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तहलका के संपादक तरुण तेजपाल का तहलका, सहकर्मी का यौन उत्पीड़न…

By   /  November 21, 2013  /  2 Comments

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अपनी बेटी की उम्र की पत्रकार के यौन उत्पीड़न के आरोप में घिरे ‘तहलका’ पत्रिका के प्रमुख संपादक तरुण तेजपाल प्रायश्चित स्वरूप खुद ही 6 महीने की छुट्टी पर चले गए हैं। संस्थान से खुद को अलग करने की सूचना तेजपाल ने ई-मेल के जरिए तहलका की प्रबंध संपादक शोमा चटर्जी को दे दी है। शोमा ने तेजपाल के इस तरह संस्थान से हटने के बारे में अधिक बात न करते हुए कहा कि यह हमारा आंतरिक मामला है। वहीं, तेजपाल के इस प्रायश्चित पर सवाल खड़े होने लगे हैं।tejpal

क्या लिखा है पत्र में..

पत्र में तेजपाल ने कहा कि पिछले कुछ दिन बहुत परीक्षा वाले रहे और मैं पूरी तरह इसकी जिम्मेदारी लेता हूं। एक गलत तरह से लिए फैसले, परिस्थिति को खराब तरह से लेने के चलते एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई जो उन सभी चीजों के खिलाफ है जिनमें हम विश्वास करते हैं और जिनके लिए संघर्ष करते हैं। उन्होंने कहा कि मैंने संबंधित पत्रकार से अपने दु‌र्व्यवहार के लिए पहले ही बिना शर्त माफी मांग ली है लेकिन मैं महसूस कर रहा हूं कि और प्रायश्चित की जरूरत है। तहलका के संस्थापक सदस्य तेजपाल ने अपने पत्र में लिखा है, क्योंकि इसमें तहलका का नाम जुड़ा है और एक उत्कृष्ट परंपरा की बात है, इसलिए मैं महसूस करता हूं कि केवल शब्दों से प्रायश्चित नहीं होगा। मुझे ऐसा प्रायश्चित करना चाहिए जो मुझे सबक दे। इसलिए मैं तहलका के संपादक पद से और तहलका के दफ्तर से अगले छह महीने के लिए खुद को दूर करने की पेशकश कर रहा हूं।

दो बार हुआ यौन उत्पीड़न!

मीडिया में जो खबरें छनकर आ रही हैं, उसके अनुसार पीड़ित लड़की बहुत कम उम्र की है और घटना के बाद से ही सदमे में है। पीड़िता के साथ दो बार यौन उत्पीड़न हुआ और यह तब हुआ जब ‘थिंक इवेंट’ चल रहा था।

पीड़िता तरुण की बेटी की उम्र की है। उसने यौन उत्पीड़न की शिकायत ई-मेल के जरिए की है। इस बारे में उसने तरुण की बेटी को भी बताया। पीड़ित लड़की के पिता भी तरुण के दोस्त हैं।

कपड़े फाड़ दिए और उससे भी आगे बढ़ गए..

बताया जा रहा है कि यह घटना पिछले सप्ताह गोवा में ‘थिंक इवेंट’ के दौरान घटी। नशे की हालत में तरुण ने इस लड़की का यौन उत्पीड़न किया। उन्होंने उसके कपड़े फाड़ दिए और उससे भी आगे बढ़ गए..।

लड़की ने अपनी शिकायत में लिखा कि मैं उनकी बहुत इज्जत करती हूं। वे मेरे पिता के समान हैं। उन्होंने 2 बार मेरे साथ हरकत की और मैं रोते हुए अपने कमरे में आई। मैंने अपने साथ हुई हरकत के बारे में पत्रिका के तीन सहयोगियों को बताया।

लड़की ने लिखा कि जब मैंने अपने साथ हुई शर्मनाक घटना के बारे में तरुण की बेटी को बताया तो तरुण काफी नाराज हो गए.. मैं डर गई थी..।

मेल से दी सूचना

शोमा चौधरी ने तहलका के अन्य कर्मियों को एक मेल भेजकर घटनाक्रम की जानकारी दी। उन्होंने कहा, ‘यह आपमें से कई लोगों के लिए अजीब हैरानी की बात हो सकती है। एक अप्रिय घटना घटी और तरुण तेजपाल ने इस मामले में शामिल अपनी सहयोगी से बिना शर्त माफी मांगी है। वह अगले 6 महीने के लिए तहलका के संपादक पद से अलग रहेंगे।’

