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ऑनलाइन शॉपिंग करते समय साइबर शातिरों से सावधान…

By   /  December 31, 2013  /  No Comments

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-संजय मिश्र||
आप क्रेडिट कार्ड [सीसी] का इस्तेमाल कर रहे हैं या फिर ई-बैंकिंग तो जरा संभलकर. हो सकता है आप किसी साइबर शातिर की नजरों के साए में हों. एटीएम कार्ड नंबर और पिन की जानकारी हासिल कर उससे ऑनलाइन शापिंग करने वाले ठग अब क्रेडिट कार्ड के बकाए के नाम पर घर आकर वसूली कर रहे हैं. कार्ड का ब्यौरा हासिल कर ऑनलाइन खरीददारी से भी चूना लगा रहे हैं. साइबर शातिरों के इस नए पैंतरे का शिकार हुए हैं इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता व नोएडा में तैनात उनकी पत्नी. उन्होंने ठगी की शिकायत शिवकुटी थाने में दर्ज कराई है.cybercrime
शिवकुटी थाना क्षेत्र के गोविंदपुर मोहल्ले में रहने वाले अरुण वर्मा हाई कोर्ट अधिवक्ता हैं. पीसीएस अधिकारी उनकी पत्नी नोएडा में तैनात हैं. अरुण ने साल भर पहले स्टेट बैंक से क्रेडिट कार्ड लिया था. चूंकि कार्ड की ज्यादा जरूरत पत्नी को रहती थी, लिहाजा क्रेडिट कार्ड के स्टेटमेंट के लिए फार्म भरते वक्त अरुण ने पत्नी का मोबाइल नंबर दे दिया था. 13 अक्टूबर को महिला अधिकारी के मोबाइल नंबर पर कॉल आई. उसने बताया एसबीआइ की क्रेडिट कार्ड सेवा से बोल रहा है. उनके कार्ड पर कुछ रुपयों का बकाया है. उन्होंने कहा कि वह अभी व्यस्त हैं. किसी दिन पैसे जमा करा देंगी. इस पर कॉल करने वाले ने कहा कि यदि वह अपने घर का पता बता दें तो वह पैसे वहां से संग्रहित कर लेगा. यह तरीका सुविधाजनक था लिहाजा उन्होंने घर का पता बता दिया. थोड़ी ही देर बाद एक व्यक्ति उनके घर पहुंचा. उसने गुड़गांव के एसबीआइ क्रेडिट कार्ड सेवा की एक रसीद दी और क्रेडिट कार्ड के बकाया के नाम पर आठ सौ रुपये ले लिए.
उसके बाद महिला अधिकारी ने क्रेडिट कार्ड से कोई खरीददारी नहीं की मगर 25 अक्टूबर को उनके कार्ड से 7800 की ऑनलाइन शापिंग की गई. स्टेटमेंट आया तो उन्होंने सोचा कि शायद पहले की गई खरीददारी का बिल वर्ष के अंत में आ रहा है. यह सिलसिला यहीं नहीं थमा. 25 दिसंबर को फिर उनके कार्ड से 1900 रुपये की खरीददारी की गई तो उनका माथा ठनका. इस वक्त कार्ड अरुण के पास था. उन्होंने नया स्टेटमेंट आने की बात बताई तो अगले दिन अरुण ने बैंक जाकर कार्ड सरेंडर किया और बकाया वसूलने वालों से लेकर बगैर खरीददारी के बिल आने की बात बताई तो बैंक अधिकारी भी स्तब्ध रह गए. जानकारी लेने पर पता चला कि बैंक की ओर से कभी उनके घर बकाए के लिए किसी को भेजा ही नहीं गया था. अरुण ने शिवकुटी थाने में तहरीर दी है. पुलिस मामले की छानबीन कर रही है.

साइबर शातिर की डायरी से मिले थे पासवर्ड और मास्टर पासवर्ड
साइबर क्राइम सेल के प्रभारी ज्ञानेंद्र राय ने 21 दिसंबर को ऐसे साइबर क्रिमिनल को पकड़ा जो लोगों के एटीएम कार्ड और पिन नंबर का इस्तेमाल कर लाखों की ऑनलाइन शापिंग कर चुका था. धनंजय सिंह नाम का यह ठग गाजियाबाद के एक संस्थान से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर जरायम की दुनिया में उतर चुका है. उसके पास पुलिस को डायरी मिली थी, जिसमें 98 लोगों के एटीएम, डेबिट, क्रेडिट कार्ड नंबर, पासवर्ड व मास्टर पासवर्ड मिले थे.

इन बातों का रखें ख्याल
– अपने एंड्रॉयड फोन पर एटीएम व क्रेडिट कार्ड का पिन नंबर न सुरक्षित करें. इस तरह के फोन के जरिए ऑनलाइन शापिंग भी न करें.
– एटीएम का इस्तेमाल करते समय यह देख लें कि बूथ में कोई और तो नहीं है.
– एटीएम का प्रयोग करते समय यह देख लें कि की बोर्ड कहीं वचरुअल (आभासी) तो नहीं. शातिर दिमाग ठग एटीएम के की बोर्ड पर वचरुअल की बोर्ड लगाकर भी पिन नंबर हासिल करते हैं.
– एटीएम व क्रेडिट कार्ड को स्वैप करते वक्त इस बात का ध्यान रखें कि कहीं उसमें कोई और इक्यूपमेंट तो नहीं लगा जो कार्ड की क्लोनिंग कर रहा हो.
– किसी भी अजनबी को अपना एटीएम व क्रेडिट कार्ड का नंबर न दिखाएं. संभव है कि कार्ड नंबर हासिल करने वाला शख्स एटीएम या शोरूम में लगे हाईटेक सीसीटीवी कैमरे की मदद से पिन नंबर इंट्री की वीडियो फुटेज निकाल ले.

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  • Published: 4 years ago on December 31, 2013
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  • Last Modified: December 31, 2013 @ 1:39 pm
  • Filed Under: अपराध

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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