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नारायण साईं पांच करोड़ घूस दे केस कमजोर करवा रहा था…

By   /  December 14, 2013  /  3 Comments

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खुद को बचाने के लिए आसाराम का बेटा नारायण साईं हर पैंतरे अपनाने की कोशिश में है. खुद पर लगे रेप केस को कमजोर करने के लिए उसने पुलिस के साथ करोड़ों की डील करने की भी कोशिश की.narayan_sai

हालांकि इस योजना पर पानी फिर गया और पुलिस ने उसके पांच सहयोगियों व एक सब इंस्पेक्टर को धर दबोचा. ये सहयोगी सब इंस्पेक्टर की मदद से पुलिस, डॉक्टर व न्यायिक अधिकारियों को रिश्वत देकर केस को कमजोर करने की कोशिश में थे. पुलिस ने इनके पास से पांच करोड़ रुपये भी बरामद किए हैं.

पुलिस ने बताया कि बरामद रकम पुलिस, डॉक्टरों और न्यायिक अधिकारियों को रिश्वत देने के लिए थी. डीसीपी (क्राइम) शोभा भुटाडा ने कहा, ‘डिटेक्शन ऑफ क्राइम ब्रांच में तैनात पीएसआई सीके कुंभानी समेत नारायण साईं के पांच सहयोगियों को हिरासत में लिया गया है. ये लोग केस कमजोर करने के लिए रिश्वत देने के प्रयास में थे.’

उन्होंने बताया कि साईं के सहयोगी उदय संघानी से करीब एक करोड़ रुपये और केतन पटेल से चार करोड़ रुपये नकद बरामद हुए हैं. पटेल एक रियल इस्टेट डेवलपर है.

पुलिस ने बताया कि कुंभानी पर आरोप हैं कि उसने पैसों की मांग की थी और वादा किया था कि वह अन्य पुलिस अधिकारियों, डॉक्टरों व न्यायिक अधिकारियों तक यह पैसा पहुंचाकर केस को कमजोर कर देगा. रेप केस के आरोपी नारायण साईं को गत चार दिसंबर को दिल्ली पुलिस ने हरियाणा बॉर्डर से गिरफ्तार किया था.

याद रहे कि सूरत की दो बहनों ने नारायण साईं और उसके पिता आसाराम पर रेप का आरोप लगाया है. इनमें से छोटी बहन की शिकायत पर पुलिस ने नारायण पर रेप, अप्राकृतिक यौन शोषण, बंदी बनाना समेत कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है.

शिकायत में कहा गया है कि 2002 से 2005 तक सूरत आश्रम में नारायण ने उसके साथ रेप किया. जबकि बड़ी बहन ने रेप के एक अन्य मामले में जोधपुर जेल में बंद आसाराम के खिलाफ 1997 से 2006 तक कई बार रेप करने का आरोप लगाया है.

(एजेंसी)

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  • Published: 4 years ago on December 14, 2013
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  • Last Modified: December 14, 2013 @ 8:17 am
  • Filed Under: अपराध

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

3 Comments

  1. mahendra gupta says:

    अभी तो बहुत कुछ सामने आना बाकी है.परत दर परत राज खुलेंगे तब ही इन ढॉंगीओं के कारनामे सामने आयेंगे, पर उन भक्तों की बुद्धि पर तरस आता है जो इतना सब ज्ञात हो जाने पर भी अंधभक्ति पाले हुए हैं.

  2. अभी तो बहुत कुछ सामने आना बाकी है.परत दर परत राज खुलेंगे तब ही इन ढॉंगीओं के कारनामे सामने आयेंगे, पर उन भक्तों की बुद्धि पर तरस आता है जो इतना सब ज्ञात हो जाने पर भी अंधभक्ति पाले हुए हैं.

  3. etnia badia sajias nrayan saeya ko bhagwan kabhia mafa nhia kryaga dharm ko duba diya nrayan saeya dhartia mata ko etna pda kiwadarhya hia

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