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आज़म खां ने कहा कि मैं करवाता हूँ दंगा…

By   /  November 14, 2013  /  5 Comments

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अपनी हरकतों से लगातार सरकार और पार्टी को मुश्किलों में डालने वाले कद्दावर मंत्री आजम खां ने बुधवार को खुद को ‘बैड मैन’ ज़ाहिर करते हुए कहा कि वह दुनिया के सबसे बुरे आदमी हैं. उन्होंने अपने विरोधियों पर तीर चलाने के साथ ही मीडिया व नौकरशाही पर भी जमकर हमले किए.azam-khan

स्थानीय निकाय अध्यक्षों के सम्मेलन में बोलते हुए आजम ने अपने ऊपर लगने वाले आरोपों के लिए मीडिया को जिम्मेदार ठहराया और खूब तंज कसे. फिर बारी आई अफसरों की, जिन्हें सरकार योजनाओं को अमली जामा न पहनाने के लिए उन्होंने जिम्मेदार ठहराया. दिलचस्प यह रहा कि लगे हाथ आजम ने मंच पर बैठे राज्य नगरीय विकास अभिकरण (सूडा) के निदेशक जेपी सिंह पर बैट्री चालित रिक्शा खरीद योजना पर कुंडली मार कर बैठने का आरोप भी जड़ दिया. कहा, ‘यह तो माशाअल्लाह हैं, गरीबों के रिक्शा खरीद के लिए 350 करोड़ रुपये दबाए बैठे हैं लेकिन इन पर तो मैं कार्रवाई भी नहीं कर सकता.’ अफसरों द्वारा बजट जारी करने के लिए रिश्वत मांगे जाने और नहीं देने पर योजनाएं अटकाने के आरोप पर आजम ने निकायों के अध्यक्षों से एकजुट होकर रिश्वत का विरोध करने का भी आह्वान किया. निकाय अध्यक्षों ने जिलों में डीएम, एडीएम, एसडीएम से लेकर तहसीलदार के खिलाफ गंभीर आरोप भी लगाए. आजम ने अध्यक्षों को भी अदब में लेते हुए कहा कि ‘आप हमारी लाज रखो, हम आपकी लाज रखेंगे’.

आजम के बोल

‘मीडिया की नजर में दुनिया की सारी बुराई हममें है. हम कामचोर हैं, देशद्रोही हैं, हम दंगाई हैं. दंगा कराते हैं, हम मंत्री होते हुए प्रदेश और देश की जनता पर बोझ हैं, ईमानदारी से कुतुबमीनार और ताजमहल भी बनवा दे तब भी लोग उसमें कमियां निकाल कर बेईमान ठहरा देंगे… सोशल मीडिया की आड़ में अफसर भी मुझे बेईमान ठहराने में जुटे हैं.’ आजम ने अपनी सफाई में अभिनेता दिलीप कुमार, लता मंगेशकर से लेकर सचिन तेंदुलकर जैसे कई हस्तियों को जोड़कर तमाम बातें कहीं.

अध्यक्षों ने कहा

निकायों का विकास कैसे करें. एडीएम, एसडीएम से लेकर तहसीलदार तक योजना स्वीकृत करने के लिए रिश्वत मांगते हैं. नहीं देने पर कोई न कोई पेंच फंसाकर योजना को अटका देते हैं. -जगदीश सिंह इंदौलिया, नगर पंचायत, किरावली, आगरा

निकायों में अफसरों की तैनाती में सरकार भेदभाव कर रही है. सपा समर्थक निकायों में ईओ की तैनाती की जाती है जबकि अन्य दलों से जुड़े निकायों में एसडीएम, एडीएम और तहसीलदारों को तैनात कर अवैध वसूली को बढ़ावा दिया जा रहा है. सभी निकायों में ईओ की तैनाती की जाए.
-छट्ठे लाल निगम, नगर पंचायत रुद्रपुर, देवरिया

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  • Published: 7 years ago on November 14, 2013
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  • Last Modified: November 14, 2013 @ 12:42 pm
  • Filed Under: राजनीति

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

5 Comments

  1. Deepak Kumar says:

    admi..to…daga…karbaga…naha..boto..janbar…karbata..ha..

  2. Ashok Gupta says:

    YE VO BHASHA BOLTE HAI KI aa bel mujhe singh mar

  3. mahendra gupta says:

    मीडिया ने कुछ गलत कहा भी नहीं, अब आप स्वयं अपने पर तथाकथित इल्जाम ले यदि भले बन्ने कि कोशिश कर रहे हैं तो व्यर्थ ही है.अब आजमजी आपकी छवि जो बन गयी है वह आसानी से धूमिल होने वाली नहीं. सत्ता का गरूर आपके सर इतना चढ़ गया कि आप सब कुछ भूल गए अभी तो जनता द्वारा सजा दिया जाना बाकी ही है.ये सहानुभति मांगने से कुछनही होने वाला जब तक अपने विचार नहीं सुधार लेते.जिसकी सम्भावना कम ही प्रतीत होती है.

  4. मीडिया ने कुछ गलत कहा भी नहीं, अब आप स्वयं अपने पर तथाकथित इल्जाम ले यदि भले बन्ने कि कोशिश कर रहे हैं तो व्यर्थ ही है.अब आजमजी आपकी छवि जो बन गयी है वह आसानी से धूमिल होने वाली नहीं. सत्ता का गरूर आपके सर इतना चढ़ गया कि आप सब कुछ भूल गए अभी तो जनता द्वारा सजा दिया जाना बाकी ही है.ये सहानुभति मांगने से कुछनही होने वाला जब तक अपने विचार नहीं सुधार लेते.जिसकी सम्भावना कम ही प्रतीत होती है.

  5. यादव मंत्री जी भी कहा रहे थे कि थोडा थोडा करो अधिक करने से सब कि नजर में आजाता है अब ये थोडा माने किया कितना ये थोडा केसे किया जाता है ये स डी म तहसीलदार कओलेकसतर लिंगो को नहीं मालुम जब सर्कार का रेजोलुसटों ही तोड़े का पास किया है तो थोडा कितन ये नहीं बताया बा एस दी एम् तहसीलदार बाकी सब अपने हिसाब से कर रहे हो थोडा थोडा अब जायदा दिखने लगा तो मंत्री जी नाराजी दिखाते है ये ईएस सर्कार के मन्त्री [सिसुपाल] कंश राज्य के मंत्री जी का ही कथन था खुला आदेश थे प व दी [पी दब्ब्लूडी दी] मंरतीजी का शुभाशीष दिया गया था कर्मचाहिरी बही तो कर रहे है नारकज होने कि कोई बात दीखती नहीं

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