Loading...
You are here:  Home  >  अपराध  >  Current Article

जागृति अपने हिंसक स्‍वभाव के चलते किसीको भी पीट देती थी…

By   /  November 7, 2013  /  3 Comments

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

नौकरानी राखी भद्रा की हत्‍या और दो अन्‍य नौकरों की पिटाई के मामले में जौनपुर से बाहुबली बीएसपी सांसद धनंजय सिंह और उनकी पत्‍नी जागृति अभी पुलिस रिमांड में हैं. अब तक हुई जांच में हत्‍या और नौकरों की पिटाई के पीछे एक ही कारण सामने आ रहा है और वह है जागृति का हिंसक स्‍वभाव. हत्‍याकांड की जांच कर रहे दिल्‍ली पुलिस के अफसर ने भी माना है कि जागृति का उग्र स्‍वभाव हत्‍याकांड के पीछे की एक बड़ी वजह है.jagriti+dhanjaya

जागृति ने गाजियाबाद के संतोष मेडिकल कॉलेज से डेंटल सर्जरी का कोर्स किया, जिसमें वह टॉपर थी. देखने में भी खूबसूरत जागृति पर एक शादीशुदा विधायक (धनंजय सिंह) का दिल आ गया था और बाद में उन्‍होंने शादी भी की. फिर ऐसा क्‍या हुआ कि जागृति हिंसक हो गईं. उनके हिंसक स्‍वभाव का आलम यह था कि एक बार उन्‍होंने अपने पड़ोस में रहने वाले सांसद के बच्‍चों की पिटाई कर दी थी और तो और, एक बार उनके घर आए एक सांसद पर ही उन्‍होंने हमला बोल दिया और उनका चेहरा नोंच लिया था.

बताया जाता है कि नाकामयाबी, अकेलापन और शादीशुदा जिंदगी में उथल-पुथल के चलते वह स्‍वभाव से हिंसक हो गई थीं. दिल्‍ली पुलिस के सूत्र बताते हैं कि जागृति गुस्‍से पर काबू करने के लिए मनोवैज्ञानिक इलाज भी करा रही थीं. पति धनंजय के मुताबिक एक साल से वह कुछ ज्‍यादा ही गुस्‍सैल और हिंसक हो गई थीं. 2012 विधानसभा चुनाव हारने के बाद से उसका स्‍वभाव बदल गया और वह हिंसक होती चली गईं. जागृति के हिंसक स्‍वभाव की वजह से कई लोग उनके घर से नौकरी छोड़कर चले गए. हालांकि, डेंटल कॉलेज में जागृति के साथ पढ़ाई करने वाले कुछ लोगों के मुताबिक, वह उन दिनों में भी अक्‍खड़ स्‍वभाव की थीं.

कैसे बदल गई जागृति की जिंदगी 

डॉक्‍टर जागृति और सांसद धनंजय ने लव मैरिज की थी. 2007 में धनंजय की पहली पत्‍नी की संदिग्‍ध परिस्थितियों में मौत के बाद जागृति और धनंजय शादी के बंधन में बंध गए. कुछ साल सब कुछ ठीक चला, जागृति ने बेटे को जन्‍म दिया, जो अब तीन साल का है. लेकिन, कुछ समय बाद जागृति-धनंजय के वैवाहिक जीवन में कड़वाहट आने लगी.

बताया जाता है कि शादी के कुछ दिन बाद जागृति ने एक सड़क हादसे में अपना पिता खो दिया. इस दौर में उन्‍हें पति का भी साथ नहीं मिला. पति राजनीति और काम के सिलसिले में अक्‍सर घर से बाहर रहते थे. जब घर में होत भी तो बाहुबलियों और दबंगों से घिरे रहते. बताते हैं कि जागृति यह कह कर इसका विरोध करतीं कि इससे उनका बच्‍चा बिगड़ जाएगा. इस पर पति उन्‍हें खूब पीटा करते थे. इसके बाद धीरे-धीरे वह खुद हिंसक होने लगीं.

बताया जाता है कि राम मनोहर लोहिया हॉस्पिटल में नौकरी मिलने के बाद से जागृति की जिंदगी और मुश्किल हो गई थी. वह लंच के वक्‍त आती थीं और बच्‍चे को स्‍कूल से लाकर खाना खिलाने के बाद घर में बाहर से ताला बंद कर अस्‍पताल जाती थीं. वह फोन के जरिए नौकरों को हिदायत देती रहती थीं और घर लौटने पर घर में लगे सीसीटीवी की फुटेज भी देखा करती थीं.

