Loading...
You are here:  Home  >  मीडिया  >  Current Article

क्या तहलका बंद हो जाएगी…

By   /  November 29, 2013  /  3 Comments

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

तहलका की मैनेजिंग एडिटर शोमा चौधरी के इस्तीफे के बाद अब सवाल उठने लगे हैं कि क्या यह तहलका के अंत की शुरुआत है? अपनी सहकर्मी के यौन उत्पीड़न के मामले में फंसे तहलका के संपादक तरुण तेजपाल को बचाने के आरोप का सामना कर रहीं शोमा ने गुरुवार को अपने पद से इस्तीफा दिया था. इसके साथ ही पीड़त पत्रकार समेत कुल 7 पत्रकार पिछले 5 दिनों में तहलका से इस्तीफा दे चुके हैं. तहलका के बंद होने की आशंकाओं के पीछे चार बड़ी वजहें काम कर रही हैं.Tehelka

सबसे बड़ी और पहली वजह तो यह पूरा मामला ही है जिसके चलते तहलका के संपादक तरुण तेजपाल को इस्तीफा देना पड़ा. दूसरी बड़ी वजह है शोमा चौधरी का इस्तीफा. वरिष्ठ पत्रकार नीरजा चौधरी का कहना है कि शोमा का जाना मतलब एक संस्थान के रूप में तहलका के अंत की शुरुआत जैसा ही है. तीसरी वजह है तहलका को चलाने वाली कंपनी अनंत पब्लिकेशन के मालिक केडी सिंह का बयान, जिसमें उन्होंने कहा है कि वह तहलका का साथ छोड़ देंगे. उनका यह बयान तहलका के लिए और मुश्किलें खड़ी करने वाला है. तृणमूल कांग्रेस से राज्यसभा सांसद केडी सिंह अगर तहलका से अपना हाथ खींच लेंगे तो तहलका का बंद होना लगभग तय है. तहलका के बंद होने के कयासों के पीछे जो चौथी सबसे बड़ी वजह है वह है तहलका को होने वाला घाटा. जानकारी के मुताबिक साल 2011-12 में तहलका को साढ़े 10 करोड़ रुपए का घाटा हुआ था.

इन सबके अलावा फर्स्ट पोस्ट की खबर के मुताबिक तेजपाल और उनकी फैमिली के साथ शोमा पर तहलका के शेयर्स में भी गड़बड़ी के आरोप लगे हैं. आरोपों के मुताबिक तेजपाल और उनकी फैमिली ने गलत तरीके से शेयर बेचकर पैसे कमाए. शोमा चौधरी ने भी 5 हजार रुपये के शेयर से लाखों रुपये बना लिए. इस पूरे मामले में कांग्रेस मंत्री कपिल सिब्बल और बीजेपी के राम जेठमलानी का पैसा लगा होने की बात भी सामने आ रही है. वहीं सिब्बल का कहना है कि 80 प्रतिशत शेयर तो छोड़िए, उनके पास तहलका का एक भी शेयर नहीं है. उन्होंने सिर्फ 5 लाख रुपये चंदे के रूप में तहलका को दिए थे.

कपिल सिब्बल ने कहा, ‘सोशल मीडिया में एक और झूठ फैलाया जा रहा है. 2011 के रेकॉर्ड से साफ है कि तहलका के 80 फीसदी शेयर मेरे पास हैं. पर सच यह है कि मैंने आज तक तहलका से एक भी शेयर नहीं मांगा. न ही उन्होंने मुझे आज तक कोई शेयर सर्टिफिकेट दिया. इस तरह का झूठ फैलाना उचित नहीं है. इस काम में आरएसएस को महारथ हासिल है लेकिन सुषमा स्वराज इसका सहारा लेंगी यह नहीं पता था.’ उधर सुषमा स्वराज का कहना है कि उन्होंने तो प्रत्यक्ष तौर पर किसी का नाम नहीं लिया. कपिल सिब्बल खुद ही सफाई देने के लिए आगे आ गए तो इसे क्या समझा जाए.

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email
  • Published: 7 years ago on November 29, 2013
  • By:
  • Last Modified: November 29, 2013 @ 8:28 am
  • Filed Under: मीडिया

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

3 Comments

  1. Ashok Gupta says:

    har 1 ka ant hai is ka bhi ant aa gaya kisi na kisi rup me aana tha

  2. पर सिब्बल साहब ने पांच लाख रूपये चंदा किस ख़ुशी में दे दिया यह भी विचारणीय विषय है.आखिर कोई तो कारण होगा जिसके लिए वे यह चंदा देने को तैयार हो गए.या तो उन्होंने अपना कोई हित साधा , या फिर साधा जाना था.वैसे भी बिना कोई नाम लिए सिब्बल साहब इस बहस में क्यों कूद पड़े.जेठमलानी साहब के भी पैसा लगने की बातें हो रही हैं पर नाम न आने के कारण वह अभी तक चुप हैं.सम्भवतः धुआं है तो आग भी कहीं होगी.असल में केवल आर आर एस को बीच में लाने का कारण मुद्दे का राजनीतिकरण करना है. कांग्रेस का वरद हस्त तहलका पर है यह सभी जानते हैं,आज तक कांग्रेस के किसी भी नेता पर कोई भी आरोप लगाने से तहलका बचता रहा, बड़े बड़े घोटाले हो गए पर तहलका ने न कोई स्टिंग ऑपरेशन किया न कोई खोज की.यदि वह निष्पक्ष होता तो इतना सब होने के बाद चुप नहीं रहने वाला था.

  3. mahendra gupta says:

    पर सिब्बल साहब ने पांच लाख रूपये चंदा किस ख़ुशी में दे दिया यह भी विचारणीय विषय है.आखिर कोई तो कारण होगा जिसके लिए वे यह चंदा देने को तैयार हो गए.या तो उन्होंने अपना कोई हित साधा , या फिर साधा जाना था.वैसे भी बिना कोई नाम लिए सिब्बल साहब इस बहस में क्यों कूद पड़े.जेठमलानी साहब के भी पैसा लगने की बातें हो रही हैं पर नाम न आने के कारण वह अभी तक चुप हैं.सम्भवतः धुआं है तो आग भी कहीं होगी.असल में केवल आर आर एस को बीच में लाने का कारण मुद्दे का राजनीतिकरण करना है. कांग्रेस का वरद हस्त तहलका पर है यह सभी जानते हैं,आज तक कांग्रेस के किसी भी नेता पर कोई भी आरोप लगाने से तहलका बचता रहा, बड़े बड़े घोटाले हो गए पर तहलका ने न कोई स्टिंग ऑपरेशन किया न कोई खोज की.यदि वह निष्पक्ष होता तो इतना सब होने के बाद चुप नहीं रहने वाला था.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

Manisa escort Tekirdağ escort Isparta escort Afyon escort Çanakkale escort Trabzon escort Van escort Yalova escort Kastamonu escort Kırklareli escort Burdur escort Aksaray escort Kars escort Manavgat escort Adıyaman escort Şanlıurfa escort Adana escort Adapazarı escort Afşin escort Adana mutlu son

You might also like...

आखिर होगा क्या मज़दूरों का.?

Read More →
Eyyübiye escort Fatsa escort Kargı escort Karayazı escort Ereğli escort Şarkışla escort Gölyaka escort Pazar escort Kadirli escort Gediz escort Mazıdağı escort Erçiş escort Çınarcık escort Bornova escort Belek escort Ceyhan escort Kutahya mutlu son
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
WhatsApp chat
%d bloggers like this: