/सचिन तेंडुलकर के विदाई मैचों को लेकर सट्टा बाज़ार गरम…

सचिन तेंडुलकर के विदाई मैचों को लेकर सट्टा बाज़ार गरम…

सचिन तेंडुलकर के विदाई मैचों को लेकर सटोरियों की गतिविधियाँ तेज़ हो चुकी हैं. जिसके चलते सट्टा बाजार में सचिन तेंडुलकर के अंतिम दो टेस्ट मैचों पर 800-800 करोड़ रुपये का दांव लग सकता है. बड़ा दांव खेलने की शुरुआत कर चुके सट्टेबाजों के अनुसार यह 2011 के वर्ल्ड कप फाइनल के बाद सबसे ऊंचा दांव साबित हो सकता है. मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंडुलकर के ये दोनों टेस्ट दीपावाली के तुरंत बाद होने वाले हैं. उस समय काफी फ्री कैश सट्टा मार्केट में आ सकता है.Sachin Tendulkar

दिल्ली के एक सट्टेबाज ने कहा, ‘यह सट्टा बाजार के लिए बहुत बड़ा इवेंट होगा. पंटर अंतिम बार अपने पसंदीदा बल्लेबाज पर दांव लगाने को बेकरार हैं.’ तेंडुलकर पर दांव इस बात को लेकर लग रहा है क्या वह कोलकाता के ईडेन गार्डन्स पर बड़ा स्कोर खड़ा करेंगे? यहां 6 नवंबर को शुरू होने वाला मैच उनका 199वां टेस्ट मैच होगा. सट्टेबाज इस मैच में सचिन की सेंचुरी के लिए 4.5 का भाव दे रहे हैं. उनकी डबल सेंचुरी के लिए 11 रुपये का भाव दिया जा रहा है. सचिन की हाफ सेंचुरी के लिए 80 पैसे का दांव लगाया जा रहा है.

मुंबई, दिल्ली और अहमदाबाद के सट्टेबाज हरियाणा के खिलाफ रणजी मैच में तेंडुलकर के 175 बॉल पर 79 रन के मैच विनिंग स्कोर से प्रभावित नहीं लग रहे हैं. अहमदाबाद के एक सट्टेबाज ने कहा, ‘ईडेन गार्डन्स पर 80,000 लोगों की भीड़ के सामने वेस्टइंडीज की टीम के खिलाफ खेलना रणजी मैच खेलने से अलग है. किसी को याद नहीं है कि सचिन ने इससे पहले कब सेंचुरी लगाई थी.’

अगर तेंडुलकर दोनों पारी में कुल 25 रन या उससे ज्यादा बनाते हैं, तो सट्टेबाज 12 पैसे देंगे. मतलब सट्टेबाज एक रुपये के दांव पर 1 रुपये 12 पैसे का पेमेंट करेंगे. अगर दोनों पारियों में 50 या उससे ज्यादा रन बनते हैं तो दांव बढ़कर 29 पैसे हो जाएगा. अगर सचिन दोनों पारियों में कुल 100 से ज्यादा रन स्कोर करते हैं, तो एक रुपये के दांव पर सट्टेबाज डबल पेमेंट करेंगे.

सट्टेबाज कोलकाता टेस्ट में वेस्ट इंडीज के खिलाफ इंडिया की जीत को लेकर आश्वस्त नजर आ रहे हैं. वे इंडिया की जीत पर हर रुपये के लिए 84 पैसे का भाव दे रहे हैं. मैच ड्रॉ होने पर सट्टेबाज 1 रुपये पर 1.84 रुपए चुकाएंगे. वेस्ट इंडीज की जीत पर 5.5 रुपये का भाव मिल रहा है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.