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मौत से पहले दिनेश ने पूछा था, ”टीम अन्ना का कोई क्यों नहीं आया?”

By   /  August 30, 2011  /  32 Comments

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दिनेश यादव की लाश: यूं ही गंवाई जान?

दिनेश यादव का शव जब बिहार में उसके पैतृक गांव पहुंचा तो हजारों की भीड़ ने उसका स्वागत किया और उसकी मौत को ‘बेकार नहीं जाने देने’ का प्रण किया। लेकिन टीम अन्ना की बेरुखी कइयों के मन में सवालिया निशान छोड़ गई। सवाल था कि क्या उसकी जान यूं ही चली गई या उसके ‘बलिदान’ को किसी ने कोई महत्व भी दिया?

गौरतलब है कि सशक्त लोकपाल पर अन्ना हजारे के समर्थन में पिछले सप्ताह आत्मदाह करने वाले दिनेश यादव की सोमवार को मौत हो गई थी। पुलिस के मुताबिक यादव ने सुबह लोक नायक अस्पताल में दम तोड़ दिया। यादव के परिवारजनों को उसका शव सौंप दिया गया था जो बिहार से दिल्ली पहुंचे थे।

पुलिस के मुताबिक यादव के परिवार वाले उसके अंतिम क्रिया के लिए पटना रवाना हो चुके हैं । उधर, कुछ मीडिया रिपोर्ट की मानें तो 32 वर्षीय यादव की मौत पिछले सप्ताह ही हो चुकी थी। हालांकि पुलिस ने इन रिपोर्ट से इनकार किया है। गौरतलब है कि 23 अगस्त को दिनेश ने राजघाट के पास अन्ना के समर्थन में नारे लगाते हुए खुद पर पेट्रोल छिड़क आग लगा ली थी। 70-80 प्रतिशत जल चुके दिनेश को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बताया जाता है कि कुछ डॉक्टरों और प्रत्यक्षदर्शी अस्पताल कर्मियों से दिनेश ने आखिरी दिन तक पूछा था कि क्या उससे मिलने अन्ना की टीम से कोई आया था?

दिनेश यादव का शव जब पटना के निकट दुल्हन बाजार स्थित उनके गांव सर्फुदीनपुर पहुंचा तो पूरा गांव उमड़ पड़ा था। सब ने शपथ ली है.. इस मौत को जाया नहीं जाने देंगे। एक पत्रकार ने फेसबुक पर लिखा है, ”मुझे लगता है टीम अन्ना को इस नौजवान के परिवार की पूरी मदद करनी चाहिए। उनके घर जाकर उनके परिवारवालों से दुख-दर्द को बांटना चाहिए।”

दिनेश के परिवार के लोग बेहद गरीब और बीपीएल कार्ड धारक हैं। कई पत्रकारों का भी कहना है कि सहयोग के लिए अगर कोई फोरम बनेगा तो वे भी शामिल होने को तैयार हैं। दिनेश के तीन बच्चे हैं। उसकी पत्नी का रो रो कर बुरा हाल है और वह कई बार बेहोश हो चुकी है। उसके बाद परिवार में कमाने वाला कोई नहीं है।

उधर अन्ना हज़ारे अनशन टूटने के तीसरे दिन भी गुड़गांव के फाइव स्टार अस्पताल मेदांता सिटी में स्वास्थ लाभ लेते रहे।

 

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

32 Comments

  1. adv. suresh rao says:

    दिनेश की मौत के लिए अन्ना , उनकी टीम , और इस देश के कुछ मीडिया कर्मी दोषी है क्योंकि . इन लोगो की गलत बयानबाजी की वजह से दिनेश की जान गयी . सर्कार को इसकी जाँच करके ऐसे लोंगो के खिलाफ मुकदमा चलाना चाहिए. और उन्हें देश के मासूम लोंगो को गुमराह करने एवं आत्महत्या जैसे कृत्य के लिए उकसाने अथवा प्रेरित करने के आरोप में जेल भेजना चाहिए .वरना ऐसे घटनाये होती रहेगी. खबर है अन्ना फिर से उन राज्यों में जा रहे है जहाँ चुनाव होने वाले है.बी.जे.पी.की मदद करने के लिए……..दिनेश के परिवार के लिए फुरशत कहाँ है. .अन्ना और उनकी टीम के पास .. देश की जनता को ऐसे गुमराह करने वाले लोगो से सावधान रहना चाहिए. ……..

