/कॉरपोरेट घरानों की बनेगी सरकार !

कॉरपोरेट घरानों की बनेगी सरकार !

-पलाश विश्वास।।

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आगामी लोकसभा चुनाव में जनादेश निर्माण प्रक्रिया में धर्मोन्मादी युद्धक राष्ट्रवाद को हम सारे लोग ध्रुवीकरण का मुख्य कारक मान रहे हैं और मीडिया ख़बरों के सर्वेक्षणों के ज़रिये भी यही चुनावी समीकरण साधे जा रहे हैं। परदे के पीछे लेकिन कुछ अलग खेल चल रहा है। जिससें आम और गरीब आदमी ना के बराबर ही वाकिफ़ होगा।हां ये वही आम और गरीब आदमी हैं जिनकी बातें करके अलग-अलग राजनीतिक दल अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकते हैं। मगर आम-गरीब की जगह चुनावों में कौन कितने दमख़म से उतरेगा इसका फैसला उद्योगपत्तियों का एक ‘ख़ास’ तबका करेगा। मतलब ये कि जो राजनीतिक दल रिलायंस जैसी कंपनियों के हित ज्यादा साधेंगे सिक्का उन्हीं का खनकेगा। यानी, धर्मोन्मादी पैदल सेनाएं (राजनीतिक दल) चाहे कुरूक्षेत्र में मोर्चा बंद हो गई हैं, लेकिन असली युद्ध तो लड़ रहे हैं आधुनिक युग के श्रीकृष्ण मुकेश अंबानी।

इंडिया इंक के विकल्प कोई अकेले नरेंद्र मोदी नहीं है और न राहुल गांधी हैं। ममता बनर्जी से लेकर मुलायम सिंह तक अनेक विकल्प हैं। सबको पूरे संसाधन दे रही है कॉरपोरेट और बहुराष्ट्रीय कंपनियां, विदेशी चंदे की सुनामी चल रहीं है। अब इंडिया इंक ‘कंपनी क़ानून’ में भी छूट का दबाव बना रही है। इंडिया इंक चाहती है कि किसी राजनीतिक दल को कितना चंदा दिया गया कंपनियों पर इसका खुलासा करने का दबाव न डाला जाए। एक तरह से भारत जैसे देश में जहां सत्ता समीकरण अक्सर बदलते रहते हैं वहां जनता-जनार्दन ने कोई अनचाहा फेरबदल कर दिया तो उनके कारोबारी हित सत्ता बदलने के बाद भी सुरक्षित रहें इसकी पूरी सुरक्षा की मांग की जा रहीं हैं। इंडिया इंक ने सरकार को संदेश दिया है कि प्रस्तावित नए कंपनी एक्ट में पॉलिटिक्ल फंडिंग के बारे में बताने का जो प्रावधान है उसे हटाया जाए। कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री(सीआईआई) ने सरकार को लिखकर गुहार लगाई है कि वह नए कंपनीज़ ऐक्ट के सेक्शन 182(3) में बदलाव करे।इस सेक्शन में कहा गया है कि कॉरपोरेट्स को उन पॉलिटिक्ल पार्टियों के नामों का खुलासा अपने प्रॉफिट ऐंड लॉस अकाउंट में करना होगा, जिन्हें वे चंदा देते हैं। इसके लिए रेप्रेजेंटेशन ऑफ पीपल ऐक्ट,1951 के सेक्शन 29ए के तहत रजिस्टर्ड इकाइयों को पॉलिटिक्ल पार्टियों के तौर पर परिभाषित किया गया है।

कॉरपोरेट घरानों के आगे सब नतमस्तक हैं
कॉरपोरेट घरानों के आगे सब नतमस्तक हैं

खैर, मंच से दलितों, शोषितों, दबे-कुचले गरीब वर्ग की हिमायत में अपने महान नेताओं के भाषण सुन कर होश में आए तो थोड़ा ध्यान यहां भी दे दीजिएगा। जो पूंजी इन्हें कुर्सी दिलवाने में सबसे अहम भूमिका निभाएगी बदले में अपना हिस्सा तो उसे लेना ही लेना है।यानी मंच से बेशक ये सारे नेता गरीबों के सबसे बड़े हमदर्द दिखते हो सच्चाई तो उनके सत्ता में आने के बाद फिर से हमारे सामने होगी। इस देश में सत्ता बनाने-बिगाड़ने के खेल में कॉरपोरेट घरानों की भूमिका को अभी भी आप नहीं समझे, तो आपको अपने अपने ईश्वर और अपने अपने अवतार मसीहा की भेड़ धंसान में निर्विकल्प अनंत समाधि मुबारक।

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