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सरकार बनानी है तो युवाओं को नहीं, बूढों को टिकट दो…

By   /  October 23, 2013  /  No Comments

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विधानसभा चुनाव होने वाले है . . . गिनती के दिन शेष रहे है . . . हालांकि अभी तक पार्टियों ने अपने प्रत्याशियों की घोषणा नहीं की है. पार्टियां अपने प्रत्याशी घोषित करने में ज्यों-ज्यों देरी कर रही है त्यों-त्यों टिकट की दावेदारी करने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है. कई दिग्गजों को टिकट प्राप्त करने में पसीने छूट रहे है तो कई सत्ता लोलुप्ता के चलते जयपुर से लेकर दिल्ली तक के चक्कर काट रहे है.

भीलवाड़ा जिले की माण्डल विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक कालू लाल गुर्जर पुनः माण्डल से प्रबल दावेदारी ठोक रहे है. पूर्व वसुंधरा राजे की सरकार में मंत्री रह चुके कालू लाल गुर्जर से लखन सालवी  की बातचीत के संपादित अंश –

आप कहां से दावेदारी कर रहे है?

मैं पहले माण्डल से चुनाव लड़ चुका हूं, यहां की जनता से मेरा जुड़ाव है इसलिए इस बार भी माण्डल से ही दावेदारी कर रहा हूं.kalu lal gurjar

आप सहाड़ा-रायपुर विधानसभा क्षेत्र के मूल निवासी है, वहां आपके चुनाव जीतने की संभावनाएं भी व्यक्त की जा रही है, आप वहां से क्यों चुनाव नहीं लड़ते हैं?

सहाड़ा-रायपुर विधानसभा क्षेत्र में 100 प्रतिशत जीत की संभावना है, लेकिन माण्डल से दावेदारी करने के दो महत्वपूर्ण कारण है. पहला मैं इस क्षेत्र से हटता हूं तो यह सीट कांग्रेस के खाते में चली जाएगी, जो मैं नहीं चाहता. दूसरा मैंनें पिछला चुनाव माण्डल विधानसभा क्षेत्र से लड़ा था तथा मामूली वोटों के अंतर से मैं चुनाव हार गया था और हार कर क्षेत्र छोड़ना मुझे मंजूर नहीं.

अगर माण्डल क्षेत्र में पार्टी किसी ओर को टिकट देती है तो आप क्या करेंगे?

देखिए अव्वल तो पार्टी मुझे ही टिकट देगी, हां पार्टी किसी दिग्गज को टिकट देती है तो अलग बात है.

सुनने में आया है कि पार्टी आपको आसीन्द से टिकट दे रही है? आसीन्द गुर्जर बाहुल्य क्षेत्र माना जाता है.

मैं किसी भी सूरत में माण्डल के अलावा कहीं ओर से चुनाव नहीं लडूंगा. मेरा जुड़ाव माण्डल क्षेत्र के लोगों से रहा है, पिछले 2 दशक से मेरा कार्य क्षेत्र माण्डल है, ऐसे में अन्य किसी क्षेत्र में जाकर चुनाव नहीं लड़ना चाहता हूं.

आप बुजुर्ग है आपको नहीं लगता है कि युवाओं को आगे आने का मौका देना चाहिए,

कौन कहता है मैं बुढ़ा हूं, अभी तो मैं जवान हुआ हूं. आपको बता दूं कि 50 वर्ष की आयु तक तो राजनीतिक परिपक्वता आती ही नहीं है, लगभग 60 से 70 वर्ष की आयु राजनीतिक व्यक्ति राजनीति में परिपक्व होता है तो बताइये राजनीतिक रूप से मैं बूढ़ा हूं या जवान.

लेकिन आप तो युवा उम्र में मंत्री बने थे!

 

हां मैं 36 वर्ष की आयु में मंत्री बना था. मंत्रियों में सबसे छोटा था, उस वक्त हमारी ही पार्टी के दिग्गज मेरा विरोध करते थे, कहते थे कि ये अभी क्या समझता है राजनीति में, इसे क्यूं मंत्री बना दिया.

आपके अनुसार युवाओं को टिकट नहीं देना चाहिए?

नहीं . . .नहीं . . मेरा मतलब ये नहीं है लेकिन अभी राजस्थान में भाजपा की सरकार लाना है तो नए चेहरों की बजाए जिताउ दावेदारों को ही टिकट दिए जाने चाहिए.

आपको माण्डल विधानसभा क्षेत्र से टिकट मिलता है तो आप किन मुद्दों पर चुनाव लडेंगे?

पार्टी के घोषणा पत्र के आधार पर चुनाव लडूंगा. लेकिन भ्रष्टाचार व विकास अह्म मुद्दे होंगे.

आपको बता दे कि माण्डल से कालू लाल गुर्जर के बाद बनेड़ा पूर्व उपप्रधान गजराज सिंह राणावत की मजबूत दावेदारी दिखाई पड़ रही है. वहीं बावलास के जसवंत सिंह, युवा नेता कमल सिंह पुरावत व मणिराज सिंह भी टिकट की दावेदारी प्रस्तुत कर चुके है. राज्यसभा सांसद वी.पी. सिंह अपने पुत्र अभिजीत सिंह को माण्डल से चुनाव लड़वाना चाह रहे है.

बहरहाल कालू लाल गुर्जर माण्डल क्षेत्र को किसी भी हालत में छोड़ना नहीं चाह रहे है, वहीं वी.पी. सिंह के चलते भाजपा कालू लाल गुर्जर को आसीन्द से चुनाव लड़ाने पर आमादा है. अब देखना है कि वी.पी सिंह अपने पुत्र को चुनावी रण में माण्डल के मैदान में उतार पाते है या नहीं, वहीं गजराज सिंह राणावत टिकट पाने में किस हद तक सफल होंगे और कालू लाल गुर्जर की हठ कितनी रंग ला पाऐगी.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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