इसी सब के बीच 2012 में जागृति सिंह ने विधानसभा चुनाव लड़ा. जिस समय उन्‍होंने चुनाव लड़ा, उस वक्‍त धनंजय जेल में थे. शायद यही वजह रही कि जागृति चुनाव हार गईं और उन्‍हें सिर्फ 50,000 वोट मिल सके.

इस हार के बाद से उनका वैवाहिक जीवन भी बद से बदतर होता चला गया और जागृति आक्रामक होती चली गईं. उनके हिंसक स्‍वभाव की वजह से कई नौकरों ने धनंजय के घर से नौकरी छोड़ी.

जागृति के स्‍वभाव से तंग आकर पति ने दी तलाक की अर्जी

रोज-रोज के झगड़ों से परेशान होकर सांसद धनंजय सिंह पत्‍नी जागृति से अलग रहने लगे. उनकी पत्‍नी दिल्‍ली के चाणक्यपुरी में साउथ एवेन्यू स्थित घर में अकेले रहने लगीं. जागृति के स्वभाव से तंग आकर उनके सांसद पति ने जून 2013 में तलाक के लिए पटियाला हाउस कोर्ट में अर्जी भी दायर कर दी.

पुलिस पूछताछ में धनंजय ने इस बात को स्‍वीकार किया है कि जागृति अपने गुस्‍से पर नियंत्रण नहीं कर पाती थी. दूसरी ओर जागृति ने पुलिस को दिए बयान में कहा कि कोई नौकर उनकी बात नहीं सुनता था. लोग उनकी बात को नजरअंदाज करने लगे थे, जिस पर उन्‍हें गुस्‍सा आता था.

जागृति के सांसद पति का विवादों भरा राजनीतिक सफर

जौनपुर से बाहुबली सांसद धनंजय सिंह का राजनीतिक सफर विवादों भरा रहा. वह 2002 में पहली बार उत्‍तर प्रदेश के रारी विधानसभा से निर्दलीय विधायक चुने गए. इसके बाद 2007 के चुनाव में लोजपा के टिकट पर फिर विधानसभा पहुंचे. धनंजय सिंह 2009 में बसपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव जीते और रिक्त हुई विधानसभा सीट पर अपने पिता राजदेव सिंह को खड़ा करके उन्‍हें चुनाव जिता दिया.

2011 में बसपा सुप्रीमो मायावती ने धनंजय सिंह को पार्टी से निलंबित कर दिया था, लेकिन बाद में उनका निलंबन वापस ले लिया गया.

सांसद धनंजय का क्रिमिनल रिकॉर्ड

सांसद धनंजय सिंह के खिलाफ उत्‍तर प्रदेश में करीब 30 मुकदमे दर्ज हुए, लेकिन अधिकतर मामलों में पुलिस उनके खिलाफ सबूत पेश नहीं कर सकी. नतीजा यह हुआ कि उन्‍हें 28 मुकदमों में बरी कर दिया गया. एक बार तो यूपी पुलिस ने 50 हजार के इनामी बदमाश रहे धनंजय और उनके साथियों को मुठभेड़ में मार गिराने का दावा तक कर डाला.

1998 के इस मामले में कई पुलिसकर्मियों पर अब भी मुकदमा चल रहा है. धनंजय पर जो बड़े आरोप लगे उनमें फैडरिल गोम्‍स हत्‍याकांड, इंजीनियर गोपाल श्रीवास्‍तव हत्‍याकांड, डॉक्‍टर बच्‍ची लाल मर्डर केस शामिल हैं. इसके अलावा 17 जनवरी 2013 का भी एक मामला है, जिसमें सांसद धनंजय का अनिल मिश्रा नाम के शख्‍स की हत्‍या के केस में नाम आया.

(भास्कर)

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email
  • Published: 4 years ago on November 7, 2013
  • By:
  • Last Modified: November 7, 2013 @ 5:58 pm
  • Filed Under: अपराध

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

3 Comments

  1. Ashok Gupta says:

    apne pati ko kyo nahi pita

  2. mahendra gupta says:

    जागृति मानसिक रूप से विकृत है, जिसने इस तरह का व्यहार किया.सभी तरफ से असफल व्यक्ति के पास अपनी खीज निकलने का यह स्रोत भी होता है और उसने इस निर्ममता से यह कार्य किया.

  3. जागृति मानसिक रूप से विकृत है, जिसने इस तरह का व्यहार किया.सभी तरफ से असफल व्यक्ति के पास अपनी खीज निकलने का यह स्रोत भी होता है और उसने इस निर्ममता से यह कार्य किया.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

You might also like...

पनामा के बाद पैराडाइज पेपर्स लीक..

Read More →
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
%d bloggers like this: