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कोलगेट: नवीन पटनायक पर गिर सकती है ग़ाज़..

By   /  October 17, 2013  /  2 Comments

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कोयला घोटाले में सीबीआई ओड़िशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक से पूछताछ कर सकती है. सीबीआई सूत्रों के मुताबिक नवीन पटनायक ने 2005 में प्रधानमंत्री को लिखी चिट्ठी में कुमारमंगलम बिड़ला की कंपनी हिंडाल्को को शेयर देने की सिफारिश की थी. इस बीच एफआईआर में कुमार मंगलम बिड़ला और पूर्व कोयला सचिव पीसी पारख का नाम आने के बाद आरोपों की बौछार हो गई है. कहा जा रहा है कि सीबीआई की कार्रवाई देश में निवेश के माहौल को नुकसान पहुंचाएगी.navin patnaik

उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला और पूर्व कोयला सचिव पीसी पारख के बाद कोयला मामले की चौदहवीं एफआईआर ओड़िशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है. सीबीआई सूत्रों के मुताबिक जांच में पता चला है कि नवीन पटनायक ने बिड़ला ग्रुप की कंपनी के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय को चिट्ठी लिखी थी. सूत्रों के मुताबिक ये चिट्ठी अप्रैल से जुलाई 2005 के बीच लिखी गई थी. इस जानकारी के आधार पर सीबीआई नवीन पटनायक से पूछताछ भी कर सकती है.

नेटवर्क 18 के हाथ सीबीआई की एफआईआर का ब्यौरा लगा है. एफआईआर के मुताबिक अप्रैल 2005 में हुई स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में हिंडाल्को को कोल ब्लॉक देने की मांग को अस्वीकर कर दिया गया था. इस बैठक में ओड़िशा के सार्वजनिक उपक्रम नेवली लिग्नाइट कार्पोरेशन लिमिटेड को ब्लाक दिए गए. इस कमेटी की बैठक की अध्यक्षता खुद पूर्व कोल सचिव पीसी पारख कर रहे थे.

सूत्रों के मुताबिक जुलाई 2005 में पारख और कुमार मंगलम की मुलाकातें हुईं इसके तुरंत बाद पारख हिंडाल्को की सिफारिश करने लगे. सीबीआई एफआईआर के मुताबिक कोल सचिव पारख ने इस मामले में अपने पद का लाभ उठाते हुए बिड़ला की कंपनी हिंडाल्को का पक्ष लिया. बिड़ला ने जून और जुलाई 2005 में चिट्ठी लिखकर उड़ीसा के कोल ब्लाक तालाबिरा-2 को लेने की इच्छा जताई थी. जुलाई में बिड़ला से मुलाकात के बाद पारख ने साझे में ब्लॉक देने का प्रस्ताव किया.

इस प्रस्ताव के मुताबिक महांदी कोलफील्ड को 70 फीसदी, नेवली को 15 और हिंडाल्को को 15 प्रतिशत शेयर देने की सिफारिश की गई. इस बीच सीबीआई की एफआईआर में उद्योगपति कुमार मंगलम बिरला का नाम आने से हड़कंप मचा है. शोर मच रहा है कि सीबीआई की इस तरह की कार्रवाई देश में निवेश के माहौल को तो प्रभावित करेगी ही उद्योग जगत पर भी इसका असर होगा. उद्योग और वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा तो इस सीमा तक चले गए कि उन्होंने सीएजी की रिपोर्ट पर ही सवाल उठा दिया.

आनंद शर्मा ने कहा कि पहले टेलीकॉम सेक्टर से शुरू हुआ. एक लाख 76 हजार करोड़ जो राशि बताई गई घाटे की, इससे पूरा टेलीकॉम सेक्टर प्रभावित हुआ. उसके बाद जो नीलामी बुलाई गई, उसके लिए कोई नहीं आया. जिन लोगों ने यह रिपोर्ट बनाई उन पर तो कोई असर नहीं पड़ा. इसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर होता है.

