Loading...
You are here:  Home  >  राजनीति  >  Current Article

राजनीतिक फंडिंग: चंदा अथवा क़ाला धन…

By   /  November 12, 2013  /  No Comments

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

-दौलत सिंह नेगी||

केन्द्रीय गृहमंत्री जी ने आम आदमी पार्टी की फंडिंग की जाँच  के लिए जो अति सक्रियता दिखायी है काश उन्होंने इतनी सतर्कता देश की आंतरिक हालात पर भी दिखायी होती तो इनके गृहमंत्री बनने के बाद एक भी आतंकवादी वारदात नहीं हुई होती. वर्तमान में कांग्रेस के अधिकतर मंत्री अपने ऐसे ही उजूल फिजूल बयानों के लिए सुर्ख़ियों  में रहने के आदी हो चुके है  तथा अपने पद के अनुरूप कार्य करने में असक्षम दिखायी देते हैं.political funding

आप की फंडिंग के बारे में  शिंदे पर पलटवार करते हुए कुमार विश्वास ने कहा कि गृह मंत्री अपने पद के अनुसार काम नहीं कर रहे है. उन्होंने कहा कि गृहमंत्री का यह काम नहीं है कि मीडिया में आकर सनसनीखेज आरोप लगाएं. वह तुरंत एफआईआर दर्ज कराते हुए जांच कराएं. कुमार विश्वास ने कहा कि हम अपने पार्टी के चंदे की जांच कराने के लिए तैयार है लेकिन कांग्रेस और बीजेपी के चंदे की भी जांच होनी चाहिए.

अजीब हाल है इन मंत्रियों का कभी शीला दीक्षित प्याज के स्टोरियों से विनती करती नजर आती हैं कि मैं अनुरोघ करती हूँ कि कृपया प्याज को बाजार में आने दें रोंके नही तो कभी शिंदे जैसे मंत्री जाँच कराने  की बजाय मामले को सनसनीखेज बनाते हैं. गृहमंत्री को इस मामले में ऐसे टुच्चे अरोप लगाने की बजाय खुद पहल करनी चाहिए और शुरूआत स्वंय अपनी पार्टी से करनी चादिए आखिर वहीं तो सबसे लम्बे समय से इस देश में शासन करती आ रही है.

लोकतंत्र का तकाजा और जनता की मांग के अनुसार मुख्य विपक्षी पार्टी बीजेपी द्वारा सत्ता पक्ष को इतना मजबूर किया जाना चाहिए कि कांग्रेस अपने फंडिंग को सार्वजनिक करने को राजी हो जाय तत्पश्चात अन्य राष्ट्रीय पार्टियों और अन्य क्षेत्रीय दल भी अपने फंडों को सार्वजनिक करने को मजबूर होना पड़े.

आम भारतीयों की नजरों में इन नेताओं की कीमत अब कोड़ियों की भी नही  रही क्योंकि आम आदमी का उपहास ये लोग बडी बेशर्मी से उडाते हैं. इसी काले धन से ये राजनीतिक दल चुनाव लड़ते हैं सारी राजनीतिक बिरादरी तथा उनकी पार्टियां इसी काले धन से आम आदमी को धमका कर लालच दे कर अपने अपने पक्ष में वोट डालने को मजबूर कर रहे है. इससे इनकी ग्रैविटी की तो ऐसी की तैसी हो चुकी है साथ सबसे बडा नुकसान लोकतंत्र का हो चुका है. इन दलों को जब जब आम आदमी ललकारता नजर आता है तो सारे दल एक साथ आम आदमी पर पिल पडते हैं. इसी कारण ये लोग अपने आप को सूचना के अधिकार के पार्टियां नहीं लाना चाहते हैं.

राजनीतिक दलों को मिल रहे चन्दे पर यदि सारी राजनीतिक जमात आम आदमी पार्टी के खिलाफ एकजुट हो चुके है. आम आदमी की नजरों में यह भानुमति का पिटारा अब खुल ही जाना चाहिए. आखिर जनता को  भी अधिकार है वह भी यह जाने की हमारे राजनीतिक दल कहाँ से चन्दा लेते है. अगर अब भी ये नेता नहीं जागें तो ये लोकतंत्र के सबसे बडे हत्यारे कहलायेंगे.

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email
  • Published: 4 years ago on November 12, 2013
  • By:
  • Last Modified: November 12, 2013 @ 8:50 pm
  • Filed Under: राजनीति

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

You might also like...

पाकिस्‍तान ने नहीं किया लेकिन भाजपा ने कर दिखाया..

Read More →
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
%d bloggers like this: