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कॉरपोरेट घरानों की बनेगी सरकार !

By   /  November 29, 2013  /  6 Comments

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-पलाश विश्वास।।

muku

आगामी लोकसभा चुनाव में जनादेश निर्माण प्रक्रिया में धर्मोन्मादी युद्धक राष्ट्रवाद को हम सारे लोग ध्रुवीकरण का मुख्य कारक मान रहे हैं और मीडिया ख़बरों के सर्वेक्षणों के ज़रिये भी यही चुनावी समीकरण साधे जा रहे हैं। परदे के पीछे लेकिन कुछ अलग खेल चल रहा है। जिससें आम और गरीब आदमी ना के बराबर ही वाकिफ़ होगा।हां ये वही आम और गरीब आदमी हैं जिनकी बातें करके अलग-अलग राजनीतिक दल अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकते हैं। मगर आम-गरीब की जगह चुनावों में कौन कितने दमख़म से उतरेगा इसका फैसला उद्योगपत्तियों का एक ‘ख़ास’ तबका करेगा। मतलब ये कि जो राजनीतिक दल रिलायंस जैसी कंपनियों के हित ज्यादा साधेंगे सिक्का उन्हीं का खनकेगा। यानी, धर्मोन्मादी पैदल सेनाएं (राजनीतिक दल) चाहे कुरूक्षेत्र में मोर्चा बंद हो गई हैं, लेकिन असली युद्ध तो लड़ रहे हैं आधुनिक युग के श्रीकृष्ण मुकेश अंबानी।

इंडिया इंक के विकल्प कोई अकेले नरेंद्र मोदी नहीं है और न राहुल गांधी हैं। ममता बनर्जी से लेकर मुलायम सिंह तक अनेक विकल्प हैं। सबको पूरे संसाधन दे रही है कॉरपोरेट और बहुराष्ट्रीय कंपनियां, विदेशी चंदे की सुनामी चल रहीं है। अब इंडिया इंक ‘कंपनी क़ानून’ में भी छूट का दबाव बना रही है। इंडिया इंक चाहती है कि किसी राजनीतिक दल को कितना चंदा दिया गया कंपनियों पर इसका खुलासा करने का दबाव न डाला जाए। एक तरह से भारत जैसे देश में जहां सत्ता समीकरण अक्सर बदलते रहते हैं वहां जनता-जनार्दन ने कोई अनचाहा फेरबदल कर दिया तो उनके कारोबारी हित सत्ता बदलने के बाद भी सुरक्षित रहें इसकी पूरी सुरक्षा की मांग की जा रहीं हैं। इंडिया इंक ने सरकार को संदेश दिया है कि प्रस्तावित नए कंपनी एक्ट में पॉलिटिक्ल फंडिंग के बारे में बताने का जो प्रावधान है उसे हटाया जाए। कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री(सीआईआई) ने सरकार को लिखकर गुहार लगाई है कि वह नए कंपनीज़ ऐक्ट के सेक्शन 182(3) में बदलाव करे।इस सेक्शन में कहा गया है कि कॉरपोरेट्स को उन पॉलिटिक्ल पार्टियों के नामों का खुलासा अपने प्रॉफिट ऐंड लॉस अकाउंट में करना होगा, जिन्हें वे चंदा देते हैं। इसके लिए रेप्रेजेंटेशन ऑफ पीपल ऐक्ट,1951 के सेक्शन 29ए के तहत रजिस्टर्ड इकाइयों को पॉलिटिक्ल पार्टियों के तौर पर परिभाषित किया गया है।

कॉरपोरेट घरानों के आगे सब नतमस्तक हैं

कॉरपोरेट घरानों के आगे सब नतमस्तक हैं

खैर, मंच से दलितों, शोषितों, दबे-कुचले गरीब वर्ग की हिमायत में अपने महान नेताओं के भाषण सुन कर होश में आए तो थोड़ा ध्यान यहां भी दे दीजिएगा। जो पूंजी इन्हें कुर्सी दिलवाने में सबसे अहम भूमिका निभाएगी बदले में अपना हिस्सा तो उसे लेना ही लेना है।यानी मंच से बेशक ये सारे नेता गरीबों के सबसे बड़े हमदर्द दिखते हो सच्चाई तो उनके सत्ता में आने के बाद फिर से हमारे सामने होगी। इस देश में सत्ता बनाने-बिगाड़ने के खेल में कॉरपोरेट घरानों की भूमिका को अभी भी आप नहीं समझे, तो आपको अपने अपने ईश्वर और अपने अपने अवतार मसीहा की भेड़ धंसान में निर्विकल्प अनंत समाधि मुबारक।

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6 Comments

  1. Dr.Ashok Kumar Tiwari says:

    बाजार केवल विदेशियों द्वारा नहीं अपने देश के पूँजीपतियों द्वारा भी नियंत्रित होता है महँगाई बढ़वाकर मुख्यमंत्री के गले में बाँहें डालकर अम्बानी फोटो भी खिंचवाते हैं जैसे गरीबों के मरने का जश्न मना रहे हों ………..

    नेताओं और पूँजीपतियों के गठबंधन के आगे जनता मजबूर है- पेट्रोल डीजल की कीमत बढ़वाकर महँगाई बढ़वा देना इनके बाएँ हाथ का खेल है गैस का दाम बढ़ाने पर सहमत न होने पर ये रेड्डी साहब जैसे प्रभावशाली मंत्री को रातोंरात हट्वा देते हैं फिर गरीब जनता की क्या औकात है वह जाए तो कहाँ जाए, एक ज्वलंत उदाहरण देखिए :- …………………….अंग्रेजी मानसिकता के प्राचार्य श्री सुंदरम के0 डी0 अम्बानी विद्यामंदिर रिलायंस टाउनशिप जामनगर से 20-26 साल के अनुभवी शिक्षकों को महज इसलिए निकलवा दिए हैं कि वे शिक्षक राष्टृभाषा- हिंदी के हैं और जब हिंदी दिवस (14सितम्बर 2010) के दिन सुंदरम ने माइक पर कहा था ” हिंदी राष्ट्रभाषा नहीं है हिंदी शिक्षक आपको गलत पढ़ाते हैं ” तो इन हिंदी शिक्षकों ने उनसे असहमति जताई थी …………………………………………………………..मुकेश अम्बानी की पत्नी नीता अम्बानी उस विद्यालय की चेयरमैन हैं — रिलायंस कम्पनी के के0 डी0 अम्बानी विद्यालय में भी अन्याय चल रहा है, 11-11 साल काम कर चुके स्थाई हिंदी टीचर्स को निकाला जाता है क्योंकि वे राष्ट्रभाषा हिंदी के हैं, तथा उसपर ये कहना कि सभी हमारी जेब में हैं रावण की याद ताजा कर देता है अंजाम भी वही होना चाहिए…. जय हिंद…! जय हिंदी……… !!!
    पाकिस्तान से सटे इस सीमावर्ती क्षेत्र में राष्ट्रभाषा – हिंदी वा राष्ट्रीयता का विरोध अत्यंत खतरनाक हो सकता है सभी सरकारें व संस्थाएँ चुप हैं शायद वे इस क्षेत्र को भी सरदार पटेल के समय का हैदराबाद या कार्गिल बनना देखना चाहते हैं !!!

  2. बिल्कुल सही कहा मित्र आपने !

  3. Dr.Ashok Kumar Tiwari says:

    जहाँ स्कूल प्रिंसिपल बच्चों को माइक पर सिखाते हैं ‌-” हिंदी राष्ट्रभाषा नहीं है, बड़ों के पाँव छूना गुलामी की निशानी है…………”
    सच कहा मित्र आपने – पूरे देश का वही हाल है- गुजरात के रिलायंस टाउनशिप में आज(11-4-13) को हैदराबाद के मूल निवासी मि.अकबर नाम के के.डी.अम्बानी विद्या मंदिर में कार्यरत एक फिजिक्स टीचर ने आत्महत्या कर लिया है, पर रिलायंस वाले उसे हाइवे की दुर्घटना बनाने में लगे हैं, आसपास की जनतांत्रिक संस्थाएँ रिलायंस की हराम की कमाई को ड्कार के सो रही हैं। शिक्षक जैसे सम्मानित वर्ग के साथ जब ये हाल है तो आम कर्मचारी कैसे होंगे ? आप सहज ही अनुमान लगा सकते हैं ।पहले भी एक मैथ टीचर श्री मनोज परमार का ब्रेन हैमरेज स्कूल मीटिंग में ही हो गया थ। मैंने पहले ही सावधान किया था पर किसी ने ध्यान नहीं दिया और 30 साल के एक नौजवान को हम बचा नहीं पाए सब उस कत्लखाने में चले आते हैं काश लोग लालच में न आते बात को समझ पाते………. पाकिस्तानी बार्डर के उस इलाके में जहाँ स्कूल प्रिंसिपल बच्चों को हिंदी दिवस के दिन माइक पर सिखाते हैं ‌-” हिंदी राष्ट्रभाषा नहीं है, बड़ों के पाँव छूना गुलामी की निशानी है, गाँधीजी पुराने हो गए उन्हें भूल जाओ, सभी टीचर अपनी डिग्रियाँ खरीद कर लाते हैं तथा आपके माँ-बाप भी डाँटें तो पुलिस में केस कर सकते हो।” असहमति जताने पर 11सालों तक स्थाई रूप में काम कर चुके आकाशवाणी राजकोट के वार्ताकार तथा सबसे पुराने योग्य-अनुभवी हिंदी शिक्षक/ शिक्षिकाओं व उनके परिवारों को बड़ी बेरहमी से प्रताड़ित करके निकाला जाता है। स्थानीय विधायकों, रिलायंस अधिकारियों के साथ-साथ धृतराष्ट्र की तरह अंधी राज्य सरकार भी बार-बार निवेदन के बावजूद भी कोई कार्यवाही नहीं करती है… हैं ना गाँधी जी के बंदर…और वे भी संसद की सबसे बड़ी कुर्सी के दावेदार ……… Contact For Detail :- 9428075674, [email protected]

  4. नक्सलवाद से कई गुना ज्यादा खतरनाक – "औद्योगिक आतंकवाद" की शिकार हिंदी भाषा – केवल यही नहीं प्रशिक्षित व चयनित आल इंडिया रेडियो राजकोट के हिंदी वार्ताकार हिंदी शिक्षकों तथा उनके परिवारों को रिलायंस टाउनशिप जामनगर गुजरात से महज इसलिए बेरहमी से उजाडा गया है क्योंकि वे हिन्दी प्रेमी भी हैं . ' पूरा का पूरा परिवार हिंदी विरोधी मानसिकता ' की भेंट चढ़ा दिया गया है , सभी जनतांत्रिक संस्थाएं मौन हैं शायद उनको सुनाने के लिए ………………………………………..

  5. Vande Matram says:

    cong bjp bhai bhai ……desh bech khai malai….

  6. अन्ना और बाबा रामदेव को ही नहीं पूरे देश को बी.जे.पी. ने धोखा दिया है, जिस समय कांग्रेस लूट रही है उस समय बी.जे.पी. ने रिलायंस वालों के कहने से मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाते हुए अन्ना और बाबा का साथ नहीं दिया क्यों ?

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