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मुख्यमंत्री पद को लेकर दिल्ली भाजपा में घमासान…

By   /  October 17, 2013  /  1 Comment

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दिल्ली में भाजपा के मुख्यमंत्री पद के प्रत्याशी को लेकर प्रत्यंचाएं खिचंती ही जा रही है. पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. हर्षवर्धन को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चाओं के बीच वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष विजय गोयल ने सारे पत्ते खोल दिए हैं. जहां कल उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सार्वजनिक रूप से अपनी दावेदारी ठोक दी, वहीं आज उनके समर्थकों ने इसके लिए गोलबंदी शुरू कर दी.Delhi-CM-post-candidate-vijay-goel-against-angry-dr-harsh-vardhan

विजय गोयल के समर्थकों ने गुरुवार को पार्टी के दिल्ली प्रभारी नितिन गडकरी से मुलाकात की और उन्हें मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने की मांग की. गडकरी ने इन लोगों को भरोसा दिलाया है कि यह मांग संसदीय बोर्ड तक पहुंचा दी जाएगी. इससे पहले बुधवार को गोयल ने भी पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी से मुलाकात कर अपने कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाईं और बताया कि हर सर्वे में वह दूसरों से आगे हैं. हालांकि, गडकरी ने उन्हें स्पष्ट कर दिया है कि अभी मुख्यमंत्री के उम्मीदवार का चयन नहीं हुआ है. गडकरी ने बाद में बयान जारी करके भी कहा कि इस विषय में बीजेपी संसदीय बोर्ड फैसला करेगा.

बागी तेवर कायम रखते हुए विजय गोयल ने गुरुवार को एक न्यूज चैनल से बातचीत में कहा कि सीएम उम्मीदवारी के लिए उन्हें पार्टी के सामने शक्ति दिखाने की जरूरत नहीं. पिछले 8 महीने में किया गया शानदार काम पार्टी के नेताओं को दिख रहा है. हालांकि उन्होंने यह भी माना कि इस रेस में वह अकेले नहीं हैं. गोयल से पार्टी के अंदर सीएम प्रत्याशी को लेकर चल रहे घमासान के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘लोगों को इससे मतलब नहीं कि पार्टी का नेता कौन है. लोग यह जानना चाहते हैं कि दिल्ली के कायाकल्प के लिए बीजेपी का विजन क्या है.’

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

1 Comment

  1. mahendra gupta says:

    वैसे तो यह सभी दलों की कमजोरी है कि चुनाव आते आते सब नेताओं में बड़े पदों के लिए लार टपकने लगती है, पर बी जे पी में कुछ विशेष ही है सत्ता का दूर रहा सुख उन्हें ज्यादा ही ललचाता है और उनका समय आपसी सर फुटोवल में ही निकल जाता है, इतने सालों के बाद यदि वह दिल्ली में सरकार बनाने लायक हो भी गयी तो वे समय एक दुसरे की तंग खींचने में ही बिता देंगे और मौका लगते ही कांग्रेस फायदा उठा जाएगी.

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