सोशल साइट्सों में हुई थू-थू

मीडिया जगत में तरुण तेजपाल का नाम काफी पुराना है और तहलका जैसे संस्थान में रहकर उन्होंने कई सनसनीखेज प्रकरण उजागर किए हैं। उन पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगने के बाद सोशल साइट्सों पर टिप्पणियों की बाढ़ सी आ गई है और मीडिया में भी सवाल खड़ा हो रहा है कि यह मामला पुलिस में क्यों नहीं जा रहा है? क्या इस खुलासे के बाद पुलिस खुद संज्ञान ले सकती है? खुद ही जज बनकर प्रायश्चित करने का यह फैसला कितना उचित है? फेसबुक पर आए कुछ कमेंट इस प्रकार है:

मोहन श्रोत्रिय: ***वाह, ‪विक्रमादित्य‬, वाह !***

‪तहलका‬ के प्रधान संपादक ‪तरुण तेजपाल‬ ने नया कीर्तिमान स्थापित किया !

अपनी ही सहकर्मी के साथ दुराचार! और इससे पहले कि ख़बर उजागर हो, खुद अपराधी ही ‪न्यायाधीश‬ भी बन गया. नफ़ीस शब्दों के आवरण में अपना अपराध कुबूल किया (यह दूसरी बात है कि उसे अपराध की संज्ञा फिर भी न दी), और अपने लिए ‪सज़ा‬ भी सुना दी. #सज़ा भी कैसी ! छह महीने तक तहलका के प्रधान संपादक की कुर्सी से उतरे रहेंगे, और इस अभूतपूर्व तरीक़े से प्रायश्चित करेंगे ! प्रकारांतर से उन्होंने मान भी लिया कि उनकी हवस की शिकार बनी सहकर्मी ने उनकी “बिना-शर्त क्षमा-याचना” को स्वीकार भी कर लिया है! मज़ा यह है कि यह सच नहीं है कि उन्हें माफ़ कर दिया गया है. माफ़ कर दिया गया होता, तो बात के खुल जाने का डर भी नहीं होता, और इस ‪प्रायश्चित‬ तक की नौबत नहीं आती !

ज़ाहिर है, हुआ यह होगा कि बात खुल जाने के कगार पर आ गई होगी, और न्याय की प्रक्रिया को ‪बाइपास‬ कर पाने की शुभेच्छा के वशीभूत तरुण तेजपाल ने पश्चाताप-प्रायश्चित का नाटक रच दिया होगा.

यह निंदनीय है कि इतनी प्रतिष्ठित पत्रिका के संस्थापक-प्रधान संपादक ने अपने आपको नैतिकतावादी दिखाने के लिए यह घोर-न्यायविरुद्ध तरीक़ा अपनाया ! यही नहीं, चूंकि सहकर्मी का नाम नहीं आया है, उन्होंने अपनी पत्रिका में काम करने वाली तमाम महिला पत्रकारों को संदिग्ध बना दिया है.

कहने की ज़रूरत नहीं है कि हम बेहद बुरे समय में जी रहे हैं ! पिछले दिनों उठे मामले
गिनाने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि ये सब “पब्लिक डोमेन” में हैं, तथा मीडिया एवं सोशल मीडिया में छाए हुए हैं.

चाहे तरुण तेजपाल ने अपने खिलाफ़ फ़ैसला (?) सुना दिया हो, क़ानून को अपना काम करना चाहिए.

वैशाली वैद्य: डरावने गंदे लोग और उनकी गंदी सोच

रिसू रुंगटा: मारो इनको

राघवेंद्र नारायण: ये लो भईया तहलका के संपादक तरुण तेजपाल ने अपनी बेटी की दोस्त का दो बार .. करके तहलका मचाया और अब खुद जज बनके खुद को सजा दे डाली सजा क्या दी खुद को 6 महीने तक संपादिकी नहीं करेंगे ये महाशय ऐसी सजा तो हर .. चाहेगा।

टाइमलाइन फोटो: तहलका के संचालक तरुण तेजपाल जो बड़ा तहलका मचाते हैं, अपनी खबरों से आज उनकी एक खबर.. तहलका मचा रही है..

गौरव शर्मा: ये है मीडिया का असली चेहरा.. शेम..शेम..शेम

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  • Published: 4 years ago on November 21, 2013
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  • Last Modified: November 29, 2013 @ 9:24 am
  • Filed Under: मीडिया

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

2 Comments

  1. Surendra godara sangasar says:

    मुझे अफसोस है कि मेँ उस समाज से हूँ जिसने औरत जाति को छलना सीखा हैं ।
    देश मे आसाराम , तेजपाल , मदेरणा, नागर जैसे नामों की बाढ सी आ गयी है ।
    इन असंख्य नामों ने कितनों के ही विश्वास व सम्मान का भी खून कीया है ।
    – सुरेन्द्र गोदारा सांगासर , चूरु ।

  2. Ajay Bhargava says:

    So bad

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