/50 वर्षीय शिक्षक ने 10वीं की छात्रा को भेजा प्रेम पत्र…

50 वर्षीय शिक्षक ने 10वीं की छात्रा को भेजा प्रेम पत्र…

पुणे की ग्रामीण पुलिस ने 50 साल के एक टीचर को दसवीं क्लास में पढ़ने वाली स्टूडेंट को 8 पन्नों का लव लेटर भेजने के आरोप में अरेस्ट किया गया है. इस टीचर ने लेटर के साथ लड़की के लिए 5 हजार रुपये भी रखे थे और लिखा था कि वह इससे अपने लिए गिफ्ट खरीद ले.love_letter

मामले की जांच कर रहे पुलिस सब-इंस्पेक्टर शिवाजी दारेकर ने बताया कि लेटर दिसंबर के पहले हफ्ते में भेजा गया था. 50 साल के टीचर भानुदास शिंगड़े ने होमवर्क चेक करने के लिए दसवीं क्लास के सभी स्टूडेंट्स की नोटबुक्स लीं. चेक करने के बाद सभी नोटबुक्स लौटा दी गईं, लेकिन लड़की ने देखा कि उसकी नोटबुक पर कवर लगा है. जब उसने कवर हटाकर नोटबुक खोली तो उसके अंदर लेटर और कैश था. यह लेटर पढ़कर वह हैरान रह गई. टीचर ने लेटर में लिखा था कि वह उसे बहुत प्यार करता है और जब वह स्कूल नहीं आती तो उसके लिए बच्चों को पढ़ाना बहुत मुश्किल हो जाता है.

पुलिस के मुताबिक शिगड़े ने इस लेटर में शायरी भी लिखी थी. जांच अधिकारी दारेकर ने बताया, ‘लेटर में लिखा था कि लड़की अपने पैरंट्स को बताए कि उसे 5000 रुपये रास्ते में पड़े मिले थे.’ लड़की इस लेटर को पढ़ने के बाद सीधे स्कूल प्रिंसिपल के पास पहुंची और उसने उन्हें लेटर और कैश दिखाया. उन्होंने तुरंत लड़की के पैरंट्स को बुलाया और मामले की जानकारी दी. लड़की के पिता ने 5 दिसंबर को पुलिस में शिकायत दर्ज की. स्कूल प्रशासन ने टीचर को सस्पेंड कर दिया है.
दारेकर ने बताया कि टीचर ने अग्रिम जमानत याचिका के लिए आवेदन किया था, ऐसे में उसे तुरंत गिरफ्तार नहीं किया गया. 17 दिसंबर को कोर्ट ने यह याचिका रद्द कर दी. इसके बाद पुलिस ने शिगड़े को छेड़छाड़ के लिए आईपीसी की धारा 354( A) और पोक्सो ऐक्ट की संबंधित धाराओं के तहत अरेस्ट कर लिया. इसके बाद इस टीचर को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे 24 दिसंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.