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कमजोर टीआरपी की भेंट चढ़े आज तक के सीईओ

By   /  September 2, 2011  /  3 Comments

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इंडिया टीवी की टीआरपी को नहीं पछाड़ पाने के कारण आजतक के सीईओ जी कृष्णन को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। मालिक अरूण पुरी ने इसकी औपचारिक सूचना संस्थान को दे दी है। कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले दिनों में इंडिया टीवी का टीआरपी कुछ और विकेट ले सकता है।

आजतक पिछले काफी दिनों से अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रहा था। इसका ठीकरा किसी न किसी पर फूटना तय माना जा रहा था और जी कृष्णन चर्चा के केन्द्र में थे। कंटेंट में प्रतिस्पर्द्धा से जोड़ कर देख रहे लोग इसे एक प्रत्याशित घटना मान रहे हैं। इसका एक कारण यह भी बताया जा रहा है कि टीआरपी के अवरोह से कंपनी का बिजनेस चौपट हो रहा था और पिछले कई हफ्तों से यह लगातार दूसरे पायदान पर जमा हुआ था। जिसे बिजनेस में सही नहीं माना जाता है।

हालांकि अन्ना आंदोलन के आशीर्वाद से आजतक हाल में पहले पायदान पर आ गया था लेकिन जानेवाले को कोई नहीं रोक सका है। इसके उलट अन्ना की आंधी में इंडिया टीवी का टीआरपी सेंसेक्स की तरह औंधे मुंह गिर कर चार नम्बर आ गया था।

इधर जी कृष्णन की विदाई से एक आजतक में एक चुप्पी छा गई है जो आनेवाले किसी बड़े तूफान की ओर इशारा कर रही है।

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

3 Comments

  1. jagdish says:

    या तो चैनल चलाओ या फिर बिज़नस …….. दोनों साथ नहीं चल सकते ..ये बात अभी तक समझ नहीं आई !!

  2. सचिन म्हैसकर says:

    जो भी हो “आज तक” चैनल ने हिंदुस्तान नाम का देश दुनिया में खोज निकाला है|उनके एंकर भारत का नाम अपनी जुबान से लेना गोबर खाने के समान मानते है|जब मालिक हिंदुत्ववादी बिजनैसमैन हो तो यही होगा|इस घटना को मतलबी भेडिये के झुंड को किसी दुसरे भेडिये ने हथिया लेने की उपाधि सही रहेगी|

  3. Shabi haider says:

    आजतक वाले या तो चैनल चला ले या फिर अपने मीडिया इंस्टीयूट से पढ़कर निकले लोगों को पत्रकार बना दे. पत्रकार पैदाइशी होता है उसे किसी फैक्ट्री में बनाया नहीं जा सकता हां इंस्टीटयूट में उसको शाइन किया जा सकता है. ऐसे लोग पत्रकार बन रहे हैं जिन्हें खबरों की एबीसीडी नहीं आती. पांच से छ लाख रुपए में इलेक्ट्रानिक मीडिया में पत्रकार बनाए जा रहे हैं. मुझे इस बात का एहसास बहुत पहले हो गया था कि आजतक के दिन गुजर चुके हैं. यही हाल रहा तो आजतक और दूदर्शन में कोई फर्क नहीं रह जाएगा.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

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