ने रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ आवाज उठाई. इसलिए खेमका को बड़ी जांच से परेशान करके यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि कोई भी अधिकारी फिर उनकी तरफ उंगली भी न उठा सके. हुड्डा सरकार बिना केंद्र की मर्जी से ऎसा कदम नहीं उठा सकता है.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

1 Comment

  1. hianduas tan ma jobhia loag hia jisapar sak ka soiy gya jacha hona chahiya koi bhia hoa but sona hua kia soniya srakar pwar ka glat estyamal kra rhia hia etna ghotala huya kia abhiatak das ubar nhia paya pura ka pura srakar choar hia kisapy bharosa kiya jay

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