/कांग्रेस ने गाजी फ़क़ीर के साथ की धर्म सभा, चुनाव आयोग मौन…

कांग्रेस ने गाजी फ़क़ीर के साथ की धर्म सभा, चुनाव आयोग मौन…

सरहद का सुलतान हिस्टीशीटर गाजी फकीर कांग्रेस की राजनीति में फिर सक्रिय…राज्य मंत्री के साथ किया चुनावी सभा का आगाज़… चुनाव आयोग मौन...

-चन्दन सिंह भाटी||

बाड़मेर, विगत दिनों सरहद के सुलतान गाज़ी फ़क़ीर की जिला पुलिस जैसलमेर द्वारा हिस्ट्रीशीट खोलने तथा उनके राष्ट्रद्रोही गतिविधियों में शामिल होने के आरोपों के बाद उनसे पल्ला झाड़ चुकी कांग्रेस ने मुस्लिम वोतों के लिए फिर उनसे गठबंधन करने का मानस बना लिया है. हिस्ट्रीशीटर गाज़ी फ़क़ीर ने कांग्रेस कमेटी के अल्पसंख्यक मोर्चे की शिव के कानासर में सोमवार को आयोजित बैठक में भाग भाग लिया. इस बैठक में राज्य सरकार के अल्पसंख्यक मामलात मंत्री अमीन खान उनके साथ थे. अमीन खान ने उन्हें गले लगा कर स्वागत किया. Gazi Fakir and amin khan
गौरतलब हे विगत दिनों गाज़ी फ़क़ीर कि हिस्ट्रीशीट पुनः खोलने के बाद विवादों में आने पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने स्वीकार किया था कि पुलिस ने अपनी कार्यवाही को सरकार के आदेशानुसार सही अंजाम दिया है. मगर विधानसभा चुनावों कि आहट के साथ कांग्रेस गाज़ी फ़क़ीर को चुनावी हथियार के रूप में इस्तेमाल करने कि रणनीति बना चुकी है. कांग्रेस का ध्येय है गाज़ी फ़क़ीर के जरिये पाकिस्तान में बैठे उनके आका पीर पगारों का समर्थन जैसे तैसे हासिल किया जाए. गाज़ी फ़क़ीर ने कांग्रेस की चुनावी सभा में मुस्लिमों से कांग्रेस को वोट देने कि अपील की. जबकि गाज़ी के खिलाफ राज्य सरकार जांच कर रही है. प्रधानमंत्री कार्यालय ने उनके खिलाफ जांच रिपोर्ट तलब कि है. उनके विधायक पुत्र पर तत्कालीन पुलिस अधीक्षक जैसलमेर पंकज चौधरी ने पाकिस्तान जासूस को पनाह देने का आरोप लगाया था. चौधरी ने ही राज्य सरकार के आदेशानुसार गाज़ी फ़क़ीर कि हिस्ट्रीशीट पुनः खोली थी, राजस्थान और केंद्र सरकार कि खुफिया एजेंसियों की नज़र में गाज़ी फ़क़ीर सबसे ज्यादा संदिग्ध व्यक्ति हैं, जिनके पाकिस्तान के साथ तालुकात है. पिछले दिनों से लगातार हो रही थुक्का फजीती के बावजूद हिस्ट्रीशीटर गाज़ी फ़क़ीर का कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय होना पश्चिमी राजस्थान में चर्चा का विषय बन गया है.
चुनाव आयोग मौन. .

चुनाव आयोग द्वारा कानासर में आयोजित कांग्रेस की इस धर्म सभा की न तो फोटोग्राफी कराई गई न ही वीडियोग्राफी.

Facebook Comments

संबंधित खबरें:

  • संबंधित खबरें उपलब्ध नहीं

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.