/मध्य प्रदेश का सूचना केंद्र या भाजपा का अपना पीआईबी कार्यालय?

मध्य प्रदेश का सूचना केंद्र या भाजपा का अपना पीआईबी कार्यालय?

-लिमटी खरे।।

  • सुषमा स्वराज की पीआर में जुटा एमपी जनसंपर्क का दिल्ली कार्यालय
  • सरकारी विज्ञप्तियों की बजाए सांसदों की विज्ञप्तियों में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहा है सूचना केंद्र
  • सेवानिवृत्ति के पहले मलाईदार पद सुनिश्चित करना चाह रहे मुलाजिम!

राजधानी दिल्ली के पॉश इलाके कनॉट प्लेस की बाबा खड़क सिंह मार्ग पर एम्पोरिया हाउस स्थित मध्य प्रदेश सरकार के जनसंपर्क विभाग का सूचना केंद्र पिछले कुछ दिनों से पत्रकारों के बीच चर्चा का केंद्र बना हुआ है। मध्य प्रदेश सरकार की इमेज बिल्डिंग, सरकारी नीतियों रीतियों एवं सरकार की कार्यप्रणाली को मीडिया तक पहुंचाने के लिए पाबंद यह कार्यालय पिछले एक साल से अपने मुख्य काम से हटकर सांसद विधायकों की सेवा टहल में लगा हुआ है जो कि शोध का विषय भी बन गया है।Sushma Swaraj

शुक्रवार 2 सितम्बर को मध्य प्रदेश के विदिशा से सांसद एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष श्रीमति सुषमा स्वराज के नेतृत्व में भाजपाई सांसदों ने भ्रष्टाचार समाप्त करने और विशेष न्यायालय विधेयक तथा आतंकवादी अधिनियम को स्वीकृति देने की मांग करते हुए महामहिम राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा।

एमपी सूचना केंद्र द्वारा भेजे गए आधिकारिक समाचार में कहा गया है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं मध्यप्रदेश की सांसद श्रीमती सुषमा स्वराज के नेतृत्व में मध्य प्रदेश के सांसदों ने राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा देवीसिंह पाटिल से भेंट की और उनसे मध्यप्रदेश के सात लंबित विधेयकों को स्वीकृति देने का आग्रह किया। मध्यप्रदेश के सांसदों ने राष्ट्रपति को एक ज्ञापन दिया जिसमें मध्यप्रदेश के सात लंबित विधेयकों की सूची दी गयी।

समाचार में आगे कहा गया है कि राष्ट्रपति महोदया से आग्रह किया गया कि वे मध्यप्रदेश विशेष न्यायालय विधेयक 2011 को शीघ्र स्वीकृति प्रदान करें जिसमें प्रदेश में भ्रष्टाचार से निपटने के लिए शासकीय सेवकों के खिलाफ कारगर ढंग से कार्रवाई की जा सकेगी। इस विधेयक के अंतर्गत भ्रष्ट शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा इकट्ठा की गयी सम्पत्ति को सरकार राजसात कर सकेगी और उस सम्पत्ति को सार्वजनिक सेवाओं में उपयोग कर सकेगी। इससे पारदर्शी प्रशासन की स्थापना में मदद मिलेगी। इसी प्रकार आतंकवाद और संगठित अपराध से निपटने और उसके प्रभावी नियंत्रण के लिए मध्यप्रदेश आतंकवादी एवं उच्छेदक गतिविधियां तथा संगठित अपराध नियंत्रण विधेयक 2010 भी लंबित है।

यह विधेयक स्वीकृत हो जाने से प्रदेश में आतंकवाद और संगठित अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा। मध्यप्रदेश गौवंश वध प्रतिषेध संशोधन विधेयक 2010 भी लंबित है। इस विधेयक के लागू हो जाने पर गौवध पर पूरी तरह से बंदिश लगायी जा सकेगी। मध्यप्रदेश के छतरपुर में महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की स्थापना के संबंध में मध्यप्रदेश विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक 2011 भी लंबित है। इन विधेयकों के अलावा तीन और अन्य विधेयक स्वीकृति के लिए लंबित हैं जिन्हें शीघ्र स्वीकृति प्रदान की जाए।

मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग के दिल्ली स्थित एमपी सूचना केंद्र की खबर में आगे कहा गया है कि श्रीमती स्वराज ने राष्ट्रपति महोदया का ध्यान आकर्षित किया कि भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए मध्यप्रदेश विशेष न्यायालय विधेयक 2011, बिहार द्वारा बनाये गये विशेष न्यायालय अधिनियम 2009 के अनुरूप है जिसे राष्ट्रपति महोदया द्वारा अनुमति दी जा चुकी है। इसलिए मध्यप्रदेश के इस विधेयक को भी अनुमति दी जाय।

राष्ट्रपति महोदया से भेंट करने वाले भारतीय जनता पार्टी के सांसदों में   श्री प्रभात झा, श्री कैलाश जोशी, श्री नरेन्द्र सिंह तोमर, श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया, श्री विक्रम वर्मा, श्री कप्तान सिंह सोलंकी, श्री गणेश सिंह, श्री रघुनंदन शर्मा, श्री मेघराज जैन, श्रीमती माया सिंह, श्री चंदन मित्रा, श्री नारायण सिंह केसरी, सुश्री अनुसुइया उइके, श्री अनिल माधव दवे, श्री वीरेन्द्र कुमार, श्री अशोक अर्गल, श्री राकेश सिंह, श्री गोविंद मिश्रा, श्री भूपेन्द्र सिंह, श्रीमती ज्योति धुर्वे, श्री के.डी. देशमुख, श्री माखन सिंह और श्री शिवराज भैया शामिल थे।