  2. AVNISH MISHRA says:

    में कुछ नहीं जनता एक जान नहीं एक जान के साथ कई जाने गई है , ये बेवकूफी है ये मै मानता हु पर अगर अन्ना भूखे मर जाते तो क्या वो बेवकूफी न होती ,ये आन्दोलन कम ब्लैक मेलिंग जादा दिख रही थी ,सरकार सुन नहीं रही थी अन्ना से जुड़े लोग भावुक हो रहे थे ,जिस पर लोगो का और सरकार का ध्यान जाये ऐसी हरकतों को बढ़ावा दे रहे थे अन्ना टीम ,यही काम दिनेश ने किया पर जादा हो गया ,मेरे पास कोई प्रमाण नहीं पर मेरी सोच है ,जिसके पीछे बच्चे ,बीवी माँ बाप की जुम्मेदारी हो जो गरीबी रेखा से नीचे जी रहा हो वो कैसे दिल्ली पंहुचा या वो मज़बूरी में हो या बड़ी लालच में या दो वक्त की रोटी में पेट्रोल का पैसा कहा से आया ,क्या पेट्रोल भी दान में मिला था वो मारा नहीं बलि चढ़ी है दिनेश की, मरेगे उसके परिवार वाले घुट घुट के ,गाधी जी से तुलना करते है अन्ना की ,गाधी जी के अनसन में भी लोग जल के मरे थे पर गाधी जी ने सारा दोष अपने पर लिया और अनसन तुरंत ख़त्म किया की अभी लोग तैयार नहीं है पर यहाँ तो किसी से ने कुछा कहा ही नहीं
    “जो हुआ सो हुआ पर अब किसी के आगे आने का इंतजार न करे इससे पहले की ये बहस ख़त्म हो जाये और दिनेश को लोग भूल जाये दिनेश के परिवार ने दिनेश को खोया है पर आज उनको मदद की जरुरत है मै चाहता हु प्रत्येक आदमी कम से कम १०० रु का दान दिनेश के परिवार को दे ही सकता है
    जो मुझसे सहमत है वो तो आगे आये ”
    अवनीश मिश्र
    07489470962

    • Ghulam Kundanam says:

      किसी नेता को निचले स्तर के कार्यकर्ता को भी महत्त्व देना चाहिए, आन्दोलन की शक्ति निचे का कार्यकर्ता ही होता है. इंडिया अगेंस्ट करप्सन एक आन्दोलन है संगठन पूरी तरह से नहीं बन सका है..फिर भी नेत्रित्व को यथा संभव समय निकलना चाहिए. पटना के IAC के कुछ लोगों ने कुछ मदद की थी….. आन्दोलन के समय भाग लेने वालों की संख्या तो है पर स्थाई और संगठित रूप से निरंतर समय देने वालों की अभी भी कमी है. हम सब का दायित्व बनता है की अपने बहुमूल्य समय में से कुछ समय निकल कर देश के लिए भी दें. उनकी सहादत बिकार नहीं जाईगी… परन्तु उनके परिवार की चिंता हम सब को मिलकर करनी चाहिए.
      मैं किसी काम आ सकूँ तो मुझे ख़ुशी होगी.
      ग़ुलाम कुन्दनम,
      जमुहार, रोहतास, बिहार.
      ९९३१०१८३९१.

