/क्या भाजपा 32 विधायक खरीद कर लाई है, आजतक भी बरगला रहा है..

क्या भाजपा 32 विधायक खरीद कर लाई है, आजतक भी बरगला रहा है..

-कमल पन्त||

दिल्ली आज तक के रिपोर्टर लक्ष्मी नगर के क्षेत्र के कुछ तथाकथित जागरूक नागरिको के पास पहुंचे कैमरा सैट किया, उन ख़ास आम आदमियों को कुर्सियों पर बैठाया. फिर आम आदमियों के बीच की बात शुरू हुई, जिसे शाम को टी वी पर मैंने भी देखा. मुझे याद है उनमे से एक को मैंने मादीपुर में देखा था. भाजपा के कैलाश सांखला के चुनाव प्रचार में. रिपोर्टर ने जब माईक उस आम आदमी के मुह पर लगाया. तो वह बोला कि “ये हमें बेवकूफ बना रहे हैं. हमने आम आदमी को चुना ताकि ये हमारी परेशानियों को सुने. लेकिन ये सरकार बनाने से पीछे हट रहे हैं. हमें और पार्टी से क्या मतलब हमने इनको वोट दिया है, इन्हें हमारे वोट की इज्जत रखनी चाहिए. अब तो ये खुद को शहंशाह समझने लगे हैं.”Harsh-Vardhan

रिपोर्टर ने बात दोहराई फिर दूसरे आम आदमी के पास चला गया. वो भी दबंग किस्म का लग रहा था शक्लो सूरत से. हो सकता है मेरा आब्जर्वेशन गलत हो लेकिन उसके हाव भाव से वो भी किसी पार्टी का समर्थक लग रहा था. उसने भी पूरी ताकत के साथ आम आदमी पार्टी को गलियाया. फिर कुछ और आम आदमी थे. उन्होंने भी ये परम्परा आगे बढ़ाई और अंत में निष्कर्ष निकला कि आम आदमी जनता को धोखा दे रही है क्योंकि वो सरकार नही बना रही.

“आप” पार्टी से कुछ सवाल मैंने भी पूछने है. वो सवाल एक वास्तविक आम आदमी के मुंह से सुनकर आया हूँ. जैसे कि चुनाव पहले इन्होने बिजली और पानी के बिलों की बात कही थी और बिजली के तार तक काटे थे. तो अब जब इन्हें चुन लिया है जनता ने तो क्या बिजली के बिल नही भरें? कुछ समय रुक जाए? इनके सरकार बनाने से मतलब नहीं पर इनकी राजनीति में हिस्सेदारी तो हो ही गयी है. तो कम से कम उन क्षेत्रों में तो बिजली पानी के बिलों में कटौती करवाई जा सकती है जहाँ जहाँ से ये जीते हैं.

खैर, अभी जुम्मा जुम्मा तीन चार दिन ही हुए है इसलिए इन्तजार करते हैं. इस पर फरवरी में बात करेंगे. अभी बात करते है ये दिल्ली आज तक के कार्यक्रम की, जिन्होंने बीजेपी और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के साथ बातचीत को असली आम आदमी की बात कहकर पेश किया. तो क्या ये सही है? बीजेपी ने आज सरकार बनाने से मना कर दिया और सब “आप को” देख रहे हैं. एक भाजपाई ने कमेन्ट मारते हुए कहा था कि ये सरकार क्यों नही बना रहे आखिर इन्हें जनादेश मिला है. तो क्या बीजेपी ने वोट खरीदे हैं? उन्हें जनादेश नही मिला? उनके 32 विधायक क्या खरीद के लाये गए हैं?

आप के पास सरकार बनाने का मौक़ा हो या ना हो पर खुद के वादे पूरे करने का मौक़ा है. उन्होने दिसम्बर में लोकपाल लाने का जो वादा किया था वो सरकार बनाकर पूरा कर सकते हैं. अगर बीजेपी विपक्ष में बैठकर बहुमत की मांग करती है तो ये उनकी हार होगी, आप की नही.

(कमल पन्त की फेसबुक वाल से)

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.