/तुम क्या करोगे..बाबा जी का ठुल्लू…

तुम क्या करोगे..बाबा जी का ठुल्लू…

-अशोक मिश्र||
चुनावी महासंग्राम चल रहा था. ‘राष्ट्रीय लूट-खसोट पार्टी’ के स्टार प्रचारक भकोसानंद अपनी पार्टी के पीएम पद के दावेदार गुनहगार की जनसभा को संबोधित कर रहे थे, ‘भाइयो और बहनो! आजादी के चालीस साल तक इस देश पर शासन करने वाली पार्टी कहती है कि उसने देश की जनता को मनरेगा दिया, सूचना का अधिकार दिया, फूड सिक्योरिटी बिल का तोहफा दिया. मैं कहता हूं, इस देश की जनता को तुमने क्या समझ रखा है, भिखारी? तुमने दिया और जनता ने ले लिया. चालीस साल तक जनता को लूटने वाली पार्टी कbabaji_ka_thulluहती है कि उसने देश के गरीबों को तीन रुपये किलो चावल, दो रुपये किलो गेहूं और एक रुपये में मोटा अनाज दिया. भाइयो और बहनो! इस देश का गरीब कोई गाय-बैल है क्या? जिस अनाज को गाय-बैल खाने से भी इंकार कर दें, उस अनाज को बांटकर गरीबों को गाय-बैल से भी बदतर बना दिया है. मेरे प्यारे भाइयो और बहनो! इसी देश में एक भगवा पार्टी है. उसने देखा कि उसके प्रतिद्वंद्वी सस्ता अनाज बांटकर बाजी मार ले जा रहे हैं, तो उस पार्टी की राज्य सरकारों ने गाय-बैलों का चारा गरीबों को खिलाने के नाम पर और सस्ता कर दिया. भगवा पार्टी की राज्य सरकारों ने गरीब जनता रूपी गाय-बैलों को एक रुपये में उनका चारा देने की घोषणा की है. भाइयो और बहनो! मैं इन दोनों पार्टियों से पूछना चाहता हूं कि उन्होंने देश की आम जनता को समझ क्या रखा है? वह इनकी भीख पर जिंदा रहेगी?’
इतना कहकर भकोसानंद जी ने रुमाल से अपना मुंह पोछा और फिर कहा, ‘मेरे प्यारे भाइयो और बहनो! आपने आजादी के 66-67 साल में कभी सांपनाथ को दिल्ली की कुर्सी पर बिठाया, तो कभी नागनाथ को. आप बस एक बार…सिर्फ एक बार हमारी ‘राष्ट्रीय लूट-खसोट पार्टी’ पर भरोसा करके देखिए, हमारी पार्टी के उम्मीदवार गुनहगार जी को प्रधानमंत्री बनाकर देखिए, इस देश में वह सब कुछ होगा, जो आप चाहते हैं. हमारी पार्टी का दावा है कि गाय-बैलों का चारा तीन रुपये या एक रुपये में क्यों? मुफ्त में क्यों नहीं बांटा जा सकता है. हमारी पार्टी की सरकार बनी, तो देश की सत्तर फीसदी आबादी को गेहूं, चावल, सब्जी, तेल ही नहीं, बल्कि खाना बनाने के लिए लकड़ी, उपले और गैस तक मुफ्त दिए जाएंगे. आप अपने घरों में जितनी भी चाहें बिजली-पानी खर्च कर सकते हैं. आप अगर नहाने धोने में बीस लीटर पानी खर्च करते हैं, तो आप म्लेच्छ हैं, आपको नहाने-धोने की आदत नहीं है. आप सौ लीटर पानी खर्च कीजिए, दो सौ लीटर खर्च कीजिए, आपसे इसका शुल्क नहीं लिया जाएगा. आापके घरों में पानी बिल्कुल फ्री आएगा. आप कमरे में एक बल्ब जलाएं, हीटर जलाएं, गर्मी के दिनों में भी आप हीटर जलाकर अपना कच्छा-बनियान सुखाइए, सरकार को कोई परेशानी नहीं होगी. अगर आपके घर में कोई सरकारी आदमी बिल लेकर आता है, तो उसको पीटिए. हां, हत्या मत कीजिए. किसी सरकारी आदमी को ठोकने-पीटने का हक तो आपके पास है, लेकिन हत्या करने का नहीं. आपके घर रोज पुलिस वाला आकर पूछेगा, ‘भाई साहब! आपको कोई दिक्कत तो नहीं है?’ ऐसी होगी पुलिस और पुलिसिया व्यवस्था. बस.. हमारी पार्टी की सरकार बनने दीजिए.’
इतना कहकर भकोसानंद जी थोड़ी देर के लिए रुके. फिर बोले, ‘आप चिंता मत कीजिए. अरष्टाचार-भ्रष्टाचार नहीं रुकने वाला इस देश से. हमारी पार्टी की सरकार आई, तो संसद और विधानसभाओं में विधेयक पारित करवाकर भ्रष्टाचार को कानूनी तौर पर मान्यता दिलाई जाएगी. अरे वह भी कोई देश है, जहां किसी तरह का भ्रष्टाचार न होता हो, लूट-खसोट न होती हो. भाइयो और बहनो! मैं आप सब लोगों से एक बात पूछना चाहता हूं. अगर पूरे देश में रामराज्य आ जाए, इस देश के सारे लोग सद्चरित्र, ईमानदार, कर्तव्यनिष्ठ हो जाएंगे. तो क्या अच्छा लगेगा? दुनिया एकदम बेरंग नहीं हो जाएगी? देश की सभी राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टियां भ्रष्टाचार मिटाने के नाम पर आपको पिछले छह-सात दशक से बेवकूफ बना रही हैं. हमारी पार्टी ‘राष्ट्रीय लूट-खसोट पार्टी’ खुलेआम घोषणा करती है कि इस देश का अगर विकास हो सकता है, तो सिर्फ और सिर्फ भ्रष्टाचार से. अगर आपके मोहल्ले की सड़क बननी है, तो भ्रष्ट अधिकारी कुछ ले-देकर दो हफ्ते में बनवा देगा. नहीं तो, बैठे रहिए दस-पांच साल तक ईमानदारी का राग अलापते. अपके मोहल्ले की सड़क बनाने के नाम पर एक तसला गिट्टी तक नहीं गिरेगी.’ तभी हाईस्कूल के एक छात्र ने भकोसानंद जी से पूछा, ‘नेता जी! मेरे मम्मी-पापा मुझे रोज पॉकेट मनी नहीं देते हैं. तो क्या आपकी सरकार छात्र-छात्राओं को पॉकेटमनी भी दिलाएगी?’ बीच में टोके जाने से खफा भकोसानंद जी ने गरजते हुए कहा, ‘जिसका भी यह बच्चा है, वह और ऐसे तमाम लोग एक बात अच्छी तरह से समझ लें. जब सब कुछ हमारी ही सरकार कर देगी, तो आप लोग क्या करेंगे..बाबा जी का ठुल्लू? अरे! जब लूटने की, खसोटने की, भ्रष्टाचार करने की पूरी छूट दे दी, तो अब गोदामों से माल लूटकर आपके घर भी पहुंचाया जाए क्या? अरे..इतनी मेहनत तो आप लोगों को करनी ही पडेÞगी?’ इतना कहकर भकोसानंद जी ने अपना भाषण खत्म किया और दूसरी सभा में शामिल होने चले गए.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.