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आप के बगावती सुर नरम पड़े…

By   /  December 25, 2013  /  No Comments

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दिल्ली की लक्ष्मी नगर विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी विधायक विनोद कुमार बिन्नी के बगावती सुर नरम पड़ने से सरकार गठन से पहले ही गलफत में पड़ी “आप” को राहत मिल गई है. मंत्रियों की सूची में अपना नाम न पाकर बिन्नी के केजरीवाल के घर से नाराज होकर निकलने के बाद “आप” के बड़े नेता मंगलवार देर रात तक डैमेज कंट्रोल करने में जुटे रहे.Vinod Kumar Binni

“आप” नेता कुमार विश्वास और संजय कुमार मंगलवार देर रात बिन्नी के घर पहुंचे. तीनों के बीच लगभग 3 घंटे तक बातचीत का दौर चला. जिसके बाद बिन्नी के बगावती सुरों में नरमी के संकेत दिखाई दिए और उन्होंने मीडिया से कहा कि वे पार्टी से नाराज नहीं थे और उनका मंत्रीपद को लेकर कोई मतभेद नहीं है.

उल्लेखनीय है कि मंगलवार रात को केजरीवाल सरकार में मंत्री पद को लेकर बगावत हो गई थी. पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति द्वारा मंत्री पद के लिए छह विधायकों के नाम तय किए जाने के बाद बिन्नी नाराज हो गए थे. उनका नाम प्रस्तावित सूची में नहीं था, जिसके बाद वह बैठक का बहिष्कार करके बाहर निकल आए. बाहर निकले के बाद उन्होंने कहा था कि वह बुधवार सुबह मीडिया के समक्ष अपनी बात रखेंगे और कोई बड़ा खुलासा करेंगे. बिन्नी ने हालिया चुनाव में कांग्रेस सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे एके वालिया को हराया था. वह दो बार पार्षद भी रह चुके हैं.

“आप” के छह संभावित मंत्रियों में सौरभ भारद्वाज, राखी बिरला, सोमनाथ भारती, सत्येंद्र जैन, गिरीश जोशी तथा मनीष सिसोदिया के नाम शामिल है जो केजरीवाल के साथ शपथ लेंगे.

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  • Published: 4 years ago on December 25, 2013
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  • Last Modified: December 25, 2013 @ 9:57 am
  • Filed Under: राजनीति

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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