      • Ghulam Kundanam says:

        मौके पर उपस्थित अन्ना समर्थक प्रो. रामपाल अग्रवाल नूतन नें तत्काल अंत्येष्ठी के समय ११००/= रुपये एवं मनहर कृष्ण अतुल जी ने ५००/= की सहायता परिवार को दी. साथ में वहां उपस्थित जी एम् फ्री बिहार मूभमेंट के संयोजक पंकज भूषण ने परिवार को सान्तावना देते हुए कहा की शहीद की शहादत बर्बाद नहीं होगी, हम सभी आपके साथ हैं और हर परिस्थिति में मदद को तैयार हैं. साथ में उपस्थित इंडिया अगेंस्ट करप्शन के साथी तारकेश्वर ओझा, डा. रत्नेश चौधरी, अतुल्य गुंजन, प्रकाश बबलू, शैलेन्द्र जी, रवि कुमार आदि नें भी शोकाकुल परिवार को सांत्वना दी साथ हीं अन्य बिहार वासियों से भी अपील की इस मौके पर अमर शहीद दिनेश के परिवार के देखरेख के लिए अधिक से अधिक मदद करें.

        इसी बीच पटना स्थित हमार टी वी द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में उपस्थित प्रो. रामपाल अग्रवाल नूतन नें शहीद के पिता विंदा यादव को ११०००/=रुपये का चेक दिया और शहीद के माता पिता के भोजन खर्चे में कमी ना होने देने का बीड़ा उठाया और उनके ही पहल पर रोटरी पटना मिड टाउन के अध्यक्ष इंजिनिअर के. के. अग्रवाल ने उनकी बड़ी लड़की पूजा जिसकी उम्र ९ वर्ष है, जो उत्क्रमित मध्य विद्यालय सर्फुद्दीनपुर के वर्ग ६ कि छात्रा है, के पढाई की खर्च निर्वाह का बीड़ा उठा लिया. अच्छी शिक्षा दीक्षा का वादा किया. साथ हीं रोटरी पटना से विजय श्रीवास्तव ने दूसरी लड़की भारती कुमारी की पढ़ाई का बीड़ा उठा कर एक साहसिक कदम उठाया है और हमारे समाज को एक सन्देश भी दिया है.

        इंडिया एगेंस्ट करप्शन से जुड़े तारकेश्वर ओझा ने जन मानस से अपील की है कि जहाँ तक हो सके हर कोई इस परिवार की मदद करे.

        http://indiaagainstcorruptionbihar.blogspot.com/2011/08/blog-post_30.html

  3. gyananjay says:

    दिनेश की मौत एक सवाल छोड गई है? क्या किसी आन्दोलन के लिये अपनी जान देने वालो का यही हस्र होना
    चाहिये……..सहानुभूति के चार शब्द तो कह ही देते…..मरने वाले के लिये ना सही उसके परिवार के लिये तो कह ही देना चाहिये था/

  4. अण्‍णा का अपना कोई संगठन तो है नहीं। ऐसे में यह अपेक्षा करना ठीक नहीं होगा कि उनसे जुडे लोगों को दुनिया भर की खबर होगी। इतने बडे अभियान में ऐसी अनदेखी हो जाना कोई असामान्‍य बात नहीं।

  5. sawinder says:

