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नरेंद्र मोदी के लिए 150 करोड़ रुपये का बुलेटप्रूफ ऑफिस तैयार, जल्द ही शिफ्ट होंगे …

By   /  January 4, 2014  /  No Comments

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-हरेश कुमार||

एक तरफ, जहां मीडिया में आप पार्टी और उसके संरक्षक अरविंद केजरीवाल के द्वारा दिल्ली में भगवान दास रोड पर अपने लिए दस कमरों का डुप्लेक्स लिए जाने पर लोगों ने इसे सत्ता में आने के बाद केजरीवाल को भला-बुरा कहना शुरू कर दिया तो दूसरी तरफ इसी देश में ऐसे कई मुख्यमंत्री हैं जो इस देश में भव्यता से रहते हैं लेकिन उन पर कभी उंगली नहीं उठती. इसका सीधा-सपाट कारण है कि इन सभी ने अपने चुनावों में कभी भी जनता से सादगी का वादा नहीं किया और ना ही कभी कहा कि वे वीवीआईपी संस्कृति को नष्ट करेंगे. वे सब तो इस संस्कृति को बढ़ावा देने के पक्ष में रहे थे. तभी तो केजरीवाल के हर एक कदम की नुख्ताचीनी हो रही है. उनके हर अच्छे-बुरे काम पर आलोचक टिप्पणी कर रहे हैं तो प्रशंसक इसे बेकार की कवायद कहने से नहीं चूक रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ दिनों के दिल्ली में सत्ताधारी पार्टी के कार्यों पर गहरी नजर रखें तो आप पायेंगे कि खुद आप और उनके नेताओं की कार्यप्रणाली अन्य दलों के नेताओं से इतर नहीं रही है और वे खुद आलोचकों को मौका दे रहे हैं. अगर, ऐसा हुआ तो एक ऐसी पार्टी के बारे में लोगों की धारणा समय से पहले टूट जायेगी जिस पर करोड़ों लोगों ने राजनीति को बदलने का ख्वाब देखा है.modiswarnimsankul_b1_16_4_20

अब आते हैं, भारतीय जनता पार्टी की ओर से अगले लोकसभा चुनावों में देश के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार और गुजरात में पार्टी का सफल नेतृत्व करने वाले नरेंद्र मोदी के नए ऑफिस के बारे में जिसमें वे सब आने वाले कुछ समय के बाद शिफ्ट होने वाले हैं. बतातें चलें कि गुजरात के मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार, नरेंद्र मोदी के लिए अहमदाबाद में 150 करोड़ रुपये का एक बुलेट प्रूफ ऑफिस बनकर तैयार हो चुका है जिसमें वे जनवरी मध्य के बीच, हिंदू कैलेंडर के अनुसार, खरमास (ऐसी मान्यता है कि खरमास 15 दिसंबर से 15 जनवरी में कोई भी शुभ काम को अंजाम नहीं दिया जाता है) के बाद प्रवेश करेंगे. सूत्रों के अनुसार, इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर सारी तैयारियां कर ली गई हैं. इसे नॉर्थ ब्लॉक नाम दिया जायेगा. गौरतलब है कि नईदिल्ली में पीएम हाउस को साउथ ब्लॉक या दक्षिणी परिसर कहा जाता है.

modi officeइस ब्लॉक को दिल्ली के साउथ ब्लॉक के तर्ज पर बनाया गया है और यहीं से प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, गुजरात के 6 करोड़ लोगों को स्वच्छ प्रशासन देने की वर्तमान गुजरात सरकार की योजना मूर्त रूप लेगी. इसमें गुजरात के मंत्रियों का ऑफिस भी होगा. इस परिसर को आधिकारिक तौर पर ‘पंचाम्रूत’ नाम दिया गया है और इसे बनाने में एक साल से भी कम समय लगा है. चार मंजिल की इस नवनिर्मित इमारत की डिजाइन गुजरात के नामचीन आर्किटेक्चर ने तैयार की है जिन्होंने गुजरात उच्च न्यायालय, अमूल डेयरी व अन्य कॉरपोरेट हाउस को भी डिजाइन किया है.इसे गुजरात के रोड एंड बिल्डिंग यानि सड़क एवं निर्माण विभाग ने तैयार किया है.

विभाग के अनुसार, इसका क्षेत्रफल 35 हजार स्क्वायर फीट है. गुजरात के मुख्यमंत्री पर आतंकी हमले के खतरे को देखते हुए शीशे व दरवाजे में बूलेट प्रूफ ग्लास का इस्तेमाल किया गया है. इसके अलावा, कैबिनेट बैठक के लिए विशेष वातानुकूलित कमरों का निर्माण किया गया है, जो लगातार सीसीटीवी कमरे की निगरानी में रहेगा. सड़क व निर्माण विभाग के अधिकारियों के अनुसार, नया ऑफिस सीधे तौर पर राज्य विधानसभा से जुड़ेगा जहां मुख्यमंत्री, अधिकारीगण और विधायक असेंबली हॉल में प्रवेश कर सकते हैं. मोदी ने भवन के डिजाइन में खुद गहरी रूचि ली है. वर्तमान में, मोदी का ऑफिस सचिवालय के ब्लॉक नंबर वन में पांचवी मंजिल पर है. हाल के समय में केंद्रीयकृत प्रशासन में लगातार बढ़ोतरी हुई है और द्वितीय, तृतीय और चतुर्थ मंजिल पर कर्मचारियों की संख्या में काफी बढ़ोतरी देखने को मिली है. देखते हैं, दूसरों पर उंगली उठाने वाले लोग खुद की सादगी के बारे में क्या कहते हैं. सारे देश-दुनिया की निगाहें इस तरफ लगी हुई हैं.

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  • Published: 4 years ago on January 4, 2014
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  • Last Modified: January 4, 2014 @ 10:30 pm
  • Filed Under: राजनीति

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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