/नरेंद्र मोदी को नहीं मिलेगी एसपीजी सुरक्षा…

नरेंद्र मोदी को नहीं मिलेगी एसपीजी सुरक्षा…

केंद्र सरकार ने भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को एसपीजी सुरक्षा देने से मना कर दिया है. मोदी को अतिरिक्त सुरक्षा देने की मांग पर गृह मंत्रालय ने कहा है कि उनकी सुरक्षा पहले ही बढ़ाई जा चुकी है.Narendra-Modi_15

केंद्रीय गृह राज्यमंत्री आरपीएन सिंह ने नई दिल्ली में पत्रकारों को बताया, “हमने पहले ही नरेंद्र मोदी को पर्याप्त सुरक्षा दी हुई है. जितनी सुरक्षा की ज़रूरत है, हमने मोदी को उतनी सुरक्षा दी है.”
एक समाचार एजेंसी के अनुसार, आरपीएन सिंह बीजेपी के उस आरोप का जवाब दे रहे थे जिसमें कहा गया था कि पटना में बीजेपी की हुंकार रैली में सिलसिलेवार धमाके मोदी समेत बीजेपी नेतृत्व को ख़त्म करने के लिए किए गए थे. पार्टी ने मांग की थी कि केंद्र सरकार उनके नेता को ‘पुख़्ता’ सुरक्षा प्रदान करे.
गृह राज्यमंत्री ने कहा, “हमने उन्हें (मोदी को) एनएसजी सुरक्षा दी हुई है जो काफ़ी ऊंचे दर्जे़ की है. हमने उनके किसी स्थान पर जाने से पहले एडवांस सिक्योरिटी ड्रिल करने के आदेश भी दिए हैं.”

राजनीति कर रही है बीजेपी

आरपीएन सिंह ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को सुरक्षा उस पर ख़तरे के अनुमान के आधार पर दी जाती है और मोदी को सुरक्षा उनके ख़तरे के अनुमान के हिसाब से है.

पटना बीजेपी रैली
पटना में बीजेपी की रैली से ठीक पहले सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे.
उन्होंने मोदी की सुरक्षा को स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप के दायरे में लाने से इनकार करते हुए कहा कि संसद में पारित एक कानून के अनुसार एसपीजी सुरक्षा सिर्फ़ प्रधानमंत्री, पूर्व प्रधानमंत्री और उनके परिवार के सदस्यों को ही दी जा सकती है.

उन्होंने कहा, “बीजेपी यह बात जानती है लेकिन मोदी की सुरक्षा के नाम पर राजनीति करना चाहती है.”

भारतीय जनता पार्टी ने केंद्र और बिहार की नीतीश सरकार पर पटना रैली के दौरान लापरवाही, ख़ुफ़िया तंत्र की नाकामी और शिथिलता बरतने का आरोप लगाया है.

आरपीएन सिंह ने बीजेपी नेताओं पर आरोप लगाया कि जब वह सत्ता में थे तब पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को एक उप-निरीक्षक स्तर की सुरक्षा तक उपलब्ध नहीं करवाई गई थी. राजीव गांधी की मई 1991 में एक चुनावी सभा के दौरान तमिलनाडु के श्रीपेरुमबुदूर में आत्मघाती हमले में मौत हो गई थी.

उन्होंने कहा, “हम उनकी तरह नहीं कर रहे. गृह मंत्रालय सबको यह आश्वासन देना चाहता है कि वह सभी को ख़तरे के हिसाब से सुरक्षा प्रदान करेगा. मोदी को फ़ूलप्रुफ़ सुरक्षा दी जाएगी.”

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.