/मौलाना महमूद मदनी की गुजरात में सरकारी मेहमान नवाजी से मचा बवाल…

मौलाना महमूद मदनी की गुजरात में सरकारी मेहमान नवाजी से मचा बवाल…

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना महमूद मदनी के अहमदाबाद प्रवास के दौरान सरकारी मेहमाननवाजी व वहां के प्रशासन द्वारा मुहैया कराई गई बुलेटप्रूफ कार में मदनी के घूमने पर देवबंदी उलेमा ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. हालांकि दारुल उलूम ने कोई भी प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया है, लेकिन देवबंदी उलेमा मदनी के इस कदम से खफा और आहत हैं.madani

कुछ माह पूर्व गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति अपनी नरमदिली दिखाने वाले मदनी का गुजरात की मोदी सरकार द्वारा विशिष्ट अतिथि जैसा सत्कार दिए जाने पर दारुल उलूम वक्फ के वरिष्ठ उस्ताद मौलाना अब्दुल लतीफ कासमी ने तल्ख टिप्पणी की है. उन्होंने कहा कि मोदी एक नहीं बल्कि हजारों निर्दोष मुसलमानों के कातिल हैं. मदनी तो क्या यदि कोई उनसे बड़ा उलेमा भी मोदी से नजदीकियां बढ़ाएगा तो मुस्लिम समाज उसे भी माफ नहीं करेगा. मुस्लिम समाज मदनी के इस तरह के क्रियाकलापों को किसी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेगा.

उन्होंने कहा कि मौलाना वस्तानवी द्वारा मोदी की जरा सी हिमायत करने पर जब मौलाना अरशद मदनी ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया था तो अब अपने भतीजे महमूद मदनी मोदी की मेहमाननवाजी स्वीकार कर रहे हैं और उनसे नजदीकियां बढ़ा रहे हैं तो यह देखना लाजिमी हो जाता है कि अपने भतीजे के खिलाफ मौलाना अरशद क्या करते हैं.

तंजीम ऑल इंडिया मजलिस उलेमा के महासचिव कारी रहीमुद्दीन कासमी ने कहा कि यदि मौलाना महमूद मदनी मोदी के पक्ष में मुस्लिमों से अपील करें तो भी मुस्लिम समाज मोदी को वोट नहीं देगा. मौलाना मदनी को ऐसे सांप्रदायिक नेताओं से बचना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से कौम में गलत संदेश जाता है. उन्हें मोदी का अतिथि सत्कार स्वीकार नहीं करना चाहिए था.

कुल हिंद राबता-ए-मसाजिद के महामंत्री मौलाना अब्दुल्ला इब्नुल कमर ने कहा कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद के जिम्मेदार पद पर रहते हुए उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए. कुछ भी करने से पहले उन्हें कौम के रहनुमाओं से सलाह लेनी चाहिए थी. मौलाना महमूद मदनी मोदी की गोद में बैठते हैं तो उनकी बिरादरी यानी उलेमा ही इसका सबसे ज्यादा विरोध करेंगे.

उधर, महमूद मदनी ने फोन पर बताया कि उन्हें जेड प्लस सुरक्षा मिली हुई है. इसी के तहत उन्हें किसी भी स्टेट में जाने पर बुलेट प्रूफ गाड़ी व अन्य सुरक्षा मुहैया कराई जाती है. अहमदाबाद में भी यही हुआ था. मीडिया इसे तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहा है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.