/सुशील कुमार शिंदे के बयान पर भड़के नरेंद्र मोदी…

सुशील कुमार शिंदे के बयान पर भड़के नरेंद्र मोदी…

अल्पसंख्यकों के संबंध में राज्यों को दिशानिर्देश जारी करने संबंधी पत्र लिखने के गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे के बयान ने तूल पकड़ लिया है.sushil-modi24

भाजपा के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने इस मामले में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिख कर गृहमंत्री शिंदे के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.

शिंदे के इस रुख को अल्पसंख्यक समुदाय को रिझाने वाला निर्लज्ज प्रयास करार देते हुए मोदी ने प्रधानमंत्री को अपने कैबिनेट सहकर्मी को राजनीतिक आतुरता के लिए सिद्धांतों की कुर्बानी नहीं देने का सुझाव देने की नसीहत दी है.

पत्र में मोदी ने आपराधिक मामलों में धर्म के आधार पर अलग-अलग व्यवहार करने के शिंदे के रुख को खतरनाक बताते हुए कहा है कि इससे देश की आपराधिक न्याय प्रणाली सवालों के कटघरे में होगी.

उल्लेखनीय है कि शिंदे आतंकवाद के मामले में गलत कारणों से अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों को गिरफ्तार करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश देने संबंधी पत्र गुजरात समेत सभी राज्यों को पहले ही लिख चुके हैं.

शिंदे ने राज्यों को समीक्षा समितियों का गठन कर आतंकवाद के मामले में गिरफ्तार किए गए अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े मामलों की समीक्षा करने, निर्दोष लोगों को तत्काल रिहा करने के साथ ही मुआवजा देने और पुनर्वास करने का भी निर्देश इसी पत्र में दिया.

इस मुद्दे पर जनसभाओं में लगातार तीखे हमले कर रहे मोदी ने अब प्रधानमंत्री को पत्र लिख कर शिंदे की खिंचाई की है. मोदी ने कहा कि इससे न केवल आपराधिक न्याय प्रणाली के बारे में गलत संदेश जाएगा, बल्कि कानून लागू करने वाली एजेंसियां बुरी तरह हतोत्साहित होंगी.

मोदी ने पत्र में कहा है कि अपराध अपराध होता है, गृह मंत्री को यह समझना चाहिए कि धर्म के आधार पर दोषी या निर्दोष होने का निर्धारण नहीं किया जा सकता.

शिंदे ने पिछले हफ्ते बयान दिया था कि वह सभी राज्य सरकारों को पत्र लिखेंगे कि बिना सुनवाई के जेलों में बंद अल्पसंख्यक समुदाय के युवकों की भूमिका की जांच के लिए समीक्षा या स्क्रीनिंग कमेटियों का गठन किया जाए.

शिंदे ने गुजरात सहित सभी राज्य सरकारों को पत्र लिखा है कि अल्पसंख्यक समुदाय के किसी भी सदस्य को अगर गलत कारणों से गिरफ्तार किया गया है तो ऐसी गलती करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए.

गलत तरीके से गिरफ्तार लोगों को न केवल तुरंत रिहा किया जाना चाहिए बल्कि मुख्य धारा में लाने के लिए उन्हें उपयुक्त मुआवजा दिया जाना चाहिए और उनका पुनर्वास किया जाना चाहिए.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.