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चीन को भारत का कड़ा संदेश, जापान के पीएम होंगे गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि..

By   /  December 26, 2013  /  1 Comment

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हरेश कुमार||

दक्षिण-एशिया में चीन की बढ़ती महात्वाकांक्षा पर रोक लगाने के लिए भरत ने नए साल पर उसे कड़ा संदेश देने के लिए एक नई कूटनीतिक पहल की है. भारत के गणतंत्र दिवस के अवसर पर प्रति वर्ष किसी न किसी देश के राष्ट्राध्यक्ष को मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल किया जाता रहा हैं. इस वर्ष जापान के पीएम मुख्य अतिथि के तौर पर इस समारोह की शोभा बढ़ायेंगे. गणतंत्र दिवस के अवसर पर भारत अपनी सैन्य क्षमताओं का विश्व के सामने प्रदर्शन करता है, जापान के पीएम को इससे पहले अतिथि होने का गौरव प्राप्त नहीं हुआ है. लेकिन भारत ने अरुणाचल प्रदेश के लोगों को चीन की कम्युनिस्ट सरकार के द्वारा नत्थी वीजा देने और लद्दाख की सीमा पर बार-बार अतिक्रमण करने से बाज नहीं आने के बाद उसे नए सिरे से घेरने का निर्णय लिया है.India-China1

सभी को मालूम है कि जापान और चीन के रिश्तों में किस तरह की कड़वाहट घुल चुकी है. हाल के दिनों में तो इसमें और ज्यादा बढ़ोतरी देखने को मिला है. चीन ने दक्षिणी चीन सागर में स्थित द्वीप पर अपनी नजरें गड़ा दी है, जिस पर अभी जापान का अधिपत्य है. चीन ने इस क्षेत्र पर अधिकार के लिए सैन्य गतिविधियों में तेजी ला दी है. इसकी निंदा अमेरिका व दक्षिण कोरिया सहित अन्य देशों ने भी की है.

भारत सरकार के अनुसार, जापान के पीएम, शिंजो आबे गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि होंगे. इससे पहले जापान के रक्षा मंत्री इत्सुनोरी आनोदेरा जनवरी के पहले सप्ताह में यहां आयेंगे. उनके दौरे पर भारत और जापान के बीच कई समझौतों पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है. गौरतलब है कि भारत और जापान के बीच पिछले कुछ सालों में रणनीतिक संबंधों में बढ़ोतरी देखने को मिला है.

इससे पहले, जापान के सम्राट अकीहितो और साम्राज्ञी मिशिको 30 नवंबर से 5 दिसंबर तक भारत की यात्रा पर आए थे. किसी भी दक्षिण-एशियाई देश की यह उनकी पहली यात्रा थी. भारत के प्रधानमंत्री, मनमोहन सिंह इस वर्ष मई में जब जापान के दौरे पर गए थे तो वहां के सम्राट को भारत आने का न्यौता दिया था. भारत यात्रा के दौरान जापानी सम्राट और साम्राज्ञी का भारत में भव्य स्वागत किया गया.

भारत यात्रा के दौरान जापान के प्रधानमंत्री के साथ परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर होने की भी उम्मीद है. इस बीच, दोनों देशों के संबंधों को मजबूती देते हुए जापान, भारत को एंफीबियस प्लेन देने की घोषणा कर चुका है.

एशिया-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती महात्वाकांक्षा को रोकने के लिए जापान के साथ भारत का रणनीतिक समझौता बहुत मायने रखता है. इसके अलावा, अमेरिका, जापान और भारत मिलकर चीन को इस क्षेत्र में चुनौती दे सकते हैं, जिससे की चीन की नापाक हरकतों पर लगाम कसी जा सके.

हाल के वर्षों में भारत कई मोर्चों पर कूटनीति में मात खा चुका है और इसका गहरा असर पड़ा है. नेपाल, पाकिस्तान, बांग्लादेश भूटान, श्रीलंका, मालदीव सभी जगहों पर भारतीय कूटनीति की हार हुई है या कमजोरी देखने को मिली है. नए साल में हम सब भारत सरकार से एक नई कूटनीति की उम्मीद कर रहे हैं, जिससे कि भारत की तरफ किसी देश को आंखें दिखाने से पहले सौ बार सोचना पड़े. चीन ने पाकिस्तान, श्री लंका और मालदीव तथा अन्य देशों में हाल के वर्षों में अपनी कूटनीतिक घुसपैठ में काफी तेजी दिखाई है तथा 2014 के बाद से अमेरिका के नेतृत्व में नाटो सेना के अफगानिस्तान से जाने के बाद वह उसकी नजर अफगानिस्तान में पाकिस्तान के साथ मिलकर भारत को घेरने की है. जहां भारत ने मूलबूत सुविधाओं के विकास और शांति स्थापना के लिए काफी निवेश किया है.

अफगानिस्तान के राष्ट्रपति, हामिद करजई का बार-बार भारत का दौरा करना इस क्षेत्र की समस्याओं और भारत की भूमिका को साफ इंगित करता है. जरूरत है तो समय रहते इसे पहचानने और सटीक कदम उठाने की. जो देश जिस भाषा को समझें, उसी भाषा में उसको जवाब देने की, जिससे कि वो पलटकर जवाब देने से पहले सौ बार सोचे. भारत विश्व की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और भारत की अवहेलना करके कोई देश विश्व में अपनी कूटनीति और अर्थव्यवस्था का संचालन नहीं कर सकता. यहां तक कि अमेरिका या यूरोपीय देश भी नहीं.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

1 Comment

  1. chian koa glat fahmiya hia usako apniya galtia sudhar lana chahiya nhiato bhuat buara hoskta hia jya hiand jya bharat

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