    पर अन्ना ने शांति से आन्शन करने को कहा था ,,,

  6. ANAND PRAKASH 'ARTIST' says:

    दिनेश यादव के जीवन की कहानी तो उसके साथ गई ,अब सवाल यह सोचने का नहीं है कि उसे क्या करना चाहिए था और क्या नहीं ?अब सवाल इस बात का है कि उसके परिवार कि सुध कौन लेगा ?उन युवाओं को कौन रोकेगा जो अहिंसात्मक आन्दोलन के चलते भी हिंसा कि बात सोचते हैं या फिर जीवन से हर मान कर (आन्दोलन में संघर्ष से भी हो सकता है )अपने आप को आग के हवाले करने को तैयार बैठे हैं ?कितना ही अच्छा हो कि हिंसा अथवा आत्मदाह का रास्ता न अपना कर हम अपने विचार के संचरण की ओर ध्यान दें .मैं अन्ना हज़ारे जी से नहीं मिला हूँ ,न ही उनकी टीम के किसी अन्य सदस्य से मिला हूँ.par जब मुझे लगा कि भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए श्री अन्ना हज़ारे और उनकी टीम कुछ कर रही है तो मैंने भी अपने साहित्यिक मित्रों को एक हज़ार पत्र लिख कर इस आन्दोलन में एक अनूठे तरीके से अपना योगदान दिया है .अन्ना जी और उनकी टीम को तो शायद इसकी खबर तक भी न हो पर आपके विचार मुझ तक और मेरे आप तक पहुँचे हैं ,तो मैं समझता हूँ कि यह दिनेश यादव के आत्मदाह से कहीं बढकर है .जीवन जीने के लिए है न कि मरने के लिए ,काश दिनेश ने अपने पारिवारिक दायित्वों को भी समझा होता …..

  7. R K JAIN says:

    ANNAJI KA ANDOLAN TO AHINSATMAK THA ,AUR ANNAJI NE BAR BAR SHANTE SAY ANDOLAN CHALANY KO KAHA THA.
    PHIR YE HINSA WALA KAM KYO KEYA.
    YAE TO ACHA HUVA KE MIDIA WALO NE IS NEWS PAR DHAYN NAHI DIYA.NAHI TO ANNAJI KA ANDOLAN KAMJOR PAD JATA.

  8. deva says:

    हां ***, कहोगे क्यों नहीं. जब वो जल रहा था तब तो घर में बैठ कर टीवी पे मजे ले रहे थे ना.

    ये तो अन्ना टीम की नैतिक जिम्मेदारी बनती थी, और कुछ ना सही तो कम से कम उसकी मौत पर सहानुभूति के चार शब्द ही कहे दिए होते.

    अन्ना जी आप बुद्धि के ही नहीं शब्दों के भी गरीब हो.

  9. pranesh says:

    अन्ना के टीम में कोई भी ऐसा लोग नहीं है जिसे किसी को फिक्र हो सायद आब आन्ना को उस तरह की सुप्पोर्ट दुबारा न मिले

  10. ravikantbpl says:

    ये बेवकूफी बाला काम करने का किसने बोला था उससे. ये भी कोई तरीका है समर्थन का. अगर समर्थन ही करना था तो १००-२०० लोगो को रामलीला मदन में ले आते भीड़ देखकर तो सर्कार की बैसे ही फट रही थी. अपने माता पिटा के बारे में तो सोचना चाहिए था.

  11. neelam says:

    I like to know what we can do for Mr danish Yadev family and for him who lost his life in this anshen moment . He was from Bihar . We should set fun for name of shaheed Danish Yadev name . Fight against corruption fund for shaheed family and help this family to grow . what u think .

  12. बहुत ही दुःख की बात है

  13. zanil7 says:

    मै रुपेश से सहमत हूँ लेकिन मनोज से नहीं. अगर महेश से कोई सहानुभूति नहीं दिखानी चाहिए थी तो अन्ना की टीम और उसके चमचे इतना हाय तौबा क्यों मचा रहे थे कि अन्ना मर जायेगा. आना खाना नहीं खा रहा है? अगर दम है तो बात करो भूख हड़ताल एक तरह का ब्लैक मेल है.

