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पुत्री के कातिलों की गिरफ्तारी के लिए धरना..

By   /  November 11, 2013  /  1 Comment

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बेटी के हत्यारों की गिरफ्तारों को लेकर कलेक्ट्रेट के सामने धरना दे रहा है पिता..दहेज़ के लालच में ससुराल पक्ष ने मार डाला था बेटी को..

-सिकंदर शेख़||

जैसलमेर,11 नवंबर, लोगों को अपनी ज़मीन के लिए, अपनी पेंशन के लिए या और भी कोई आम समस्या के लिए धरने पर बैठते देखा है, लेकिन क्या हो कि जब एक बाप अपनी बेटी के हत्यारों कि गिरफ्तारी को लेकर धरना दे. जी हाँ, ऐसा ही कुछ हो रहा है जैसलमेर जिला कलेक्ट्रेट के बाहर, जहाँ एक आम आदमी अपनी बेटी को ससुराल पक्ष द्वारा मार दिए जाने के बाद भी आरोपियों को खुलेआम घुमते देख भारत कि पुलिस को कोस रहा है, और न्याय कि उम्मीद में अपनी बेटी के फ़ोटो को देख आंसू बहा रहा है,क्या चुनावी माहोल में रंगे सब लोगों को ये भी नज़र आता है.Ranaram

 

जैसलमेर जिला कलेक्ट्रेट के बाहर धरने पर बैठा ये आदमी अपनी बेटी के फ़ोटो को निहार रहा है और आँखों में आंसू कि नदियां बह रही है. अपनी बेटी के साथ बिताये एक एक पल को याद कर दिल में खुश होता है. मगर जब भी उसकी तस्वीर हाथों में लेता है तो सीने में क्रोध कि लहर और आँखों में उन खुनी हत्यारों के लिए रोष निकलता है. जिन्होंने दहेज़ कि खातिर उसकी फूल सी बेटी को मौत के घात उतार दिया और उसके बाद भी खुलेआम घूम रहे हैं. ये आदमी है राणाराम.

राणा राम ने अपनी बेटी कि शादी बड़ी धूम धाम से की थी मगर उसको क्या पता था कि जिस बेटी को वो हंसी ख़ुशी विदा कर रहा है, उसकी उसे चिता में भी देखना पड़ेगा. राणा राम ने अपनी बेटी कि शादी आज से 5 साल पहले खेमा राम से करी थी और तभी से उसकी बेटी संतोष को उसके ससुराल वाले दहेज़ के लिए परेशान करने लग गए थे. मगर लोक लाज को देखते हुए उन्होंने उसे ही समझाया मगर ऐसा नहीं सोचा था कि ये दहेज़ के राक्षस उसे जान से मार डालेंगे. दो बच्चों कि माँ संतोष को उसके ससुराल वालों ने इतना पीटा कि उसकी मौत हो गयी मगर राणाराम का आरोप है कि पुलिस ने जानबूझकर उन सब तथ्यों को छुपाया जिसमे ये बात सामने आती थी कि उसके साथ मारपीट हुई है और सिर्फ उसके पति खेमाराम को पकड़ कर इतिश्री कर ली लेकिन बाकी नामजद आरोपी आज भी खुलेआम घूम रहे हैं, उनको खुलेआम घूमते देख राणाराम ने पुलिस में इनको गिरफ्तार करने कि गुहार लगायी मगर वहाँ किसी ने उसकी नहीं सुनी. जिससे आहत हो वो जिला कलेक्ट्रेट के बाहर धरने पर बैठा है. इस न्याय के उम्मीद के साथ कि एक दिन उसकी प्यारी सी बेटी के हत्यारों को भी सजा मिलेगी.

भारत में दहेज़ के लोभ में आकर हज़ारों बेटियो को मारा जाता है और कानून भी कड़े हैं. मगर पुलिस पर हमेशा से ये इलज़ाम लगते रहे हैं कि वो आरोपियों का पक्ष लेती है, मगर एक बाप अपनी बेटी के हत्यरों को गिरफ्तार करने के लिए धरने पर बैठा है. इस उम्मीद के साथ कि इन्साफ उसे भी मिलेगा चाहे उसे आमरण अनशन ही क्यों न करना पड़े.

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  • Published: 4 years ago on November 11, 2013
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  • Last Modified: November 11, 2013 @ 11:20 am
  • Filed Under: अपराध

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

1 Comment

  1. dahyj waloa koa to fasia dyna chahiya kadias kadia sja milna chahiya

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