यहां उल्लेखनीय होगा कि मध्य प्रदेश सरकार के जनसंपर्क विभाग का काम मध्य प्रदेश सरकार से संबंधित खबरों का प्रचार प्रसार करना है ना कि किसी पार्टी विशेष की राजनैतिक गतिविधियों का प्रचार प्रसार करना। अगर मामला सांसदों से संबंधित है तो इसके लिए केंद्र सरकार के सूचना प्रसारण मंत्रालय का पत्र सूचना कार्यालय जवाबदेह माना जा सकता है। इस तरह के मामलों में भाजपा शासित मध्य प्रदेश सरकार के इस कार्यालय द्वारा भाजपा के सांसदों की राजनैतिक गतिविधियों को जारी करने का औचित्य समझ से परे ही है।

गौरतलब है कि इसके पहले भी राज्य सरकार के जनसंपर्क विभाग के दिल्ली कार्यालय द्वारा पूर्व में भारतीय जनता पार्टी के अनुषांगिक संगठनों की विज्ञप्तियों का वितरण एवं समाचार छापने के लिए मीडिया पर दवाब बनाए जाने के आरोप लगते रहे हैं। कुछ दिनों पूर्व तो विभाग ने हद ही कर दी जब किसी निजी कलाकार जो कि जनसंपर्क विभाग के आला अधिकारी के परिजन थे, की कला प्रदर्शनी का समाचार भी इस कार्यालय द्वारा आधिकारिक तौर पर जारी कर दिया गया था।

इस कार्यालय पर आरोप लगते रहे हैं कि यहां से भाजपा के पार्टी स्तर के कार्यक्रमों की प्रेस विज्ञप्ति को प्रसारित किया जाता है। बताया जाता है कि मीडिया के लिए निर्धारित वाहनों को पत्रकारों को उपलब्ध न कराकर यहां पदस्थ अधिकारियों द्वारा इन्हें एमपी से आने वाले सांसदों व विधायकों की सेवा टहल के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
पिछले दिनों सूचना केंद्र द्वारा जारी सरकारी विज्ञप्तियों को देखकर मध्य प्रदेश को कवर करने वाले पत्रकार असमंजस में पड़ गए कि यह सरकारी कार्यक्रम था या पार्टी स्तर का प्रोग्राम। हाल ही में जनसंपर्क मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा नई दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी शासित राज्यों के शिक्षा मंत्रियों के एक सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचे। ‘शिक्षा का ध्येय समग्र विकास‘ शीर्षक से आयोजित इस राष्ट्रीय सम्मेलन में जनसंपर्क मंत्री शर्मा के द्वारा दिए गए भाषण को मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग के सूचना केंद्र ने बाकायदा प्रेस नोट बनाकर जारी किया। इसकी तस्वीरें भी विभाग द्वारा जारी की गईं।

उस दरम्यान गुजरात सूचना केंद्र के एक अधिकारी ने इस बारे में आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि यह पार्टी का कार्यक्रम था इसकी विज्ञप्ति सरकारी तौर पर जानी नहीं की जानी चाहिए थी। इतना ही नहीं, इसके उपरांत दिल्ली में मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग के एक आला अधिकारी के रिश्तेदार की कला की प्रर्दशनी का आयोजन किया गया। इस प्रदर्शनी की खबर को भी मध्य प्रदेश सूचना केंद्र द्वारा सरकारी स्तर पर जारी कर दिया गया।

मजे की बात तो यह है कि जनसंपर्क विभाग के दिल्ली कार्यालय द्वारा इन दोनों ही गैर सरकारी कार्यक्रमों की विज्ञप्तियों को मध्य प्रदेश सरकार के जनसंपर्क विभाग ने न तो सरकारी तौर पर बांटा और न ही सरकारी वेब साईट में अपलोड किया। दोनों ही कार्यक्रमों की पब्लिसिटी से जनसंपर्क संचालनालय ने पर्याप्त दूरी बनाकर रखी गई जिससे साबित हो जाता है कि दिल्ली स्थित मध्य प्रदेश सूचना केंद्र द्वारा इस तरह के निजी कार्यक्रमों विशेषकर पार्टी बेस्ड प्रोग्राम्स की पब्लिसिटी में ज्यादा दिलचस्पी ली जा रही है।

मध्य प्रदेश की जनता के गाढ़े पसीने की कमाई से वसूले गए करों से वेतन पा रहे मध्य प्रदेश सूचना केंद्र के सरकारी अफसरान द्वारा सरकार के कार्यक्रमों को छोड़ भारतीय जनता पार्टी और जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों के रिश्तेदारों की चौखटों पर माथा रगड़कर उनकी पब्लिसिटी करवाने की बात दिल्ली में मीडिया के गलियारों में तरह तरह की शक्ल अख्तियार कर चुकी है।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.