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सीबीआई को असंवैधानिक करार देने के फैंसले पर सुप्रीम कोर्ट की रोक..

By   /  November 9, 2013  /  1 Comment

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नई दिल्ली. सीबीआई को असंवैधानिक करार देने के गुवाहाटी हाईकोर्ट के फैसले को केंद्र सरकार ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देकर तत्काल फैसले पर रोक लगाने की मांग की है. सरकार की इस याचिका की आज शाम  मुख्य न्यायाधीश ने अपने घर पर सुनवाई करते हुए गुवाहाटी उच्च न्यायालय के फैंसले पर अमल पर रोक लगा कर फौरी तौर पर राहत दे दी है. अगली सुनवाई छह दिसंबर  को होगी.sc-435

गौरतलब है कि गुवाहाटी हाईकोर्ट ने 6 नवंबर को अपने एक फैसले में कहा था कि दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना (डीएसपीई) अधिनियम 1946 के तहत गठित सीबीआई पुलिस बल नहीं है और यह अधिनियम का न तो एक अवयव है और न ही हिस्सा. इसीलिए डीएसपीई अधिनियम 1946 के तहत गठित सीबीआई को पुलिस बल नहीं माना जा सकता.

हाईकोर्ट ने सीबीआई गठित करने के गृह मंत्रालय के 1 अप्रैल 1963 के प्रस्ताव को खारिज कर दिया. एडिशनल सॉलिसिटर जनरल पीपी मल्होत्रा ने सीबीआई के गठन से जुड़े 1963 के प्रस्ताव को खारिज करने के अभूतपूर्व फैसले को स्पष्ट रूप से गलत ठहराया है.

केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष गुहार की कि गुवाहाटी उच्च न्यायालय से सरकार के समक्ष संकट खड़ा हो गया है और इस फैंसले से करीब दस हज़ार मामले प्रभावित हो सकते हैं. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई छह दिसम्बर पर टालते हुए गुवाहाटी उच्च न्यायालय के फैंसले पर रोक लगा दी.

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  • Published: 4 years ago on November 9, 2013
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  • Last Modified: November 9, 2013 @ 5:00 pm
  • Filed Under: देश

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

1 Comment

  1. Hemen Parekh says:

    Who is confused ?

    Who is more confused ?

    Is it CBI , Central Government or the Supreme Court ?

    Yesterday , Supreme Court granted a stay to the Guahati High Court order declaring CBI unconstitutional / illegal

    Reason ?

    Chief Justice of India , P Sathasivam said ,

    " Many people are seeking stay of their trials based on HC verdict ….. We are concerned about all other cases "

    SC will now hear the case on 6th Dec

    Till then , CBI can continue with its 9,000 trials and 1,000 cases under investigation

    And , Department of Personnel and Training ( DoPT ) will get ready with its defense by :

    > Removing entire reference about CBI from the Lokpal bill , already
    passed in the Lok Sabha on Dec 27, 2011

    > Cancelling proposed amendments to DSPE Act(1946), regarding
    procedure for the appointment of the CBI Chief

    > Delinking amendments in DPSE Act from the Lokpal Bill and move these
    separately in Rajya Sabha

    > Amend the DSPE Act with fresh provisions and explanations related
    to CBI's functioning

    > Providing for a fixed tenure of not less than 2 years and for the
    prosecution of CBI Director

    > Providing legal backing to commitments given by the Government
    to SC , on financial autonomy and non-interference in cases being
    probed by CBI

    If SC accepts DoPT proposals on 6 Dec, CBI may continue to exist but confusion will only get confounded !

    But then Governments , Courts and the lawyers thrive on keeping laws complex and people confused ! Their survival depend upon that !

    The UPA – 2 government seems to be telling the citizens :

    " When we are doing all the thinking for you , why do you wish to exercise your little brains ?

    In our Poll Manifesto , we have clearly stated that , if you vote us to power in the forthcoming elections , you will never need to think again !

    Why trouble your little brains , thinking about

    > Roti / Kapda / Makan / Pani / Sadak / Bijlee
    > Rapes / Murders / Suicides / Dowry deaths / Honor Killings
    > Dengue / TB / Polio / Malaria
    > Garbage / Open Gutters / Dirty Drinking Water / Air Pollution
    > Poverty / Starvation / Unemployment
    > Land Mafias / Scams / Floods / Droughts

    Why ? Why ? Why ?

    If you must think , then think about the heavenly Nirvana under UPA-3 "

    * hemen parekh ( 10 Nov 2013 )

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