  14. मुकेश पोपली says:

    मौत उसकी जिसका करे जमाना अफ़सोस
    यूं तो सभी आए हैं दुनिया में मरने के लिए।

    युवा शक्ति का आह्वान करने से पहले युवाओं को सीख देनी भी आवश्‍यक है, अन्‍ना टीम की बेरुखी की बात मत कीजिए, किरण बेदी हो या अरविंद केजरीवाल, यह लोगों की प्रेरणा नहीं बन सकते, इनमें भ्रष्‍टाचार से लड़ने की ताकत की बात छोड़ दीजिए, यह लोग तो पत्रकारों के सवालों से भी नहीं लड़ सकते। भीड़ को उकसाने वाले सारे काम इन्‍होंने किए, यह उस भीड़ को सलाम है कि उन्‍होंने हिंसा का रास्‍ता नहीं अपनाया। मगर नादान और भोले-भाले लोगों को इन्‍होंने कभी नहीं संभाला, परिणामस्‍वरूप हमारे सामने आई दिनेश यादव की मौत की खबर। अभी भी वक्‍त है, युवाओं को समझना चाहिए कि देश में किसी भी आंदोलन की आवश्‍यकता नहीं है, आवश्‍यक है कि हम सब अपनी गतिविधियां और तमाम जरुरतों को सही वक्‍त पर सामने लाएं, समय के साथ खुद को बदलना सीखें और ईमानदारी से अपने उसूलों पर कायम रहें। दिनेश यादव को मेरा हार्दिक नमन।

  15. Rupesh Chaddha says:

    यदि लोगो के इतने भद्दे कॉमेंट्स करने के बाद कोई कुछ करने के बारे में सोचे …….तो ये राजनीती का हिस्सा है……..और महज अपने व्यस्तताओं का हवाला देकर इस आरोप से बचा नहीं जा सकता……..निश्चित ही ये गैर जिम्मेदाराना हरकत है टीम अन्ना की………मैं शुरू से ही इस टीम और इनके क्रिया कलापों से सहमत नहीं हूँ……..इनके बयां कई बार बदले………लोग इनके साथ इसलिए हुए ……..क्योंकि सभी सर्कार के खिलाफ हैं………इनकी कई कारगुजारियां लोगों के सामने नहीं हैं……..एक है राज ठाकरे को समर्थन देना……….दूसरी है……..प्रिंट मीडिया को intervew न देकर टीवी चैनल को देना……….तीसरी है……सीधे सर्कार को कटघरे में खड़ा करना…….जबकि शुरुआत आम आदमी से होने चाहिए…… चौथी है……..शर्मीला चानू को अपने साथ शामिल होने का आमंत्रण देना…….जबकि ये पिछले एक दशक से अनशन कर रही उस आयरन लेडी से कभी मिलने तक नहीं गए……….पांचवी है………NGO को जन लोकपाल में शामिल नहीं करना……क्योंकि इनके खुद के NGO.. हैं…………छठी है…….पहले हर राजनितिक पार्टी को गलियां देना……….फिर उन्हीं के दरवाजे पर जा-जाकर सहयोग मांगना……….ये वो बातें हैं……..जो मुझ जैसे एक सामान्य व्यक्ति के जानकारी में हैं……..और भी कई बातें हो सकती हैं………जरुरी है……….आम आदमी को जागरूक करना…………जिससे हर बुरे और अपराध को ख़त्म किया जा सकता है……..न की नए नए कानून………….जिसके बारे में अपराधी हमेशा तोड़ने के रस्ते सोचते रहें………जय हिंद

    रूपेश चड्ढा
    M.: 9252351239

  16. i strongly oppose all these bullshit topic. Why somebody from Anna Team will come to give sympathy to Dinesh’s family???? Anna’s team believe in अहिन्ग्सा. but Dinesh has taken a wrong step in this. So we should not expect any support from Anna’s team for dinesh. even in this movement was totally done in India peacefully and crores of people participated in this. We have to be thankful to Anna hazare for taking a so great step at this age and doing all this things for our country. Those people like corruption they obviously opposed him but he dedicatedly did all this for us. Congress is a totally corrupted team in all over india. Thats the reason they were not supporting anna. but we did it.

  17. आशा खत्री 'लता' says:

    ये वाकया इन्सान की फितरत को दिखाता है, पता नही टीम अन्ना की फितरत कैसी है,
    बाबा रामदेव ने चार जून को घायल सभी का पूरा ध्यान रखा, ये बताता है की कौन कितने पानी मे है.
    दिनेश यादव की भावनाओं को, उनके महाबलिदान को हमारा कोटि- कोटि प्रणाम !

