/सुशासन के विधायक हैं या माफिया डॉन..

सुशासन के विधायक हैं या माफिया डॉन..

-तेजस्वी ठाकुर||

बिहार में भले ही सुशासन की बात कर रहे हो नीतीश कुमार लेकिन कैसा सुशासन और किस तरह का सुशासन चल रहा है. एक तरफ नीतीश कुमार अपने सरकार को सुशासन कह रही है तो दुसरी तरफ इन्ही के विधायक को करोड़ो की गाड़ियों के काफिले के साथ चलना  बेहद पसंद है. जिस तरह अभी के फिल्मों में एक ही रंग की गाड़ी एक ही मॉडल एवं ब्रांडेड कंपनी के गाड़ियों के साथ दर्जनों गाड़ियों के काफिले के साथ खलनायक एव नायक को देखने के लिए मिलता है. आज वैसा ही दृश्य में धरातल पर सुशासन बाबू के विधायक को देखने को मिल रहा है. यह विधायक है सुपौल के छातापुर के जदयु विधायक नीरज कुमार सिंह बबलू. विधायक जी जिस गाड़ी पर चढ़ते है उस गाड़ी की कीमत 28 लाख बताई जाती है. एक ही रंग की दर्जनों गाड़ियां विधायक के पीछे रहती है. ऐसा लगता है कि यह विधायक का नही बल्कि किसी फ़िल्मी डॉन का है. वैसे इनका रूतवा किसी मंत्री से कम नही है. विधायक के पास फार्चूनर गाड़ी है. इसी गाड़ी का काफिला उनके पीछे  चलता है.P1020117

सुशासन में बहुत सारे विधायक है, लेकिन इनके जैसा रूतबा और लहक-चहक किसी विधायक में देखने को नहीं मिलता है. विधायक सड़को पर चलते है तो ऐसा लगता है कि फिल्म के डॉन की तरह एक साथ विधायक जी के पीछे दर्जनों गाड़ियां और एक ही कलर जो कलर काले रंग की फार्चूनर गाड़ियों के साथ सड़कों पर देखने के बाद लोगों को फिल्मी स्टाइल याद आ जाती है. लेकिन विधायक जी की पसंद अजीबो गरीब है. जिस गाड़ी पर विधायक जी चढ़ते है उसी रंग की और एक ही कंपनी की अन्य सभी गाड़ियां उनके पीछे चलती है. यहां तक की अन्य विधायकों की तुलना में इन्हें कमांडो ट्रेन्ड बॉडीगार्ड मिले हुए है और विशेष सुरक्षाबल मिला है. वैसे इस विधायक को दबंग का भी तगमा मिला हुआ है.

हाल ही में लूट और हत्या के एक मामलें में कटिहार के अनुमंडल न्यायिक दण्डाधिकारी की अदालत में इस विधायक ने 8 सितम्बर को आत्म सर्म्पण किया. विधायक को एसडीजेएम अशोक कुमार न्यायिक हिरासत में लेते हुए जेल भेज दिया गया था. विधायक के ऊपर पंजाब नेशनल बैंक के जीप चालक दिनेश राम की हत्या कर बैंक से 5 लाख रूपये एवं हथियार लूट लेने का आरोप था. विधायक बनने के पूर्व वर्ष 2000 में उनके ऊपर पंजाब नेशनल बैंक बरैठा के केसियर इन्चार्य अमरदेव पंडित ने इस संबंध में फल्का थानें में दर्ज कराया था. पंडित ने दिये आवेदन में कहा था कि 2मई, 2000 को पी. एन. बी. की दौलत राम चौक शाखा से बक्शें में 5 लाख रूपये लेकर दिनेश राम पी.एन.बी. बरैठा जा रहा था बैंक की शाखा की दुरी चार किलोमीटर की दुरी पर मोटरसाईकिल सवार चार बादमाशों ने हथियार के बल पर जीप रूकवाकर चालक की हत्या कर रू0 और बंदुक लेकर फरार हो गया जब कि उस मामले में बैंक इनर्चाज अमरदेव पंडित ने अज्ञात अपराधियों के ऊपर मामला दर्ज कराया गया था. मामले के अनुसंधान के दौरान पुलिस ने विधायक नीरज कुमार बबलू, नार्थ लिबरेशन शंकर सिंह, बुल्ला सिंह और बरूण सिंह के ऊपर 27 अक्टुबर 2004 को चार्जशीट समर्पित किया था और इस मामले मे विधायक फरार चल रहे थे. लेकिन इस मामले में अन्य सभी आरोपी न्यायालय से बरी हो चुके थे. जिसमे विधायक को महीनों जेल मे रहना पड़ा.P1020120(

विधायक समर्थको का कहना है कि “विधायक के ऊपर यह झुठा आरोप लगाया गया है. लालू यादव सरकार चल रही थी तो यह मुकद्दमा अज्ञात लोगों के ऊपर दर्ज कराया गया था मगर अनुसंधान में बबलू सिंह एवं अन्य लोगों का नाम जुड़वाया गया था. राजद के सरकार में इस घटना में विधायक एवं अन्य लोगों को फसाया गया था.”

