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नॉन मैट्रिक पत्रकार…

By   /  October 29, 2013  /  No Comments

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बैतूल, एक तरफ प्रेस कौसिंल आफ इंडिया पत्रकारो के शैक्षणिक स्तर की बात करता है, वहीं दुसरी ओर बैतूल जिले में जी न्यूज, आजतक, पी सेवन, जैसे कई न्यूज चैनल के पत्रकार दस क्लास भी पास नहीं हैं. ऐसे में पत्रकारिता का स्तर तो गिरेगा ही साथ ही  अनुभवहीन पत्रकारिता ब्लैकमेलिंग का कार्य भी करेगी.news cutting

एक ही व्यक्ति आजतक से लेकर एक दर्जन न्यूज चैनलो को अपने पीसी से खबरें भिजवाता है. क्या न्यूज चैनल वाले अंधे है. उन्हे दिखाई नहीं देता कि एक जैसी खबरें क्यूं चल रही है जब सब लोग हर खबर के पैसे दे रहे है. बैतूल जिले में प्रायोजित खबरों का प्रचलन चल पडा है. महज सनसनी पैदा करने के लिए कुंजीलाल से मुंगेरीलाल तक की खबरें प्रसारित की जाती है.

न्यूज चैनलो के आधे से ज्यादा रिर्पोटरों को पीटीसी तक करनी नहीं आती है, लेकिन भोपाल और दिल्ली में सैटिंग करके रिर्पोटर बन जाते है. उन्हे कोरे कागज पर खबरों के पारिश्रमिक की प्राप्ति की रसीद से लेकर उनके खातो में भुगतान डाल कर कुछ लोग केवल धंधा कर रहे है. आजकल चौकीदार और चपरासी के लिए 12 वी कक्षा पास अनिवार्य मांगते है, लेकिन जी न्यूज , आजतक व पी सेवन इत्यादि के लिए खबरें भेजने वाले दसवी कक्षा भी पास नहीं है.

(बैतूल से एक पत्रकार के मेल पर आधारित)

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  • Published: 4 years ago on October 29, 2013
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  • Last Modified: October 29, 2013 @ 9:39 am
  • Filed Under: मीडिया

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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