/लोकतंत्र की बयार…

लोकतंत्र की बयार…

-दौलत सिंह नेगी||

दो तीन दिन पहले बी जे पी के एक सपोर्टर ने आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं के एक दल से आम आदमी पार्टी द्वारा सरकार न बनाये जाने पर कटाक्ष किया प्रत्युत्तर में मैंने उन महानुभाव से जब यह कहा कि भई सरकार तो कोई भी बनाये लेकिन असली लोकतंत्र की खुशबू तो आने ही लगी है! वे अनमने से मेरी तरफ देखने लगे और मैंने उन्हें आगे बताया कि एक आम आदमी किसी राजनीतिक पार्टी के कार्यकर्ताओं से अपने भविष्य के लिए प्रश्न तो पूछने लगा है क्या इससे पहले कोई आम आदमी इन कार्यकर्ताओं से इस प्रकार प्रश्न पूछने की हिम्मत कर सकता था क्या? क्या अब सचमुच लोकतंत्र की बयार बहने लगी है?delhi assembly

लेकिन कैसे आइये जाने ! जब जनता जनार्दन ने बीजेपी के सबसे अधिक विधायकों को जिता कर विधान सभा में भेजा तो वहीं सबसे पहले सरकार बनाने के दावेदार होनी चाहिए थी और इसमें कोई अजूबा था भी नहीं उप राज्यपाल ने भी सबसे बडे दल को ही सरकार बनाने के लिए आमन्त्रित किया। परन्तु बीजेपी ने उप राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने में असमर्थता ब्यक्त कर दी. क्या आजादी के बाद से आज तक ऐसा कहीं हुआ है कि सबसे बडा दल सरकार बनाना ही नहीं चाहता. हा यह सही है कि बीजेपी को भी पूर्ण बहुमत नहीं मिला है लेकिन बीजेपी अल्पमत की सरकार तो बना ही सकती थी लेकिन तब जब कि विपक्ष में कोई और होता यहा तो सामने हैं अरविन्द केजरीवाल! ये वही केजरीवाल हैं जिन्होंने बिना राजनीतिक ताकत के नितिन गडकरी को दुबारा से बीजेपी अध्यक्ष बनने ही नहीं दिया वही गडकरी जी अब दिल्ली में बीजेपी के प्रभारी हैं. बीजेपी का हाल तो यह हो गया है कि सौ-सौ चूहे खा कर बिल्ली हज को चली. ऐसे हालात में जबकि देश में राजनीति एक ऐसा ब्यवसाय बन गयी है जिसमें की लाभ ही लाभ है. बीजेपी विधायक दल के नेता डा हर्षवर्धन जी साफ कह रहे हैं कि बीजेपी खरीद फरोख्त की राजनीति में विश्वास नहीं करती. क्या इससे पहले इन पार्टियों का ऐसा जवाब होता था  क्या नहीं आ रहा असली लोकतंत्र.

अब जब बीजेपी सरकार बनाने से मना कर आयी तो कांग्रेस और बीजेपी ने शकुनि की चालें चलनी शुरु कर दी. कांग्रेस ने अपनी इनोवा टीम को आम आदमी पार्टी को बिन मागे समर्थन देने का ऐलान कर दिया क्योंकि वे इतनी कम सीट जीतने के बावजूद सत्ता सुख से वंचित नहीं रहना चाहते हैं. कांग्रेस का इतना कहना था कि बीजेपी भला क्यों पीछे रहती. पहले तो उसने आप पर आरोप लगाया कि हम न कहते थे कि आप कांग्रेस की बी टीम है और साथ ही बीजेपी ने भी ऐलान कर दिया कि वह विपक्ष में बैठकर आप को अपना पूर्ण रचनात्मक सहयोग देगी.

बिन मागे समर्थन और रचनात्मकता पर जब आप ने जब इन दलों के अध्यक्षों को 18 प्रश्नों की प्रश्नावली भेजी तो दोनों दल एक जैसी भाषा पर उतर आये इन्होंने ऐसा नहीं सोचा था हालात दोनों के खिसियानी बिल्ली खम्भा नोंचे जैसे हो गये.

ऐसा पहली बार हो रहा है कि विधान सभा में दूसरे नम्बर पर आये दल को सरकार बनाने के लिए बाध्य किया जा रहा है. क्या जनता इतना नहीं समझती कि बीजेपी क्यों सरकार बनाने से भाग रहीं है यदि उसको दिल्ली की जनता की इतनी चिन्ता होती और वह सचमुच चाहती कि जनता पर पुनः चुनाव का बोझ न पडे तो उसको दिल्ली में सरकार बनानी चाहिए थी, लेकिन इनकों जनता से कोई लेना देना नहीं है. तभी तो आप के 18 प्रश्नो का उत्तर देना भी उसे मुनासिब नहीं लगा. कांग्रेस ने भी अध्यक्ष को लिखे पत्र का जवाब उसके महासचिव श्री शकील अहमद के द्वारा दिया जा रहा है.

आम आदमी पार्टी अपनी जिम्मेदारियों से नहीं भागना चाहती इसीलिए जब बीजेपी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने में नाकाम रही तो आप ने लोकतांत्रिक विधि से ही जनता जनार्दन से पूछा है कि वही अब बताये कि उसे सरकार बनानी चाहिए अथवा नहीं क्या ये लोकतंत्र की विजय नहीं है. हाँ, आप भी याद रखे तथा सरकार बनाने के लिए अपनी सहमति अथवा असहमति फोन नं 08806110335 पर जरुर भेंजे.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.