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मोदी राजनीति को गटर बनाना चाहते हैं…

केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश लगातार बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी नरेंद्र मोदी पर तीखे हमले बोल रहे हैं. मंगलवार को जयराम रमेश ने एक अंग्रेजी न्यूज चैनल से बातचीत में कहा कि मोदी राजनीति को गटर बनाना चाहते हैं. एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि राहुल गांधी कभी मोदी से तू-तू मैं-मैं के लिए राज़ी नहीं होंगे.Jairam-Ramesh

रमेश ने कहा कि मोदी जैसी भाषा और झूठ का इस्तेमाल कर रहे हैं उससे राजनीति और गटर के बीच लकीर खत्म हो जाएगी. हालांकि, कभी जयराम रमेश ने नरेंद्र मोदी को जबर्दस्त कैंपेनर बताया था. तब कांग्रेस में रमेश के खिलाफ आवाज भी उठी थी. कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद सत्यव्रत चतुर्वेदी ने तो यहां कह दिया था कि रमेश को कांग्रेस छोड़ बीजेपी को जॉइन कर लेना चाहिए. इसके बाद से रमेश मोदी पर लगातार कड़ी टिप्पणी कर रहे हैं.

​कांग्रेस के मंत्री मोदी को लगातार निशाने पर रख रहे हैं, वहीं राहुल गांधी अपनी रैलियों में मोदी पर सीधा बोलने से परहेज कर रहे हैं. चैनल से बातचीत के दौरान जयराम रमेश से पूछा गया कि राहुल गांधी क्यों नहीं मोदी को डायरेक्ट जवाब देते हैं? इस पर रमेश ने कहा, मोदी जिस स्तर की बातें करते हैं, उसे देखते हुए उन्हें नहीं लगता कि राहुल कभी मोदी के साथ तू-तू-मैं-मैं करने के लिए तैयार होंगे.

बीजेपी रमेश के इस बयान से बेहद खफा है लेकिन प्रतिक्रिया तल्ख के बजाय सधी हुई दे रही है. पार्टी की प्रवक्ता निर्मला सीतरमण ने ट्वीट किया, ‘पॉलिटिक्स ऑफ गटर’ मिस्टर जयराम रमेश? तब क्या हुआ था जब आपकी पार्टी ने उन्हें मौत का सौदागर कहा था?’ निर्मला सीतारमण ने अपने ट्वीट में सोनिया गांधी की उस टिप्पणी का हवाला दिया जिसमें 2007 के गुजरात चुनाव अभियान में उन्होंने मोदी को ‘मौत का सौदागर’ कहा था. सोनिया गांधी की इस टिप्पणी के बाद तब काफी बवाल हुआ था. सोनिया गांधी ने मोदी पर 2000 के दंगों को लेकर निशाना साधा था. सोनिया गांधी की यह टिप्पणी मोदी के पक्ष में गई थी और कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा था.

बीजेपी के एक और प्रवक्ता प्रकाश जावेडकर ने कहा कि रमेश के बयान से साफ है कि कांग्रेस देश की असली समस्या पर सीधी बात करने में डर रही है. जावेडकर ने कहा कि मोदी आवाम से जुड़े जिन सवालों को उठा रहे हैं, कांग्रेस उनका जवाब क्यों नहीं देती? उन्होंने कहा कि कांग्रेस को मोदी पर हमले के बजाय देश की जनता को बताना चाहिए कि महंगाई कब थमेगी.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.