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मंत्री भी आए आचार संहिता की चपेट में, राज्य मंत्री गुढ़ा व डॉ. शर्मा को थमाया नोटिस…

By   /  October 25, 2013  /  3 Comments

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-रमेश सर्राफ||

झुंझुनू,, विधानसभा चुनावों को लेकर अब झुंझुनू मे भी प्रशासन ने सख्त कदम उठाने शुरूकर दिए है. उदयपुरवाटी व नवलगढ़ में मंत्रियों को भी आचार संहिता की उल्लंघन के मामले में नोटिस जारी किए हैं. वहीं अन्य आधा दर्जन लोगों को नोटिस थमाकर प्रशासन ने नेताओं की रातों की नींद उड़ा दी है.
उदयपुरवाटी में उपखण्ड अधिकारी राजेश नायक ने दो दिनों में राज्य मंत्री राजेंद्रसिंह गुढ़ा सहित छह जनों को नोटिस थमा दिए हैं.RAJENDAR GUDHA

उदयपुरवाटी के उपखण्ड अधिकारी राजेश नायक के अनुसार बुधवार को जहां सरपंच डॉ. हरिसिंह गोदारा व शुभकरण चौधरी को नोटिस दिया गया था वहीं गुरुवार को राज्य मंत्री राजेंद्रसिंह गुढ़ा, राजपा प्रत्याशी मनोज मील, चंवरा सरपंच प्रियंका सैनीव विकास अधिकारी अर्चना मौर्य को नोटिस दिए गए हैं. उन्होंने बताया कि राजेंद्रसिंह गुढ़ा ने आचार संहिता होने के बावजूद भी उदयपुरवाटी कस्बे के पांच बत्ती तथा एक ढाणी में बैठक ली. वहीं मनोज मील गुरुवार को बिना अनुमति के लोगों को इकट्ठा किया और वाहनों को रैली के रूप में जयपुर ले गए. इसी प्रकार चंवरा सरपंच पर आरोप है कि उन्होंने आचार संहिता में एक सडक़ का निर्माण कार्य शुरू करवा दिया.
नायक ने बताया कि बीडीओ अर्चना मौर्य को भी चंवरा के सीसी रोड निर्माण के मामले में नोटिस दिया गया है.मौर्य की लापरवाही के कारण यह निर्माण कार्यशुरू हुआ. सभी से एसडीएम ने तत्काल जवाब मांगा है, अन्यथा एक तरफा कार्रवाई की बात कही गई है.
RAJ KUMAR SHARMAउधर, नवलगढ़ उपखण्ड अधिकारी ने भी गुरुवार को सख्त रूख अपनाते हुए एक शिकायत पर कार्रवाई करते हुए चिकित्सा राज्य मंत्री डॉ. राजकुमार शर्मा को नोटिस थमाया है. उपखण्ड अधिकारी डॉ. नरेंद्र थौरी ने बताया कि उन्हें एक शिकायत मिली थी जिसके आधार पर उन्होंने दो अलग अलग टीमें रवाना की गईऔर शिकायत की जांच करवाई गई तो पता चला कि बुधवार सुबह साढ़े आठबजे वाहनों की रैली निकाली गई थी. इन गाडिय़ों पर चिकित्सा राज्य मंत्री डॉ. राजकुमार शर्मा के फ्लैक्स तथा कांग्रेस के झंडे लगे हुए थे. इस रैली की प्रशासन ने वीडियोग्राफी करवाई तो 55 गाडिय़ों की गिनती हुई. इसके बाद जब रैली में शामिल वाहन चालकों से इसकी परमिशन मांगी गई तो वे नहीं दे सके. यही नहीं धारा 144 में उन्होंने बिना परमिशन के रैली निकालना और लोगों को इकट्ठा करने का दोषी पाया गया. जिस पर डॉ.शर्मा को नोटिस देकर पांच दिन में जवाब देने को कहा गया है.

नवलगढ़ उपखण्ड अधिकारी डॉ.नरेंद्र थौरी ने एक शिक्षक को राजनैतिक गतिविधियों में लिप्त पाए जाने पर जाखल की सरकारी स्कूल में कार्यरत दानसिंह के खिलाफ काफी शिकायतें मिल रही थी और सामने आया कि वह राजनैतिक गतिविधियों में लिप्त रहता है. वहीं उसके खिलाफ विजिलेंस में भी शिकायत चल रही थी. ऐसे में जब जांच कराई गईतो शिकायत सही पाईगई. जिस पर उसे गुरुवार को स्कूल से हटाकर उसका मुख्यालय उपखण्ड अधिकारी ऑफिस नवलगढ़ कर दिया गया है.
नवलगढ़ उपखण्ड अधिकारी डॉ. नरेंद्र थौरी ने नवलगढ़ ईओ और बीडीओ को फटकार लगाते हुए कहा हैकि अगर दो दिनों में उनके इलाकों में नेताओं की वाल पेंटिंग और पोस्टर पूर्णतया नहीं हटाए गए तो उनके खिलाफ आचार संहिता के तहत कार्रवाई की जाएगी. डॉ. थौरी ने बताया कि गुरुवार को जांच कराईगई जिसमें मुकुंदगढ़ नगरपालिका क्षेत्रका कार्य सही मिला जबकि नवलगढ़ नगरपालिका क्षेत्र तथा कईग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी नेताओं के पोस्टर आदि लगे होने की जानकारी मिली.जिस पर नवलगढ़ ईओ और पंचायत समिति बीडीओ को दो दिन का समय दिया गया है.

 

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

3 Comments

  1. Ashok Gupta says:

    NAKATE KI NAK KATI SAVA HAATH OR BARI YE HAL HAI IN NETAO KA

  2. mahendra gupta says:

    आखिर इन शिकायतों का अंजाम क्या होता है ?मैंने यह न कभी सुना न पढ़ा की इन नेताओं के विरुद्ध कोई ठोस कार्यवाही हुई हो.यहसब इस समय का हल्ला गुल्ला है , बाद में सब बस्तों में बंद हो मिटटी फांकते हैं. इस ढकोसले बी को बंद कर धन व संमय की बर्बादी रोकी जानी चाहिए.दबंग नेता परवाह करते नहीं,सर्कार के काम भी चेतावनी के बावजूद ऐसे ही होते हैं जिन पर आयोग रोक लगता है.छलावे के अलावा यह कुछ नहीं.किसी को कोई साज भुगतते या किसी पर कोई मुकदमा चलते नहीं सुना.

  3. आखिर इन शिकायतों का अंजाम क्या होता है ?मैंने यह न कभी सुना न पढ़ा की इन नेताओं के विरुद्ध कोई ठोस कार्यवाही हुई हो.यहसब इस समय का हल्ला गुल्ला है , बाद में सब बस्तों में बंद हो मिटटी फांकते हैं. इस ढकोसले बी को बंद कर धन व संमय की बर्बादी रोकी जानी चाहिए.दबंग नेता परवाह करते नहीं,सर्कार के काम भी चेतावनी के बावजूद ऐसे ही होते हैं जिन पर आयोग रोक लगता है.छलावे के अलावा यह कुछ नहीं.किसी को कोई साज भुगतते या किसी पर कोई मुकदमा चलते नहीं सुना.

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