  18. Rajesh Basnal says:

    यही तो कमी है इस देश कि भावनाओ में बह कर khud से ही gaddari कर jaate है — khud कि जान dekar क्या paya????? क्या paya जा sakta है – kabhi socha है kisi ने – नाम aise अमर होना होता तो – आज तक भारत में जितने भी लोगों ने आशिकी के चक्कर में पद कर जान दी उनके नाम भी एक स्मर्रिका में लिखे जाने चाहिए —- एक मुर्ख घर का निर्माण किया जाना चाहिए — जहाँ इन सभी का इतिहास मिल सके —-

    भाई जान देने से काम नहीं होता — क्रांति का बिगुल बजाना ही है तो जान लेनी सीखो — और अब रोना छोडो — बहुत हुआ अपमान अश्रुओ का

  19. Priya Tiwari says:

    wo log koi movement nai chala rahe hain..sirf comngress ke puppets hain…
    Sharam ani chaiye unhe..Bharat Sabhiman ka ake adami mara usko bhi vote of thankx nai bo paye…Unke karya kartao ko bi nai bola unhone..

  20. Saurabh Saxena says:

    I sympathise with some of you people who can just sit on your computer but cant appreciate the spirit of a person . This also exposes the true colour of the some of the movement leaders and the supporters . Here is a person for whom a team of doc (a private hospital and how much charity these people show its known to everyone ) and other one dies in hospital w/o any facility. Difference- he was not a media darling , may not be having showbiz skill or a poor man. A movement devoid of emotionality and sensibility.

    Condolences to Dinesh family. Unfortunate, saddened.

    • अमरेश रंजन says:

      चलिए सक्सेना साहब आपने दिनेश और उनके परिवार के लिए ”Condolences” लिखा यही बड़ी बात है.. वैसे आपने भी वही किया.. just sat on computer and wrote.. अपनी sympathy लेखक की बजाय उन गरीबों को दे दें तो बहुत बेहतर होगा। लेखक को तो साधुवाद की जरूरत है। आप न सही, मैं दे देता हूं।

  21. praveen arya says:

    बहुत ही दुःख की बात है कि आज वाकई हम ब्रांड है तो हमारी बात सुनी जायेगी |
    अरविन्द केजरीवाल जी से हम सब को काफी उम्मीद है | कृपया यह आवाज उन तक पहुंचे इसको केजरीवाल जी के पेज पर पोस्ट कीजिये |
    गाँधी और भगत सिंह में फर्क सदैव रहा है रहेगा दिनेश सिंह भगत सिंह थे – अन्ना गाँधी !
    दो धारा सदैव रही है | नरमपंथी सदैव समझोतावादी होता है जैसे अन्ना टीम !
    दूसरा गरमपंथी होता है जैसे भगत सिंह -दिनेश सिंह
    यह वर्ग समझोता नहीं वरन परिणाम चाहता है |
    यही भगत सिंह के साथ हुआ यही दिनेश के साथ हुआ |
    इनको पुनर्जन्म में यकीं होता है ये मानते है कि शायद हमारे बलिदान से परिवर्तन आ जाए ! किन्तु ये नहीं जानते कि हमारे सो काल्ड इंडियन कितने कमीने है……. यदि अभी भी हमने दिनेश सिंह के बलिदान पर तटस्थ रहे तो हम सब ठगे रह जायेंगे ! इन समझोतावादियों (गांधीवादियों-सोनियावादियों) से पूछो तभी जन-लोकपाल आ पायेगा नहीं तो यह शतरंजी खेल ही सिद्ध होगा

  22. shubhendu kumar mishra says:

    वाकई जिस इन्सान ने अपने आप को इस आन्दोलन के हवाले कर दिया उसे देखने वाला कोई नहीं और न ही उसके परिवार की सुध लेने वाला कोई हे. ये हमारा देश भारत हे अगर आप ब्रांड हो आपकी पहचान हो तो आपका इलाज़ बड़े हस्पतालो में होगा नहीं आप अपने को यूँही नष्ट कर लेंगे इस दिनेश को क्या मिला जिन्होंने अपना जीवन यूँही नष्ट कर लिया क्या उनकी बलिदान को कोई याद करेगा अन्ना हजारे तो ब्रांड बन गए लेकिन इस इन्सान के परिवार का क्या होगा किसी ने सोचा नहीं इतना समय किसके पास हे यही विडंबना हे हमारे देश की और हम चीखेंगे चिल्लायेंगे हमारे साथ गलत हुआ क्या गलत हुआ मेरी नजर में कुछ भी गलत नहीं हुआ आप अपने अधिकारों को जब तक नजर अंदाज करेंगे तब तक आप के साथ गलत ही होगा ….(शुभेंदु कुमार मिश्र )

  23. NK Thakur Advocate says:

    पहले तो दिनेश को श्रद्धांजलि .. अन्ना के टीम के लोग , विदेशो से पैसे पाकर अमीर बनने वाले लोग थे .. एन.जी.ओ . थे / उनमे से किसी को मानवीय मूल्यो का कोइ महत्व नही था .. वो सिर्फ अपने नाम के लिये मर रहे थे .. इस आन्दोलन मे कम से कम 3 लोगोकी म्रित्यु की खबर है .. पर अन्ना की टीम को उनको श्रद्धांजलि देना , मदद करना, तो दूर याद करने की फुर्सत भी नही थी .. इसी से मालुम होता है कि वो कैसे कैसे लोग थे .. मै तो इस घटना की निन्दा करता हू ……

  24. opee says:

    यही तो इस देश की विड़म्बना है ,कथनी और करनी मैं बहुत अंतर है !ये सोचने की बात है की क्या महात्मा गाँधी मेदन्ता जैसे बड़े हॉस्पिटल मैं अपना अनशन तोड़ने के बाद भर्ती होने आते ? यही फर्क है एक आम आदमी और एक रातोरात बने VIP अन्ना हजारे में ! क्या ऐसे आचरण से व्यवस्था परिवर्तन की बात करना ठीक है ? इतने बड़े हॉस्पिटल और इतने महंगे डाक्टर से इलाज करवाके अन्ना व् उनकी टीम ने क्या सन्देश दिया है ?

    • Mahendra C says:

      अन्ना जी खुद मंदिर के एक छोटे कमरे में रहते है, और उनका बैंक बैलेंस ४५० रु. है. भाईसाहब. अन्नाजी वो फकीर है जो जहा कहो वह जाते है. कोई उन्केलिए रहनेका जुगाड़ करता है कोई खाने का. कोई गाड़ी का तो कोई कागज पेंसिल का. डॉ. त्रेहन उनकी इज्जत करते है और अगर उन्होंने श्री अन्ना हजारे जी को अपने हॉस्पिटल में अनशन के बाद इलाज करवाया इसमें अन्ना जी का क्या कसूर? इस आन्दोलन के लिए हर एक ने अपना योगदान दिया है पर फिर भी इसे चलने के लिए पर्याप्त पैसा नहीं है.

      रही दिनेश यादव जी की बात, उनकी मौत से सारे आहात और दुखी है. लेकिन, अन्ना जी ने पहले से कहा था किसी भी प्रकार की हिंसा होनी नहीं चाहिए. खुद को जला लेना भी तो हिंसा है. अन्ना जी ने किसीको ऐसा करने को नहीं कहा था. शायद ये दिनेश जी जल्दी टूटे और ऐसा कर बैठे. शायद ये बात अन्ना जी को मालूम भी न हो. लगता है अभी कुछ दिन और उनको अस्पताल में रखा जायेगा. उनसे लोगोको मिलने को मना किया गया है, क्युकी वो खुद अभी भी कमजोर है.

