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भारत ने अगस्ता वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर सौदे को तुरंत प्रभाव से रद्द किया..

By   /  January 1, 2014  /  4 Comments

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भारत ने विवादों में घिरे अगस्ता वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर सौदे को तुरंत प्रभाव से रद्द कर दिया है. भारत सरकार ने अगस्ता वेस्टलैंड से 8 अक्तूबर 2010 को 12 वीवीआईपी हेलिकॉप्टरों की ख़रीद के लिए सौदा किया था. ब्रितानी-इतालवी कंपनी अगस्ता वेस्टलैंड के साथ हुए 77 करोड़ डॉलर के इस सौदे में रिश्वतखोरी के आरोप लगे थे.agustawestland_helicopter_pa

सौदा रद्द होने से कुछ देर पहले रक्षा मंत्री एके एंटनी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाक़ात की. रक्षा मंत्रालय ने सौदा रद्द होने के पीछे अगस्ता वेस्टलैंड के ‘विश्वसनीयता करार के उल्लंघन’ को कारण बताया है.

अटॉर्नी जनरल की राय के आधार पर भारत सरकार का ये मानना रहा है कि विश्वसनीयता से जुड़े मुद्दों पर मध्यस्थता नहीं हो सकती लेकिन अगस्ता वेस्टलैंड इस मामले में मध्यस्थता करना चाहती है और उसने मध्यस्थ की नियुक्ति कर दी है इसलिए भारतीय रक्षा मंत्रालय ने अटॉर्नी जनरल से दोबारा राय मांगी थी.

रक्षा मंत्रालय का कहना है कि सरकार के हितों की रक्षा के लिए उसने जस्टिस बीपी जीवन रेड्डी को अपनी ओर से मध्यस्थ नियुक्त किया है.

रक्षा मंत्री एके एंटनी ने कहा है कि उन्हें क्लिक करें अगस्ता वेस्टलैंड के इस इनकार पर यक़ीन नहीं था कि उसने 12 हेलिकॉप्टरों की ख़रीद के लिए सौदा अपने पक्ष में करने के लिए बड़े नेताओं को रिश्वत दी थी.

इतालवी रक्षा ग्रुप फ़िनमैकेनिका की इकाई अगस्ता वेस्टलैंड ने किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया था.

अगस्ता वेस्टलैंड से सौदा रद्द होना सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है क्योंकि जिन 12 हेलिकॉप्टरों का सौदा हुआ था उन में से तीन को भारत को सौंपा जा चुका है और क़रीब एक तिहाई क़ीमत भी चुकाई जा चुकी है.

इतालवी जांचकर्ताओं ने भारत को इस सौदे की जांच करने के लिए मजबूर किया. इसके बाद अपनी जांच में केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई ने आरोप लगाया था कि भारत के पूर्व वायुसेना प्रमुख एसपी त्यागी ने इस मामले में फ़िनमैकेनिका से रिश्वत ली थी. सीबीआई का कहना था कि फ़िनमैकेनिका ने यह पैसा मॉरीशस जैसे देशों के ज़रिए भेजा था. हालांकि एयरचीफ़ मार्शल त्यागी ने अपने ऊपर लगाए गए इन आरोपों को ख़ारिज कर दिया था.

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  • Published: 4 years ago on January 1, 2014
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  • Last Modified: January 1, 2014 @ 8:26 pm
  • Filed Under: देश

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

4 Comments

  1. Ashok Gupta says:

    13.5.2014 KO CHUNAVA HAI IS KARAN RADH KIYA GAYA

  2. mahendra gupta says:

    अब तो सहस आया, वरना इटली कि सरकार या किसी कंपनी के खिलाफ कुछ करने का सहस ही कहाँ जुतपति थी हमारी सरकार.शायद देर आयद दुरुस्त ही हो.

  3. अब तो सहस आया, वरना इटली कि सरकार या किसी कंपनी के खिलाफ कुछ करने का सहस ही कहाँ जुतपति थी हमारी सरकार.शायद देर आयद दुरुस्त ही हो.

  4. haliy kayptar kharida bagar ghuska kam nhia hota hia kya choar sarkar
    jya hiand jya bharat

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