/राजस्थान में भी बिजली और पानी के दाम कम करने की मांग…

राजस्थान में भी बिजली और पानी के दाम कम करने की मांग…

राजस्थान के उपभोक्ता संगठनों ने दिल्ली की तर्ज पर राज्य में भी पानी,बिजली के दामों में कटौती करने और इन्हें तर्कसंगत बनाए जाने की मांग की है. साथ ही विद्युत एवं पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने और ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त विद्युत आपूर्ति की भी मांग की है.dr. anant sharma

प्रदेश के 150 से अधिक उपभोक्ता संगठनों की शीर्ष संस्था अखिल राजस्थान उपभोक्ता संगठन महासंघ के मुख्य संरक्षक डा. अनन्त शर्मा ने बताया कि राज्य की जनता ने जिस तरह भारी बहुमत से भाजपा को शासन की जिम्मेदारी सौंपी है. उससे जनता में सरकार के प्रति आशाएं बढी है और इसी अनुरप जनहित में कदम उठाए जाने चाहिये.

उल्लेखनीय है कि भाजपा ने उपभोक्ता संगठनों की मांग पर अपने चुनाव घोषण पत्र में भी स्पष्ट किया है कि विद्युत एवं पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित बनाई जाएगी. ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त समय विद्युत आपूर्ति की जाएगी एवं विद्युत एवं पेयजल की दरों में अतार्किक बढोतरी नहीं होगी.

उपभोक्ता संगठनों ने भाजपा घोषणा पत्र में शामिल उपभोक्ता मांग पत्र के अन्य मुद्दों जिनमें उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत स्थापित मंचों को सुदृढ करने. खाद्य सुरक्षा कानून को अधिक प्रभावी बनाने. मिलावाट. कम नाप तोल व कालाबाजारी को रोकने के प्रभावी प्रयास करने और आम आदमी के सरकारी विभागों से संबंधित अभाव अभियोगों के त्वरित निस्तारण के लिए जन शिकायत निवारण समिति के गठन पर भी शीघ, कार्यवाही की मांग की है. डा. शर्मा ने कहा कि येसभी मुद्दे आम जनता से जुडे हुए है और सरकार को इन्हें प्राथमिकता से लागू करना चाहिये.

इस संबंध में आगामी 12 जनवरी को महासंघ से जुडे उपभोक्ता संगठनों के शीर्ष पदाधिकारियों की हरियाणा भवन में बैठक भी आयोजित की जाएगी जिसमें आगामी कार्य योजना पर विचार किया जाएगा. बैठक की अध्यक्ष्ता डा. अनन्त शर्मा करेंगे.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.