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गैगरेप मामले में यूपी के राज्यमंत्री मनोज पारस फ़रार…

By   /  October 20, 2013  /  No Comments

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बिजनौर. उत्तर प्रदेश में बिजनौर जिले के नगीना विधानसभा क्षेत्र के समाजवादी पार्टी (सपा) विधायक एवं प्रदेश के राज्यमंत्री मनोज पारस को गैगरेप के एक मामले मे न्यायालय मे पेश नहीं होने के कारण फरार घोषित कर दिया गया है. manoj paras

गौरतलब है कि एक महिला से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में सीजेएम कोर्ट ने पीड़िता के प्रार्थनापत्र पर मामला दर्ज करने के आदेश दिए थे. 13 जून 2007 को थाना नगीना में एफआइआर दर्ज हुई थी. रिपोर्ट दर्ज होने के बाद मनोज पारस व अन्य आरोपियों ने हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर स्टे प्राप्त कर लिया था. कोर्ट में हाजिर नहीं होने पर मनोज पारस व उनके साथियों के खिलाफ तत्कालीन प्रथम अपर सीजेएम दिनेश सिंह ने 16 जनवरी 2012 को गैर जमानती वारंट जारी हुआ था. उक्त आदेश के खिलाफ मनोज पारस समेत चारों आरोपियों ने दांडिक निगरानी (रिवीजन) दायर की थी. अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट दो ने तीन अक्टूबर को उसे खारिज करके पत्रावली 18 अक्टूबर को संबंधित न्यायालय में भेजे जाने तथा उस पर अग्रिम आदेश पारित करने को अवर न्यायालय को आदेशित किया था. अपर सीजेएम कोर्ट नम्बर-एक में मनोज पारस की पत्रावली शुक्रवार को पेश हुई. सुनवाई के दौरान पीड़िता के अधिवक्ता राजेन्द्र कुमार ने कहा कि रिवीजन खारिज होने के बाद कोर्ट से छह जनवरी 2012 तथा 16 जनवरी को जारी गैर जमानती वारंट तथा सीआरपीसी की धारा 82 का आदेश अस्तित्व में आ गया है. उधर, मनोज पारस के अधिवक्ता मोहम्मद आरिफ खां ने कहा कि हाईकोर्ट में जयपाल सिंह आदि की ओर से मोडिफिकेशन याचिका लंबित है, इस पर निर्णय होने तक मुकदमे की कार्रवाई को स्थगित रखा जाए. प्रभारी अपर सीजेएम कोर्ट नंबर-एक दिनेश सिंह पुंडीर ने अपने आदेश में कहा कि मामला गंभीर अपराध का है. सभी आरोपियों को इसकी पूर्ण जानकारी है, उनके हाजिर नहीं होने के कारण गैर जरुरी देर हो रही है. उन्होंने मनोज पारस, अस्सू, जयपाल व कुंवर सैनी के विरुद्ध एनबीडब्लू व दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 82 की आदेशिका 14 नवंबर 2013 के लिये जारी करने के आदेश दिये.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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