/भारत में रेप फेस्टीवल की झूठी खबरों के ज़रिये भारत की नारियों का अपमान…

भारत में रेप फेस्टीवल की झूठी खबरों के ज़रिये भारत की नारियों का अपमान…

असम और पंजाब में बलात्कार पर्व प्रारंभ होने जा रहा है’ इस को सुन कर आप आक्रोश में आ गए होंगे लेकिन ये अपमानजनक और फ़र्ज़ी ख़बर दो विदेशी वेबसाइट्स धड़ल्ले से छाप कर दुनिया भर में फैला रही हैं. http://nationalreport.net और  http://superofficialnews.com नाम की दो फ़र्ज़ी सी लगने वाली इन वेबसाइट्स पर दो अलग अलग नाम से ये ख़बरें छपी हैं, जिनमें भारत में परम्परागत रूप से रेप फेस्टिवल या बलात्कार का त्योहार मनाए जाने की बात की जा रही है.National report

super official newsइन खबरों का कंटेंट बिल्कुल एक ही है, सिवाय इनमें स्थानों और लोगों के नाम बदल दिए जाने के. इन ख़बरों के अंदर की भाषा बेहद अपमानजनक है और ये ख़बर कहती है कि आने वाले कुछ ही दिनों में भारत के पंजाब और असम में परम्परागत रूप से मनाया जाने वाला रेप फेस्टिवल शुरु होने वाला है. इस दौरान सभी पुरुष इसमें भाग लेंगे और 7-16 साल की हर कुंवारी लड़की को भाग कर अपनी जान बचानी होगी. ये ख़बर इतनी अश्लील है कि ये भी कहती है कि सबसे ज़्यादा रेप करने वाले पुरुष को सम्मानित किया जाता है और ये परम्परा कई साल से चली आ रही है.

इस खबर को प्रसारित करने का जो शातिर तरीका है कि एक वेबसाइट पर ये ही खबर पंजाब और दूसरी वेबसाइट पर असम के नाम से है, उस से साफ ज़ाहिर है कि इसके पीछे सिर्फ भारत की छवि खराब करने की मंशा ही नहीं है और कुछ भी हो सकता है. फिलहाल ये पहली बार नहीं है, जब ऐसा हुआ हो, इस से पहले भी कई बार विदेशी कम्पनियां भारतीयों का मज़ाक उड़ाती रही हैं. इस ख़बर को दोनों वेबसाइट्स पर ध्यान से पढ़ने से साफ हो जाता है कि ये ख़बरें न केवल फ़र्ज़ी हैं बल्कि इरादतन लिखी गई हैं. अब सवाल ये है कि इन वेबसाइट संचालकों पर क्या और कैसी कार्रवाई हो सकती है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.