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जालिमाना अन्दाज़ में मारती थी जागृति सिंह…

By   /  November 6, 2013  /  2 Comments

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बाहुबली बसपा सांसद धनंजय सिंह की पत्‍‌नी डॉ. जागृति सिंह जिस तरीके से घरेलू सहायिका राखी व 17 वर्षीय घरेलू सहायक की बेरहमी से पिटाई करती थी, उसे जानकर हर किसी के रोंगटें खड़े हो सकते हैं. दोनों को सांसद ने एक साल पहले नौकरी पर रखा था.bsp-mp-dhananjay-singh-and-his-wife

राखी को जहां दक्षिण दिल्ली के एजेआर प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से रखा गया था, वहीं नाबालिग घरेलू सहायक को परिचित के माध्यम से नौकरी पर रखा गया था. नाबालिग बनारस के पास एक गांव का रहने वाला है. इनके अलावा सांसद ने मीणा नाम की एक अन्य घरेलू सहायिका को भी नौकरी पर रखा हुआ था, जो राखी की हत्या किए जाने के बाद 4 नवंबर को भाग गई.

पुलिस के मुताबिक, वैसे तो विधायक की पत्‍‌नी नाबालिग घरेलू सहायक की अकसर बेरहमी से पिटाई करती थी. लेकिन एक नवंबर से तीन नवंबर तक वह दोनों की नियमित पिटाई कर रही थी. दीपावली वाले दिन डॉ. जागृति ने राखी की लाठी से बुरी तरह पिटाई की थी. चोट लगने से जब वह बेहोश होकर गिर गई, तब उन्होंने मारना छोड़ दिया. कुछ देर बाद उन्होंने इलेक्ट्रोल पाउडर का घोल राखी को पिलाने की कोशिश की थी. उसके बेहोश होने से जब राखी ने मुंह नहीं खोला तो जागृति को लगा कि वह ड्रामा कर रही है. तब उन्होंने राखी के मुंह में जोर से चम्मच घुसेड़ दिया था, जिससे उसके कई दांत टूट गए थे. राखी की छाती पर चढ़कर दोनों पैर से कई बार दबाया था. जिससे वह और बुरी तरह घायल हो गई थी. देर रात ही तड़प-तड़प कर राखी ने दम तोड़ दिया था.

नाबालिग घरेलू सहायक ने बयान में कहा है कि राखी की मौत होने पर सांसद व जागृति उसे दिनभर बैठाकर धमकी देते रहे कि अगर उसने किसी के पास भी मुंह खोला तो वे लोग उसके पूरे परिवार को खत्म करवा देंगे. जागृति ने दोनों को घर से कहीं भी बाहर निकलने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा रखा था.

जब नाबालिग घरेलू सहायक के बाल बढ़ जाते थे तब वह राखी से इस्तेमाल किया हुए रेजर से उसके बाल मुड़वा देती थी. बात-बात में जागृति दोनों की गर्दन पकड़ नोंच डालती थी. नाबालिग ने बताया कुछ समय पूर्व जागृति ने उसके पैर व प्राइवेट पार्ट पर गर्म प्रेस से जला डाला था.

वह अकसर दोनों को डराती थी कि अगर वे घर से बाहर निकलेंगे तो उन्हें उनकी कोठी में तैनात नागालैंड पुलिस के जवान गोली मार देंगे. चौंकाने वाली बात यह है कि जागृति ने अपने घर में 20 सीसीटीवी कैमरे लगा रखी है. वह सर्वेट क्वार्टर के बाथरूम में भी सीसीटीवी कैमरा लगा रखा है. इसके पीछे उनका मकसद क्या था, पुलिस उसका पता लगा रही है. यह भी बताया जा रहा है कि कुछ समय पूर्व जागृति ने एक बार राखी व नाबालिग घरेलू सहायक को आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया था. तब उन्होंने दोनों की दिनभर पिटाई की थी.

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  • Published: 7 years ago on November 6, 2013
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  • Last Modified: November 6, 2013 @ 2:53 pm
  • Filed Under: अपराध

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

2 Comments

  1. ya loag sansada and docotar donoa kruar hia eansan hayhia nhia kiwakia eansan hotya to aj ka tame ma etna jual nhia krtya name toa jagagratia hia ka matalab hota hia hoas ma rahna but badia sarm kia bat hia kia docotar hokar etna nichta enkoa sata sa sata sja hona chahiya jya hiand jya bharat

  2. दरिंदे हैं ऐसे सांसद और उनकी डॉक्टर पत्नी.ऐसे लोगों पर पुलिस को शीघ्र जाँच व कार्यवाही कर मजबूत केस तैयार कर कोर्ट में पेश करना चाहिए. पर अभी मुस्तेदी दिखने वाली पुलिस राजनितिक प्रभाव वदवाब में आ कर केस कमजोर बना देगी और इन दरिंदों का कुछ नहीं बिगड़ेगा.अलग अलग स्तर पर कोर्ट में अपील कर तारीखें डलवा यह सब मुक्त हो जायेंगे और फिर अपनी दरिंदगी का और किसी को शिकार बनाएंगे.नगर कस्बों के छोटे मोटे बाहुबली जब ऐसे मुक्त हो जाते हैं तो सांसद होने का यह फायदा उठा दवाब डाल जरूर मुक्त होंगे व लोग फिर अपने आप को ठगा महसूस करेंगे.

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