/एक दिन में दो बार गैंगरेप से पीड़ित युवती के शव पर राजनीति…

एक दिन में दो बार गैंगरेप से पीड़ित युवती के शव पर राजनीति…

एक दिन में दो बार गैंगरेप से पीड़ित 16 वर्षीया नाबालिग की शहर के अस्पताल में हुई मौत के बाद बुधवार को वाम दल और कोलकाता पुलिस उसका अंतिम संस्कार करने के मुद्दे को लेकर उलझ गए. 25 अक्टूबर को दो बार अत्याचार का शिकार हुई पीड़िता ने जल जाने के कारण कल सरकारी अस्पताल में दम तोड़ दिया. पीड़िता ने बीते 23 दिसंबर को खुद को आग लगा ली थी. लड़की के पिता एक टैक्सी चालक हैं. उन्होंने कहा कि ट्रेड यूनियन ने तय किया है कि शव को पीस हैवेन नामक शवग्रह में रखा जाएगा और शव के साथ दिन में शोक रैली निकाली जाएगी.

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पुलिस सूत्रों ने कहा है कि पीड़ित लड़की ने अस्पताल में दिए बयान में कहा है कि उसने आत्महत्या की कोशिश नहीं की. दो लोगों ने उसे ज़िंदा जलाने की कोशिश की. पुलिस ने उन दोनों लोगों को गिरफ़्तार कर लिया है. उनके खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया गया है.

लड़की के पिता ने कहा कि जिस समय शव को कल देर रात शवगृह में ले जाया जा रहा था, तब पुलिस ने बिना परिवार की अनुमति के इसे जबरन अंतिम संस्कार के लिए ले लिया. माकपा के राज्य सचिवालय के सदस्य राबिन देब ने बताया कि पुलिस ने शव का अंतिम संस्कार करने के लिए इसे बलपूर्वक वापस ले लिया और नीमतला शवदाह गृह में उसके अंतिम संस्कार की कोशिश की.

पुलिस ऐसा करने में विफल रही, क्योंकि पीड़िता का मृत्यु प्रमाणपत्र उसके पिता के पास था. जैसे ही खबर फैली, हम भी तुरंत शवदाह केंद्र में पहुंच गए और हमने विरोध जताकर पुलिस को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया. देब ने कहा कि पुलिस ने यह तर्क दिया कि शव के साथ शोक रैली निकालने की अनुमति नहीं दी जा सकती, क्योंकि नए साल के जश्न के कारण पुलिसकर्मियों की कमी है.

हालांकि पुलिस ने इन आरोपों से इंकार कर दिया है. पुलिस मुख्यालय में संयुक्त आयुक्त राजीव मिश्रा ने बताया कि यह बिल्कुल झूठा आरोप है. जो भी किया गया, वह बिधाननगर की पुलिस और परिवार के सदस्यों से सलाह-मश्विरा करने के बाद किया गया. लड़की का घर बिधाननगर की पुलिस के ही अधिकार क्षेत्र में आता है.

संपर्क किए जाने पर बिधाननगर के पुलिस उपायुक्त अर्नब घोष ने कहा कि यह घटना कोलकाता पुलिस के अधिकार क्षेत्र में घटी, इसलिए हम इसपर टिप्पणी नहीं कर सकते. शव को फिलहाल परिवार और सीटू के संरक्षण में रखा गया है और उन्होंने दोपहर में शहर में शोक रैली आयोजित करने का फैसला किया है.
(एजेंसी)

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.