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CO ने नौकरी दिलाने के नाम पर अस्मत लूटी…

गौरीगंज (अमेठी), मुसाफिरखाना सीओ ने नौकरी और शादी का झांसा देकर एक किशोरी के साथ लखनऊ के आलमबाग स्थित एक होटल में दुष्कर्म किया.rape (1)

आरोपी ने पीड़िता को नौकरी दिलाने के बहाने पहले कानपुर और फिर दिल्ली भेज दिया. किसी तरह लौटी किशोरी ने सोमवार को यहां एसपी से मिलकर आपबीती सुनाई.

एसपी के आदेश पर सीओ के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई है. महिला पुलिस ने पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया है. इस संबंध में सीओ ने रेप के आरोप को निराधार बताया. उन्होंने कहा कि किशोरी से फोन पर बातचीत होती थी. उन्होंने उसे कभी देखा तक नहीं है.

मुसाफिरखाना कोतवाली क्षेत्र की निवासी पीड़िता का आरोप है कि इसी सर्किल के सीओ वीके श्रीवास्तव ने नौकरी और शादी का झांसा देकर लखनऊ के आलमबाग स्थित एक होटल में 24 नवंबर को उसके साथ दुष्कर्म किया.

पीड़िता के अनुसार बीते दिनों उसके मोबाइल से सीओ के मोबाइल पर तब मिस्ड कॉल चली गई थी, जब वह अधिकारियों के नंबर फीड कर रही थी. इसके बाद सीओ का फोन आया और उन्होंने परेशानी पूछी. उसने बताया कि कोई परेशानी नहीं है.

मना करने के बावजूद सीओ लगातार उसे फोन करने लगे. पीड़िता की मानें तो सीओ ने उससे शादी करने और नौकरी दिलाने का वादा किया था. 23 नवंबर को सीओ ने फोन कर उसे लखनऊ बुलाया. वह 24 नवंबर की शाम लखनऊ पहुंची तो सीओ उसे किसी होटल में ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया.

सीओ ने उसे पहले कानपुर और फिर वहां से दिल्ली भेजा. दिल्ली में कुछ ठीक न लगने पर दूसरे दिन ही वह वापस कानपुर पहुंच गई.

सीओ ने उससे कहा कि वह अपने किसी परिचित के माध्यम से नौकरी ढूंढ ले बाद में वह व्यवस्था करेंगे. इसके एक-दो दिन बाद पुन: सीओ ने फोन कर कहा कि वह घर लौट आए और बयान दे कि वह स्वयं कहीं गई थी. ऐसा न करने पर सीओ ने उसके पिता व भाई को जान से मरवा देने की धमकी भी दी. पीड़िता ने पिता को फोन कर पूरी बात बताई और फिर पिता के साथ घर लौट गई.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.