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दुष्कर्म के लिए फेसबुक पर नाबालिग से दोस्ती, पीड़िता ने आत्महत्या की…

By   /  November 8, 2013  /  No Comments

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बंगलुरु में 14 साल की एक लड़की ने इसलिए आत्महत्या कर ली, क्योंकि फेसबुक के जरिए बने बॉयफ्रेंड ने उससे शादी करने से मना कर दिया था.rape1 (1)

लड़के के इनकार और उसके बात न करने से लड़की इतनी निराश हुई की उसने खुद को फांसी लगा ली.

नौंवी क्लास में पढ़ने वाली एक लड़की की मनोज कुमार नाम के लड़के से इस साल सितंबर में फेसबुक पर दोस्ती हुई थी. लड़का येलहांका में रहने वाला और शेषाद्रिपुरम कॉलेज में बीकॉम का स्टूडेंट है.

उसने फेसबुक अकाउंट पर लिखा था कि वो हॉलीवुड स्टार की तरह बाइक चला लेता है और फॉर्मूला वन रेसर की तरह कार चला लेता है. इससे प्रभावित होकर लड़की ने उससे दोस्ती कर ली.

ऐसा आरोप लगाया गया है कि दोस्ती आगे बढ़ी तो लड़के ने लड़की को अपने घर बुलाया, जहां उस पर शारीरिक संबंध बनाने के लिए जोर डाला. धीरे-धीरे वो लड़की से उसके दूसरे दोस्तों का नंबर भी मांगने लागा. इस पर लड़की को संदेह भी हुआ.

इस दौरान लड़की मनोज से शादी के बारे में भी सोचने लगी थी. जब उसने इस संबंध में लड़के से बात की तो उसने मना कर दिया और मजाक बनाते हुए कहा कि वह इस संबंध को लेकर गंभीर नहीं था और मस्ती के लिए सब किया. उसने लड़की को सब भूल जाने के लिए कहा.

लड़की से यह बर्दाश्त नहीं हुआ और वह बहुत हताश हो गई. मंगलवार को घर में अकेली होने पर उसने खुद को फांसी लगा ली. उसने एक सुसाइड नोट भी छोड़ा था, जिसमें मनोज के बारे में बताते हुए लिखा था कि वो बरबाद हो गई है और जिंदगी में कोई दिलचस्पी नहीं है.

लड़की के माता-पिता ने पुलिस को बताया कि उन्हें इस बारे में कुछ पता नहीं था. वह कुछ दिनों से दुखी तो थी लेकिन उन्हें लगा की वो पढ़ाई की वजह से परेशान है.

लड़की के पास घर में भी इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध नहीं थी. वह साइबर कैफे से मनोज के साथ चैट करती थी.

जांच के बाद पुलिस ने मनोज को उसके घर से पकड़ लिया है. उस पर रेप और आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया है.

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  • Published: 4 years ago on November 8, 2013
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  • Last Modified: November 8, 2013 @ 10:55 am
  • Filed Under: अपराध

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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