Loading...
You are here:  Home  >  राजनीति  >  Current Article

भारी पड़े मंदिर से पहले शौचालय और अब शोभन सरकार..

By   /  October 21, 2013  /  No Comments

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

नरेन्द्र मोदी कहीं ज्यादा के चक्कर में जमा किया भी ना खो दें…

-ममता सिंह||

चुनाव में विजयी होकर कुर्सी पर आसीन होने की लालसा करना कोई अनोंखी बात नही है. वैसे भी कुर्सी के लिए सबकुछ दांव पर लगते रहे हैं. यह पुर्व परिचित बातें हैं. इतिहास के पन्नों पर तो खून का दरिया तक बहाने की गाथा है. वही इस कुर्सी के लिए कही अपनों का साथ छुटने का तो कही पराये से हाथ मिलने की कई गाथाये भी दर्ज हैं.modi_030312

भारतीय जनता पार्टी की एक धुरी रही है राष्टीय स्वयं सेवक संघ यानि आरएसएस. इस संगठन के अभिन्न अंग और सहयोगी रहे हैं विश्व हिन्दु परिषद और बजरंग दल. इस संगठन की सांधु संत के जमातों से काफ़ी करीबी रिश्ता रहा है. अगर सीधे शब्दों में कह ले तो भाजपा का एक बड़ा वोट वैंक तैयार करने में सकारात्मक सहयोगी हैं, दोनों संगठनों के पदाधिकारी. लेकिन पिछले दिनों मोदी के मंदिर से पहले शौचालय के ब्यान से साधु जमात के लोगो को काफ़ी रोष की बात देखने को मिली. वहीँ, मोदी जी के हाल के दिनों में दिये गये बयान कि एक सपने के आधार पर केंद्र सरकार हजार टन सोना के लिए खुदाई कराकर विदेशों में भारत को हंसी का पात्र बना रही है. इस बयान पर शोभन सरकार के कुनबे से जो बातें आई हैं. वह मोदी जी के लिए परेशानी का सबब बन सकती है. कहें नये वोट बैंक के जुगत में जो पहले से सहेजकर रखे हुए और उपरोक्त संगठनों के ज़रिये जुटाए गए मत कहीं बिदक गए तो वही कहावत चरितार्थ हो जाएगी कि चार वेद के ज्ञाता गये थे छह वेद के ज्ञान अर्जित करने, दो वेद के भी ज्ञान भूल आये.

उन्नाव के डौंडिया खेड़ा गांव के किले में 1000 टन सोने की खुदाई के मुद्दे पर शोभन सरकार की तरफ से गुजरात के सीएम नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर नाराजगी का इजहार किया गया है. चिट्ठी में कहा गया है कि आखिर किस आधार पर मोदी ने सपने की बात कहकर शोभन सरकार को निशाना बनाया. चिट्ठी में मोदी को अनर्गल प्रलाप कर समय बर्बाद न करने की नसीहत भी दी गई है. चिट्ठी नीचे दी गई हैः-

आदरणीय नरेंद्र भाई,

विनम्रतापूर्वक कहना चाहता हूं कि केंद्र सरकार और श्रीमती सोनिया गांधी पर हमला करने की हड़बड़ी में आपने संत की मर्यादा का भी उल्लंघन कर दिया है. सत्य संकल्प श्री स्वामी शोभन सरकार जी ने जो सपना देखा, वह इस राष्ट्र को विश्व की सबसे शक्तिशाली आर्थिक शक्ति बनाने का है.santshobhantomodi

उसी सपने की तामीर के लिए स्वामी जी ने भारत सरकार को  अमेरिका और ब्रिटेन दोनों देशों के कुल संयुक्त स्वर्ण भंडार से अधिक स्वर्ण उपलब्ध कराने का संकल्प लिया था, जिसके तहत उन्होंने केंद्र सरकार, राज्य सरकार और जिला प्रशासन को पत्र भेजकर अनुरोध किया कि डौंडिया खेड़ा में एक स्थान की जांच जीएसआई से करा ली जाए और अगर जीएसआई जांच में तथ्य प्रमाणित हों तो खनन कार्य करा लिया जाए. यहां तो केवल 1 हजार टन सोने की बात है, शोभन सरकार जी ने तो राष्ट्र को 21 हजार टन स्वर्ण कोष उपलब्ध कराने का संकल्प लिया है. आप जैसे प्रभावशाली नेता से गुजारिश है कि अनर्गल प्रलाप करके समय न व्यर्थ करें.

आपकी सरकार अटलजी के नेतृत्व में अपना कार्यकाल पूरा कर चुकी है. तब आपकी सरकार काला धन स्विस बैंक से क्यों नहीं ला पाई? मोदी जी एक सवाल और, आपकी पार्टी आपकी ब्रांडिंग करने के लिए जितना धन प्रतिदिन खर्च कर रही है वो काला है या सफेद? क्या आप बताने की कृपा करेंगे? आप मीडिया की नजरों में देश के भावी प्रधानमंत्री के रूप में देखे जा रहे हैं. आम जनता और देश का संत समाज कुछ बिंदुओं पर आपका नजरिया जानना चाहता है.

मैं आम जनता और संतों के इन सवालों पर आपको सार्वजनिक बिंदुवार चर्चा के लिए सादर आमंत्रित करता हूं. एक लंगोटी, एक अचला और एक मोबाइल मेरी कुल प्रॉपर्टी है. राजनीति में मेरी कोई रुचि नहीं है. लेकिन देश के आम अदने सड़कछाप नागरिक जो कुल वोटरों का लगभग 50 फीसदी होंगे, के सवालों के जवाब आपसे खुले मंच पर पूछना चाहता हूं.

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

You might also like...

एक क्रांतिकारी सफर का दर्दनाक अंत..

Read More →
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
%d bloggers like this: