/इंटर्न का यौन उत्पीड़न करने वाले जज का नाम आया सामने ..

इंटर्न का यौन उत्पीड़न करने वाले जज का नाम आया सामने ..

 

एक न्यायाधीश पर लॉ इंटर्न के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित तीन सदस्यीय समिति ने अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश को सौंप दी है। इस रिपोर्ट में आरोपों के घेरे में आए पूर्व न्यायधीश एके गांगुली का बयान भी दर्ज है। इस मामले के सामने आने के बाद आरोपों से घिरे न्यायाधीश का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया था। ऐसा पहली बार है कि जज के नाम का खुलासा किया गया है।

हालांकि, एक राष्ट्रीय टीवी चैनल से बात करते हुए सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश रहे एके गांगुली ने उत्पीड़न के आरोप को सिरे से खारिज किया है। गांगूली ने कहा है कि वह पूरी तरह बेगुनाह हैं और हालात के शिकार हैं, मैंने अपनी ज़िंदगी में कई इंटर्न के साथ काम किया और वे सब आज अच्छी जगहों पर हैं। मैं उनसे अपने बच्चों की तरह बर्ताव करता हूं।

उन्होंने चैनल से कहा कि उनके मामले की तरूण तेजपाल से तुलना न की जाए। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित इस समिति के तीन सदस्यों ने छह बार बैठकें हो चुकी हैं।

क्या था मामला – 

एक युवा महिला इंटर्न ने अपने सेवानिवृत सर्वोच्च न्यायलय के एक न्यायाधीश पर यौन उत्पीड़न जैसा संगीन आरोप लगाया था। पीड़ित महिला ने कथित यौन उत्पीड़न की घटना के बारे में जर्नल ऑफ इंडियन लॉ एंड सोसायटी नाम के ब्लॉग पर 6 नवंबर को लिखा था। ब्लॉग में लिखा गया था कि पिछला दिसंबर देश में महिलाओं के हितों की रक्षा के आंदोलन के लिए महत्वपूर्ण था, क्योंकि देश की लगभग समूची आबादी महिलाओं के प्रति हिंसा के खिलाफ स्वत: ही खड़ी हो गई थी। यह अजीबो-गरीब विडंबना ही है कि दुनिया में हो रहे विरोध की पृष्ठभूमि में मेरा ऐसा अनुभव है।

दिल्ली में उस समय यूनिवर्सिटी में मेरे अंतिम वर्ष के शीतकालीन अवकाश के दौरान मैं इंटर्न थी। मैं अपने आखिरी समेस्टर के दौरान अत्यधिक प्रतिष्ठित, हाल ही में सेवानिवृत्त हुए उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के तहत काम कर रही थी। उनकी सहायता के लिए उनके पास पहुंचने के लिए मैंने अथक श्रम किया और पुलिस की बाधाओं को चकमा दिया।

मेरी कथित कर्मठता के पुरस्कार के रूप में मुझे यौन उत्पीड़न (शारीरिक नुकसान नहीं, लेकिन हनन करने वाले) से एक वृद्ध व्यक्ति ने पुरस्कृत किया, जो मेरे दादा की उम्र का था। मैं इस पीड़ादायक विवरण का जिक्र नहीं करूंगी, लेकिन इतना जरूरी कहूंगी कि कमरे से बाहर निकलने के काफी बाद तक मेरी स्मृति में वह अनुभव रहा और वास्तव में आज भी है।

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