/वरिष्ठ पत्रकार इशरत अली सिद्दीकी के निधन पर लखनऊ जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन ने शोक व्यक्त किया

वरिष्ठ पत्रकार इशरत अली सिद्दीकी के निधन पर लखनऊ जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन ने शोक व्यक्त किया

लखनऊ. उत्तर प्रदेश जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन (उपजा) के प्रांतीय कार्यालय में शुक्रवार को लखनऊ जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन (एलजेए) की बैठक में उर्दू के नामचीन पत्रकार पद्मश्री श्री इशरत अली सिद्दीकी के निधन पर शोक व्यक्त किया गया.flower_6

बैठक को संबोधित करते हुये एलजेए के अध्यक्ष अरविंद शुक्ला ने श्री इशरत अली सिद्दीकी के जीवन पर प्रकाश डाला कि विपरित परिस्थितियों में भी श्री सिद्दीकी ने पत्रकारिता के मूल्यों को सर्वोपरि रखा और अपने लेखन और सादगी से एक ऐसी अमिट छाप छोड़ी है जो मौजूदा व आने वाले पीढि़यों, पत्रकारों और लेखकों को हमेशा प्रेरित करती रहेगी.

लजेए के महासचिव केके वर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि श्री सिद्दीकी के निधन से पत्रकारिता को अपूरणीय क्षति हुई है.

शोक सभा में एलजेए के अध्यक्ष अरिवंद शुक्ला, महामंत्री केके वर्मा, उपाध्यक्ष सुशील सहाय, मंत्री डॉ आशीष वशिष्ठ, अनुराग त्रिपाठी, कोषाध्यक्ष मंगल सिंह उपजा के प्रदेश मंत्री पं0 त्रयम्बकेशर त्रिवेदी, वरिष्ठ पत्रकार तारकेशवर मिश्रा, नरसिंह नारायण पाण्डेय, अजय मिश्र, अनुपम चौहान, सुशील कुमार ‘जिद्दू’, डॉ. पूनम, ए. अहमद सौदागर एवं अनेक वरिष्ठ पत्रकार एवं पदाधिकारी उपस्थित थे.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.