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मुजफ्फरनगर फिर साम्प्रदायिकता की चपेट में, चार मरे…

By   /  October 31, 2013  /  No Comments

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कुछ दिनों की शांति के बाद यूपी के मुजफ्फरनगर के एक इलाके में फिर सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी. ताजा मामले में बीती रात दो पड़ोसी गांव के लोगों के बीच हुई हिंसा में एक महिला समेत चार लोगों की मौत हो गई. पुलिस ने आठ लोगों को गिरफ्तार किया है. फिलहाल हालात काबू में लेकिन तनावपूर्ण हैं.muzaffarnagarflagmarch630

मुजफ्फरनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिनारायण सिंह ने पत्रकारों से बातचीत में चार लोगों के मरने की पुष्टि की है. उन्होंने माना है कि ये मौतें सांप्रदायिक हिंसा में हुई हैं. बताया जाता है कि बुढ़ैना तहसील के एक गांव में ये घटना घटी. कुछ घरों को जलाने का मामला भी सामने आया है. पुलिस मौके पर पहुंच गई है और हालात काबू में करने की कोशिशें की जा रही हैं. मेरठ रेंज के आईजी, सहारनपुर के डीआईजी, मुजफ्फरनगर के डीएम और एसएसपी मौके पर पहुंच गए हैं.

बुधवार शाम 7 बजे के करीब मुजफ्फरनगर के बुड़ाना क्षेत्र के एक गांव में एक किसान खेत में काम कर रहा था. उसका आरोप है कि पड़ोस के ही दूसरे गांव के कुछ युवकों ने उसपर हमला किया. हमले से वो बचकर अपने गांव पहुंचा और गांववालों को इकट्ठा किया और घटना का ब्यौरा दिया.

इसके बाद गांववाले इकट्ठा हो गए और दूसरे गांव पर हमला बोल दिया जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई. इसकी सूचना पाकर पुलिस और आरएएफ और पीएसी मौके पर पहुंची. बाद में मेरठ जोन के आईजी बृजभूषण शर्मा, डीआईजी सहारनपुर एम अशोक, डीएम, एसएसपी मौके पर पहुंचे.

इसी बीच इसी वक्त एक और घटना बुड़ाना से लगते हुए फुगाना क्षेत्र में हुई. यहां मोटरसाइकिल पर जा रहे दम्पति पर बीच सड़क पर दूसरे पक्ष के लोगों ने इकट्ठा होकर हमला बोला जिसमें महिला की मौके पर ही मौत हो गई. पति गंभीर रूप से घायल हो गया और वो मुजफ्फरनगर अस्पताल में भर्ती है.

गौरतलब है कि पिछले महीने मुजफ्फरनगर में सांप्रदायिक हिंसा हुई थी जिसमें करीब 60 लोगों की जान चली गई थी. उस हिंसा से पीड़ित सैकड़ों लोग अब भी राहत शिविरों में गुजर बसर कर रहे हैं. ताजा हिंसा ने साफ कर दिया है कि वहां हालात अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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