/वसुंधरा ने टिकट काटकर सड़क पर ला दिया…

वसुंधरा ने टिकट काटकर सड़क पर ला दिया…

राजस्थान भाजपा कार्यालय में तोड़फोड़… वसुंधरा के गढ़ में बगावत… पैसा ले कर टिकट देने का आरोप…

गंगापुर से भाजपा टिकट के दावे दावेदार एसएन शर्मा ने भाजपा से बगावत करके निर्दलीय लडऩे की घोषणा की है. शर्मा ने कहा, वसुंधरा राजे ने आगे से बुलाकर चुनाव लडऩे का न्यौता दिया और सरकारी नौकरी छुड़वाई, अब धोखाधड़ी करके टिकट काट दिया. वसुंधरा ने नौकरी से इस्तीफा दिलवाकर सड़क पर ला दिया है.vasundhara+modi

आंसू बनकर बहा टिकट नहीं मिलने का दर्द

टिकट बंटने के साथ ही भाजपा में विरोध शुरू हो गया है. टिकट से वंचित रहे दावेदारों ने अपने समर्थकों के साथ भाजपा के प्रदेश कार्यालय पर नारेबाजी और हंगामा किया. सिविल लाइंस क्षेत्र से टिकट नहीं मिलने से नाराज अशोक लाहोटी भी समर्थकों के साथ प्रदेश कार्यालय पहुंचे. प्रदर्शन के दौरान वे रोने लगे. साथ में समर्थकों के आंसू भी बह निकले. मारवाड़, मेवाड़ और बागड़ में इस्तीफे

मेवाड़ और बागड़ में भी विरोध शुरू हो गया है. बेगू में पूर्व विधायक चुन्नीलाल धाकड़ बगावत पर उतारू हैं. भीम में मौजूदा विधायक को टिकट देने के खिलाफ भाजपा के भीम मंडल के पदाधिकारियों ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया है. बांसवाड़ा सीट पर भाजपा का एक धड़ा विरोध में आ गया है, विरोधी धड़ा लगातार बैठकें कर रहा है. गढ़ी में जीत मल खांट के विरोध में पार्टी पदाधिकारियों ने इस्तीफे दिए हैं. डूंगरपुर के आसपुर से नाराज पूर्व विधायक भीमराज मीणा ने बगावत करके निर्दलीय लडऩे की घोषणा कर दी है. डूंगरपुर सीट पर भी विरोध शुरू हो गया है. बाड़मेर में मृदुरेखा चौधरी ने बगावत कर निर्दलीय लडऩे की घोषणा की है. बायतू में नाराज कार्यकर्ताओं ने सामूहिक इस्तीफे दिए हैं. भरतपुर में तीन सीटों पर बगावत, वसुंधरा राजे का पुतला फूंका

बयाना, कामां, भरतपुर शहर की सीटों पर बगावत शुरू हो गई है. बयाना में भाजयुमो के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष ऋषि बंसल के समर्थकों ने जुलूस निकालकर वसुंधरा राजे व दिगंबर सिंह का पुतला फूंका, यहां से बंसल की पत्नी दावेदार थी. भरतपुर शहर में टिकट नहीं मिलने से नाराज प्रदेश कार्यसमिति सदस्य गिरधारी तिवारी ने इस्तीफा दे दिया. कामां में मदनमोहन सिंहल जगत सिंह के टिकट के विरोध में फिर बगावत पर उतर आए हैं. सिंहल कुछ माह पहले ही भाजपा में आए थे.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.