नौकरशाह तबका भी पूर्व कोयला सचिव पीसी पारख के खिलाफ एफआईआर से नाराज है. आईएएस एसोसिएशन इस मसले पर शनिवार को एक बैठक करने वाली है. पुराने नौकरशाहों का कहना है कि जांच एजेंसियों के ऐसे रवैए के चलते अफसर फैसले ही नहीं लेंगे. पूर्व पेट्रोलियम सचिव एस सी त्रिपाठी ने इस बारे में कहा कि अगर अफसरों के खिलाफ इस तरह मामले होंगे, जैसा पारख के साथ हुआ तो वो फैसले नहीं लेंगे. इस सरकार में पॉलिसी पैरालाइसिस की शायद यही वजह है.

सीबीआई की इस कार्रवाई के मद्देनजर सरकार के मंत्री और कांग्रेस नेता तो संभलकर बयान दे रहे हैं, लेकिन विपक्ष ने आनंद शर्मा के बयान की बखिया उधेड़ने में कसर नहीं छोड़ी. बीजेपी नेता बलबीर पुंज ने कहा कि आनंद शर्मा ने अधूरा सच कहा है. सीबीआई की बुनियादी दिक्कत यह है कि वह कोई ऑब्जेक्टिव संगठन नहीं है. कोलगेट में कोई भी देख सकता है कि इसमें प्रधानमंत्री जवाबदेह हैं. कांग्रेस मुख्य मुद्दे को भटका रही है.

हालांकि इस शोरगुल के बीच भी सीबीआई अपनी कार्रवाई से पीछे नहीं हटी है. हिंडाल्को के दफ्तरों पर उसके छापे लगातार जारी हैं. हिंडाल्को के दिल्ली दफ्तर से सीबीआई ने 24 लाख नकद और 17 लाख की एनएससी और किसान विकास पत्र के अलावा 25 करोड़ की बरामदगी की है.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

2 Comments

  1. mahendra gupta says:

    छुटभैये नेता व दुसरे सब इस राडार में आ जायेंगे पर पर सी बी आई असली व्यक्ति तक नहीं पहुंचेगी.हमेशा इस देश में ऐसा ही होता है,सरकारी तोते को यह सब तो करना ही पड़ेगा.अरे भाई आखिर हस्ताक्षर किसने किये क्या वह गुनाहगार नहीं?पर जाँच को इधर उधर भटका कर समय व्यतीत किया जायेगा और जब श्री सिंह पद से निवर्त हो जायेंगे तब युवराज की छवि बढ़ाने के लिए उन्हें भी फंसाया जायेगा ताकि लोग उन्हें भूल जाये धोया, पोंछा और फेंका यह नीति कांग्रेस की सनातन नीति रही है.और बेचारे सिंह ऐसे फंसे हैं कि न चोदे बनता है और रहना तो कठिन है ही यदि कुछ घोटाला हुआ भी तो पार्टी के लिए भी अन्य ने किया होगा पर अब अंजाम तो उन्हें ही भुगतना पड़ेगा..

  2. छुटभैये नेता व दुसरे सब इस राडार में आ जायेंगे पर पर सी बी आई असली व्यक्ति तक नहीं पहुंचेगी.हमेशा इस देश में ऐसा ही होता है,सरकारी तोते को यह सब तो करना ही पड़ेगा.अरे भाई आखिर हस्ताक्षर किसने किये क्या वह गुनाहगार नहीं?पर जाँच को इधर उधर भटका कर समय व्यतीत किया जायेगा और जब श्री सिंह पद से निवर्त हो जायेंगे तब युवराज की छवि बढ़ाने के लिए उन्हें भी फंसाया जायेगा ताकि लोग उन्हें भूल जाये धोया, पोंछा और फेंका यह नीति कांग्रेस की सनातन नीति रही है.और बेचारे सिंह ऐसे फंसे हैं कि न चोदे बनता है और रहना तो कठिन है ही यदि कुछ घोटाला हुआ भी तो पार्टी के लिए भी अन्य ने किया होगा पर अब अंजाम तो उन्हें ही भुगतना पड़ेगा..

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