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अब दो दो रांकापा, हो सकता है संवैधानिक संकट..

By   /  October 18, 2013  /  1 Comment

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शरद पवार की अध्यक्षता वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नाम को लेकर विवाद पैदा हो गया है. राज्य चुनाव आयोग के पास राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी नाम से एक और राजनीतिक दल का पंजीकरण हो गया है. इससे राज्य में संवैधानिक संकट भी पैदा हो सकता है. नवगठित पार्टी ने चुनाव आयोग को कानूनी नोटिस भेजकर 15 दिन  के भीतर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नाम से शपथ लेने वाले विधायकों-सांसदों को अपात्र घोषित करने की मांग की है. ऐसा न होने पर नवगठित पार्टी ने अदालत का दरवाजा खटखटाने की बात कही है.pawar

नवी मुंबई के रहने वाले कुछ लोगों के एक समूह ने सूचना अधिकार कानून (आरटीआई) के  तहत केंद्रीय चुनाव आयोग से जानकारी मांगी थी कि क्या राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी नाम का कोई दल चुनाव आयोग के पास पंजीकृत है? चुनाव आयोग ने इसका जवाब नहीं में दिया. इसके बाद इन लोगों ने तुरंत राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी नाम से राजनीतिक दल का गठन कर रजिस्ट्रेशन के लिए राज्य चुनाव आयोग के पास आवेदन कर दिया.

दरअसल शरद पवार के नेतृत्व वाली पार्टी का चुनाव आयोग के पास नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी के नाम से रजिस्ट्रेशन हुआ है. अब यह पार्टी हिंदी व मराठी में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी लिखती है, जो उसके अंग्रेजी नाम का अनुवाद है. पर तकनीकी रूप से पार्टी के लिए मुश्किल खड़ी हो गई है.

इस बारे में प्रदेश राकांपा प्रवक्ता नवाब मलिक ने कहा कि हमारी पार्टी का रजिस्ट्रेशन नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी के नाम से हुआ है. ऐसा कई दलों के साथ है. सीपीआई यानि कम्युनिस्ट पार्टी आफ इंडिया को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के रूप में भी जाना जाता है.

सरकार पर संकट!

नवगठित राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के महासचिव विनोद गंगवाल का कहना है कि एनसीपी के 90 फीसदी नेताओं ने चुनाव जीतने के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नाम से शपथ ली. किसी भी राजनीतिक दल द्वारा दो नाम रखना गैरकानूनी है. गंगवाल ने दावा किया कि राज्य में संवैधानिक संकट खड़ा होने वाला है.

उन्होंने कहा, हमने चुनाव आयोग को कानूनी नोटिस भेजकर मांग की है कि 15 दिन के भीतर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नाम से शपथ लेने वाले विधायकों-सांसदों को अपात्र घोषित किया जाए. अगर चुनाव आयोग इस दौरान इस मामले में कोई फैसला नहीं लेता है तो हम बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करेंगे.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

1 Comment

  1. इस देश की जनता को कानून को ये राज नेता अपने पैर की जूती ही समझते है जो छे जैसे चे जैसे करे कोई ना तो जानन चाहता है की किय कियो कैसे हो रह है जो चे जैसे चे करे कानून तो लोंगो को भट कने बे बेबकुफ़ बने के लिए ही लिखे गए है पूरे देश को धोखा देने के लिए फरेव करने के लिए कानी ओऊर खेल करने के लिए बात छुपा के राखी जाती है इएसि प्रकाना मई ये तमाशा किया गया है की जिसे पता हो गया वह समय का लाभ ले कर आगे आजत है एसे ही पूरा देश चल रहा है कोई कुछ भी करता रहे किसी की कोई जबाब देहि बनती ही नहीं है
    देश में भेद बकरिया अधि कराहती है जो चे जन्हा चे खदेड़ दे कोई सुन ने वाला नहीं है ये कहाँ सही सा लगत है की देश भगवन के भरोसे ही अपने आप ही चल रहा है

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