/मजदूरों की ईएसआई पर डाका…

मजदूरों की ईएसआई पर डाका…

-सत्यदेव शर्मा ‘सहोड़’||
ऊना, कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआई) का लाभ पाने वाले प्रदेश के कामगारों को उनका भरपूर हक नहीं मिल पा रहा है. उद्योगों में ईएसआई के नाम पर कामगारों के पैसे या तो ठेकेदार अथवा उद्योगपति डकार रहे हैं. प्रदेश भर में ऐसे कई औद्योगिक घराने चल रहे हैं जो कर्मचारी राज्य बीमा निगम को अंशदान जमा ही नहीं करवाते हैं. इन उद्योगों में न तो कामगारों को इसकी सुविधा मिल पाती है और न ही उन्हें इस बारे कभी जागरूक किया जाता है.himachal industries

अभी भी प्रदेश के ऐसे कई उद्योग शामिल हैं, जिनमें कामगारों के लिए ईएसआई सुविधा नहीं दी जा रही है. प्रदेश में महज पांच हजार उद्योग में ईएसआईसी के तहत पंजीकृत है. इनमें दो लाख से अधिक कामगार पंजीकृत हैं. नियमानुसार हर उद्यमी को अपने हर पंजीकृत कामगार के वेतन का पौने दो फीसदी अंशदान के रूप में जमा कराना पड़ता है. लेकिन अधिकतर उद्योगों ने पैसा बचाने की खातिर ज्यादातर काम ठेकेदारी प्रथा से करवाया जा रहा है.
25 उ्रद्योगों पर जुर्माना
पिछले दिनों निगम की टीमों ने प्रदेश के विभिन्न औद्योगिक घरानों में छापेमारी भी की. इस दौरान टीमों ने ईएसआई न कटवाने वाले औद्योगिक घरानों का रिकॉर्ड अपने कब्जे में लिया. जांच के बाद ईएसआई का फंड नियमित जमा न करवाने वाले उद्योगों पर निगम ने भारी जुर्माना ठोका है. एक जानकारी के अनुसार ईएसआईसी ने प्रदेश के 25 उद्योगों पर करीब पांच लाख रुपए का जुर्माना ठोका है. इनमें बीबीएन, ऊना, मैहतपुर, कांगड़ा, शिमला, पांवटा साहिब व कालाअंब के उद्योग शामिल हैं.
मजदूर हितों का पूरा ख्याल
कर्मचारी राज्य बीमा निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक बीएस नेगी ने कहा कि प्रदेश में मजदूर हितों का पूरा ख्याल रखा जाएगा. उद्योगों की मनमानी सहन नहीं होगी. निगम को प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से कामगारों की ईएसआई जमा न करवाने की शिकायतें मिलीं, जिस पर कार्रवाई की गई है. निगम प्रदेश के उद्योग में कार्यरत कामगारों को अनेक सुविधाएं दे रहा है.
सरकार मजदूर हितैषी
उद्योग मंत्री मुकेश अग्रिहोत्री ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस सरकार पूरी तरह से मजदूर हितैषी है. प्रदेश में स्थापित उद्योगों में मजदूरों का पूर्ण ख्याल रखा जा रहा है. उल्लघंना करने वालों से सरकार सख्ती से निपटेगी. कांग्रेस सरकार ने प्रदेश में अनेक मजदूर हितैषी निर्णय लिए हैं. जिन औद्योगिक क्षेत्रों में ईएसआईसी सुविधा नहीं है, वहां जल्द यह सुविधा शुरू करवाई जाएगी.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.