      IAC के फेसबुक विभाग पर लिखे कुछ अंश के अनुसार IAC के कुछ volunteers ने इसकी दखल ली है और जल्द ही कुछ न कुछ किया जायेगा. कृपया कुछ वक़्त जाने दीजिये और सबर कीजिये. अन्ना जी या IAC मेंबर सरकार की तरह तुरंत कुछ नहीं कर सकते. भगवान पे भरोसा रखिये सब ठीक होगा.

  25. आन्ना समर्थक आम नागरिक ने गाँधी समाधी के निकट पेट्रोल छिड़क कर अपने को इस महाभियान में समर्थक देकर आग के हबले किया यह दिनेश यादव नाम का ३४ साल का नव युवक आग में झुलस गया जिसका की हमारे महान लोग इलाज तक नहीं करा सके ,और यह आन्ना क्रांति का शहीद बन गया एसे लोग सच्ची भाबना को लेकर कुछ ब्यबस्था परिबर्तन के लिय काम करना चाहते है लेकिन हमारी ब्यबस्था इनके साथ नहीं है बह एसे लोगो की चिन्ता करती है जिन्होंने ना काभी गरीबी देखि है लेकिन मंच से गरीबो की भ्रस्टाचार मिटाने की लम्बी लम्बी बात करते है और हमारे भारतीय नागरिकोकी भाबनाओ में इनके साथ होते एसे लोगो से सतर्क रहो मेरे प्यारे भाईएसे लोगो से सप्थान हो जाबो मेरे प्यारे भाई विकसित भारतके निर्माण में लग जाय इसके लिय कोई आन्दोलन की जरूरत नहीं अपने नागरिक कर्तब्यो का पालन करे सरकारी योजनाओ में सामाजिक मूल्याकन पद्दति से निगरानी रखे एवं सरकार का टैक्स को समय पर दे टैक्स बचाने के चक्कर के कारण ही गरीब गरीब हो रहा है एवं अमीर ज्यादा अमीर दूसरी बात आम जनता के साथ काम करने बालो की नोकर बिना रिस्पत दिया लगे जेसे सिपाही या पट्बरी यह घुस देकर जमींन गिरमि या बेच कर नोकरी पाते हैऔर कर्जा उतरने के खेल में लग जाते है अपने ही भाई को लुटने लग जाते है और यह ही यही भ्रस्टाचार की सुरुरत है बाद में यह एक सोक बन जाता है

    • Brutally Honest says:

      जब अन्ना और उनके सहयोगी मंच से गला फाड़ फाड़ कर चिल्ला रहे थे की हिंसा मत करिए, शांतिपूर्ण प्रदर्शन करिए तब क्या श्री दिनेश यादव जी अपने कानो में रुई डाल के बैठे हुए थे? ऐसे अवसाद ग्रस्त व्यक्ति के ऊपर दया तो की जा सकती है परन्तु उनके इस कृत्य की प्रशंसा करना शायद ही किसी समझदार व्यक्ति के लिए संभव हो|

      मुझे दिनेश यादव के परिवार से सहानुभूति है मगर दिनेश यादव ने ऐसा जघन्य अपराध करके अत्यंत निंदनीय कार्य किया है| उन्हें कम से कम अपने बूढ़े माँ-बाप एवं बीवी-बच्चों के प्रति अपने कर्तव्य को समझना चाहिए था|

      हिन्दू धर्म के अनुसार, आत्महत्या करने वालों पर यमराज भी दया नहीं करते और उन्हें कठोरतम नारकीय यातनाओं से गुजरना होता है| मुझे विश्वास है की कई लोग दिनेश जी के परिवार की मदद को आगे आयेंगे परन्तु इसे इसे भ्रष्टाचार-विरोधी आन्दोलन से न जोड़कर एक आत्महत्या की घटना ही कहा जाना तथ्यपरक होगा|

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