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सुप्रीम कोर्ट के एक रिटायर जज पर यौन शोषण का आरोप…

By   /  November 12, 2013  /  1 Comment

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एक युवा महिला वकील ने आरोप लगाया है कि हाल ही में रिटायर में हुए सुप्रीम कोर्ट के एक जज ने पिछले साल दिसंबर में उनका यौन शोषण किया था. नैशनल यूनिवर्सिटी ऑफ जूर्डिशल साइंसेज, कोलकाता से ग्रैजुएशन करने वाली महिला वकील उस जज के साथ बतौर इंटर्न काम कर रही थीं.2kgowhxv

वकील ने ‘जर्नल ऑइ इंडियन लॉ ऐंड सोसाइटी’ के लिए लिखे ब्लॉग में पहले यह सनसनीखेज आरोप लगाया और फिर ‘लीगली इंडिया’ को दिए इंटरव्यू में इस आरोप को दोहराया. वकील ने कहा कि जब पूरा देश निर्भया गैंग रेप कांड को लेकर उबल रहा था उस दौरान मेरे दादा की उम्र के जज ने एक होटेल के कमरे में मेरा उत्पीड़न किया.

उन्होंने कहा, ‘पहले मैंने कायराना फैसला किया कि अपने उत्पीड़क के खिलाफ कानूनी लड़ाई नहीं लड़ूंगी लेकिन बाद में मुझे लगा कि यह सुनिश्चित करना मेरी जिम्मेदारी है कि दूसरी लड़कियों को इस तरह की परिस्थिति का सामना न करना पड़े.’ वकील ने कहा कि अब तक वह जज की हैसियत की वजह से चुप रहीं. इसके अलावा वह उनके कृत्य से अवाक रह गई थीं और उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि कैसे गुस्से को आवाज दी जाए.

इसके बाद इस युवती ने एक ब्लॉग के सहारे एपीआई आप बीती जग जाहिर की. इसके न्याय क्षेत्र की एक वेब साईट लीगली इंडिया ने इस महिला वकील का साक्षात्कार किया तो

‘लीगली इंडिया’ के साथ इंटरव्यू में महिला वकील ने कहा, ‘मैंने उसी जज के द्वारा तीन और यौन उत्पीड़न के मामलों के बारे में सुना है. इसके अलावा मैं चार और ऐसी लड़कियों को जानती हूं जिनका दूसरे जजों ने उत्पीड़न किया. लेकिन ये मामले उतने संगीन नहीं थे. इनमें से ज्यादातर मामले जजों के चैंबर में हुए और उस समय कोई न कोई वहां मौजूद था, इसलिए ये उस स्तर तक नहीं गए. एक लड़की को मैं जानती हूं जिसका लगातार यौन उत्पीड़न हुआ और बाद में इसकी वजह से उसे काम में भी काफी समस्या हुई.’

इस बारे में जब हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया ने खुद को पीड़ित बता रहीं वकील से ईमेल के जरिए संपर्क साधने की कोशिश की, तो उन्होंने जवाब दिया कि उन्हें जो कुछ भी कहना था वह ब्लॉग और ‘लीगली इंडिया’ को दिए इंटरव्यू में कह चुकी हैं. फिलहाल इस बारे में उन्होंने और कुछ कहने से इनकार कर दिया.

गौरतलब हैं कि कुछ समय पहले भी महिला वकीलों के एक समूह ने कुछ जजों द्वारा अपने यौन शोषण किये जाने का मामला उठाया था.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

1 Comment

  1. इस समाचार ने समाज के सामने नियाय से लिए दो बुनियादी सबल खड़े कर दिए है कि महिला बकील जो अपराध कि गमिभिरता औउर महिला के साहस को बा खूबी जानती थी अपना स्वार्थ समय कि मज़बूरी भी अपंने कथन में
    बता भी रही है यही सबल िेक साधारण नागरिक महिला समाज/ नियाय / जांच करने वाले पुलिस के लोग भी उठाते रहा ते है औउर नियाय भटक जाता है [२] जज महोदय नियाय कि नियाय मूर्ति नैतिक्ता के पैरामीटर तै करने वाले पैमाने आमसाधरं नागरिक औरर अपराधी में कैय अंतरे माने गए ये सब समाप्प्ता हो जाता है कुछ शेष नहीं रहा जंगली ./ नक्कसली हिन्षक / पशुता ये भी शर्म शर हो जाते है बो दिन कण आएगा कि कुर्शी न्य़यालय में बैठे आदमी को गोली चलने का अधिकार स्वयं देदेता है ये सायद हौं सब अपने सामने होते देखेंगे

    sa

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