विधायक के पुर्व समय को देखते हुए नीतिश कुमार ने नीरज कुमार बबलू को पहली बार राधोपुर विधानसभा से तो दुसरी बार छातापुर से चुनाव लड़वाया गया ओर लगातार विधायक अपनी जीत बनाते रहे हे. ओर यहाँ तक की सुशासन बाबू यानि नीतिश कुमार के सब से करीबी विधायक है नीरज कुमार बबलू पर विशेष आर्शिवाद प्राप्त है. जब तक नीतीश कुमार का आर्शिवाद बबलू पर रहा न ही कोई पुराना मामलो खुला था लेकिन जदयु-भाजपा के गठबंधन के टुटने के साथ ही कुछ ही दिनों में पुराने मामलों में जेल चले जाने के पीछे एक गहरा राजनितिक साजिश दिख रहा है ऐसा लग रहा है कि छातापुर के विधायक से सुशासन बाबू आकोशित हैं भाजपा से गंठबंधन टुटने के साथ ही विधायक नीरज कुमार बबलू ने नीतिश कुमार से मंत्री पद माँग ली क्या? इसी कारण नीरज कुमार बबलू को पुराने मामले में जेल जाना पड़ा क्या? राजनीति के जानकारो का कहना है कि जब से नीतीश कुमार का गंठबंधन टुटा है और नीतीश कुमार को अपना समर्थन इकटठा करने में सहयोग करने वाले राजपूत खेमा के कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह के साथ दर्जनों राजपूत विधायको ने नरेन्द्र सिंह को सर्पोट करते हुए नीतीश की सरकार बचायी. जिसमें नरेन्द्र सिंह के साथ छातापुर के विधायक नीरज कुमार बबलू ने भी अपना सर्पोट दिया. जिसमे नरेन्द्र सिंह की मांग उपमुख्यमंत्री बनने की और छातापुर विधायक नीरज कुमार बबलू भी मंुत्री पद पाने की मंशा बनाए है. ओर भी सर्पोट करने वाले विधायक भी मंत्री पद पाने की लालसा पाले हुए है.  लेकिन नीतीश कुमार न ही मंत्री मंडल की विस्तार कर रहे है यदि नीतीश कुमार मंत्रीमंडल की विस्तार करते है तो सर्पोट करने वाले विधायक को मनचाहे पद नहीं मिलेगी तो नीतीश की सरकार गिरेगी और इसी कारण मंत्रीमंडल की विस्तार नहीं कर पा रहे है नीतीश कुमार. जब नीतीश कुमार की दिल्ली में अधिकार यात्रा हो रही थी तो वही दिल्ली में भाजपा के वरीय नेता की बैठक चल रही थी जिस बैठक में जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव के लोकसभा क्षेत्र मधेपुरा में बीजेपी के एक दमदार पहलमान की खोज हो रही थी. जिसमे छातापुर विधायक नीरज कुमार बबलू को भाजपा से लोकसभा क्षेत्र मधेपुरा में उन्हें उमीदवार बना कर शरद यादव को पटकनी देने की योजना बनी थी. वैसे जानकारो का कहना है कि नीरज कुमार बबलू को जदयु मे मंत्री पद नहीं मिलेगा तो इस बार जदयूं से नाता तोड़ भाजपा के मधेपुरा लोकसभा के उम्मीदवार होने की तैयारी में दिख रहे है. बबलू सिंह के जेल से निकलने के बाद से बबलू सिंह को बीजेपी के वरीय नेता बीजेपी में आने की न्योता दे रहे है. यही नहीं जब नीतीश कुमार की अधिकार यात्रा चल रही थी जिसमे खगड़िया में भारी हो-हंगामा हुआ जिसमे नीतीश कुमार को जान पर खतरा दिखा जिसमे उसके प्राण रक्षक रणवीर यादव बने थे तो वही सहरसा के अधिकार यात्रा के दौराण छातापुर के विधायक नीरज कुमार बबलू नीतीश के सुरक्षा कवच बने थे.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.